साधना की दृष्टि से १४ विद्या और ६४ कलाआें की शिक्षा का बीजारोपण करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शनानुसार ‘ईश्‍वरप्राप्ति हेतु कला’ यह ध्येय सामने रखकर अनेक साधक चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नृत्यकला, वास्तुविद्या आदि कलाआें के माध्यम से साधना कर रहे हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका जन्म, आध्यात्मिक वृत्तिसम्पन्न परिवार, और शिक्षा तथा छात्र जीवनमें किया कार्य

होनहार बिरवान के, होत चीकने पात इस उक्ति के अनुसार परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का जन्म ६ मई १९४२ को श्री. बाळाजी वासुदेव आठवलेजी और श्रीमती नलिनी बाळाजी आठवलेजी के परिवार में हुआ । आगे वे दोनों संतपद पर विराजित हुए ।

जापान में होती है हिंदू देवताओं की पूजा !

जापान में हिंदू देवी देवताओं की पूजा की जाती है। जापान में कई हिंदू देवी-देवताओं को जैसे ब्रह्मा, गणेश, गरुड़, वायु, वरुण आदि की पूजा आज भी की जाती है। कुछ समय पहले नई देहली में फोटोग्राफ़र बेनॉय के बहल के फोटोग्राफ़्स की एक प्रदर्शनी हुई, जिससे जापानी देवी-देवताओं की झलक मिली।

श्रीविष्णु

ईश्‍वरने प्रजापति, ब्रह्मा, शिव, विष्णु एवं मीनाक्षी, इन पांच देवताओंसे (तत्त्वोंसे) विश्‍वकी निर्मिति की । इन पांच देवताओंमें ईश्‍वरकी सर्व विशेषताएं हैं । श्रीविष्णुकी विशेषताएं आगे दिए अनुसार हैं ।

कुछ देवियों की उपासना की विशेषताएं

अंबाबाई एवं तुळजाभवानी ये जिनकी कुलदेवता होती हैं, उनके घर विवाह जैसी विधि के पश्चात देवी की स्तुति करते हैं । कुछ लोगों के यहां विवाह जैसे कार्य निर्विघ्न होने हेतु सत्यनारायण की पूजा करते हैं

कुमकुमार्चन कैसे करें ?

उपासनामें कुमकुमार्चनका महत्वपूर्ण स्थान है। कुमकुमार्चन करने के उपरांत मूर्ति जागृत होती है। देवी को कुमकुमार्चन करने की दो पद्धतियां हैं।

देवी की आंचल भराई कैसे करें ?

साडी और चोली वस्त्र-नारियल से देवी का आंचल भरना, यह देवी के दर्शन के समय किया जानेवाला एक प्रमुख उपचार है । यह शास्त्र समझकर, इसे भावपूर्ण करने से, उसका आध्यात्मिक लाभ अधिक प्रमाण में श्रद्धालु को मिलता है ।

देवीकी उपासना

पढीएं देवीमांको विशिष्ट फूल चढानेका शास्त्रीय आधार, देवीपूजनमें निषिद्ध फूल, देवीमांके लिए नैवेद्य बनाना, देवी मांकी आरती ।

हिन्दुओंपर आए संकट दूर करने के लिए ‘धर्मशिक्षा’ की आवश्यकता है – श्रीमती मोहिनी पांढरे, सनातन संस्था

श्रावणमास में सभी हिन्दु मिल कर बड़े आनंद के साथ त्यौहार मनाते हैं; परंतु परधर्मी हिन्दूओं के त्यौहार के दिन ही दंगे कर उस आनंद को छिन लेते हैं ! हिन्दुओं के त्यौहार आनेपर ही कानून एवं व्यवस्था का प्रश्‍न जागृत होता है।

कटक (ओडिशा) : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजीद्वारा सनातन के नूतन हिन्दी ग्रंथ का प्रकाशन

८ अगस्त को पुरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शुभहाथों सनातन संस्था के ‘प्राणशक्ति (चेतना) प्रणालीमें अवरोधोंके कारण होनेवाले विकारोंपर उपचार’ इस हिन्दी ग्रंथ का विमोचन किया गया।