धर्माचरण का महत्त्व

इस लेख से हम धर्माचरण का असाधारण महत्त्व समझने का प्रयत्न करेंगे । इसी प्रकार, धर्माचरण नहीं करने पर क्या होता है, धर्माचरण किन बातों पर आधारित है तथा खरा धर्माचरण क्या है, यह भी जानने का प्रयत्न करेंगे ।

संत ज्ञानेश्‍वर महाराजजी द्वारा रचित ज्ञानेश्‍वरी के अनमोल ज्ञानमोती !

संत ज्ञानेश्‍वर महाराजजी द्वारा रचित ज्ञानेश्‍वरी के कुछ अनमोल ज्ञानमोती इस लेख में प्रसिद्ध कर रहे हैं !

प्राचीन भारतीय ज्ञानपीठोंका गौरवशाली इतिहास !

विद्यापीठ’ का विचार सर्वप्रथम भारत ने ही जगत को दिया । आज वही भारत पश्‍चिमी मैकॉले की निरुपयोगी शिक्षापद्धति के चंगुल में जकडे हुआ है । यह देखकर, प्रत्येक भारतीय मन अस्वस्थ हो जाता है । प्राचीन भारतीय शिक्षापद्धति को वास्तविक अर्थों में गतवैभव प्राप्त करवाना हो, तो हिन्दू राष्ट्र का कोई विकल्प नहीं !

कंबोडिया के महेंद्र पर्वतपर उगम होनेवाली कुलेन नदी को तत्कालनी हिन्दू राजाआें द्वारा पवित्र गंगानदी की श्रेणी प्रदान की जाना तथा प्रजा को गंगा नदी की भांति पवित्र जल मिले तथा भूमि उपजाऊ होने के लिए पानी में १ सहस्र शिवलिंग अंकित किए जाना

वास्तव में कंभोज प्रदेश कौंडिण्य ऋषि का क्षेत्र था, साथ ही कंभोज देश एक नागलोक भी था । ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि कंभोज देश के राजा ने महाभारत के युद्ध में भाग लिया था । नागलोक होने के कारण यह एक शिवक्षेत्र भी है ।

दुष्टों के निर्दालन के लिए ब्राह्म तथा क्षात्र तेज का उत्तम उपयोग करनेवाले योद्धावतार भगवान परशुराम ! 

सत्ययुग में मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह तथा वामन ये श्रीविष्णु के ५ अवतार हुए । त्रेतायुग के प्रारंभ में महर्षि भृगु के गोत्र में जामदग्नेय कुल में महर्षि जमदग्नी तथा रेणुकामाता के घर श्रीविष्णु ने अपना छठा अवतार लिया ।

११ वे शतक में यशोधरपुरा के राजे उदयादित्यवर्मन (दूसरे) द्वारा निर्माणकार्य किया गया बापून मंदिर !

अंकोर थाम परिसर के बॅयान मंदिर से कुछ दूरी पर हमें पिरॅमिड के आकार में अब भग्न हुआ एक महान मंदिर दिखाई देता है । इसे ही बापून मंदिर कहा जाता है । ११ वे शतक के यशोधरपुरा के राजे उदयादित्यवर्मन (दूसरे) शिवभक्त थे ।

भ्रष्टाचार प्रतिबंधित करने के लिए हिन्दु राष्ट्र की स्थापना करना ही एकमात्र समाधान ! – श्रीराम काणे, सनातन संस्था

धर्मरक्षक संगठन द्वारा यहां ‘भगवा शौर्य पदयात्रा’ आयोजित की गई थी । उस पदयात्रा से पूर्व इस धर्मसभा का आयोजन किया गया था । उस समय धर्मरक्षक संगठन के नेता श्री. विनोद यादव वक्तव्य कर रहे थे ।

सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण करनेवाली वैदिक शिक्षापद्धति !

प्राचीनकाल में हमारे देश में वैदिक शिक्षणपद्धति थी । इसलिए, उस समय भारत सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र था । कहा जाता है कि तब यह देश इतना समृद्ध था कि यहां की भूमि से सोने का धुआं निकलता था । इस वैदिक शिक्षापद्धति की नींव आध्यात्मिक थी ।

अंकोर वाट : राजा सूर्यवर्मन (द्वितीय) द्वारा कंबोडिया में बनाया गया हिन्दुओं का संसार का सबसे विशाल मंदिर !

हिन्दु राजा यशोवर्मन द्वारा स्थापित अंकोर नगरी का नाम यशोधरापुरा होना, आगे उसी वंश के राजा सूर्यवर्मन (द्वितीय) द्वारा नगर के मध्य में भगवान श्रीविष्णु का भव्य परमविष्णुलोक’ मंदिर बनाना संसारका सबसे बडा हिन्दू मंदिर हिन्दुबहुल भारत में नहीं , कंबोडिया में है ।

चेन्नई में पारिवारिक स्नेहसम्मेलन में सनातन संस्था द्वारा मार्गदर्शन

बीएनआय’ इस व्यापारी गुंट ने ७ अप्रैल २०१८ को यहां के एक रिसॉर्ट में पारिवारिक स्नेहसम्मेलन का आयोजन किया था । इस कार्यक्रम में सनातन संस्था द्वारा मार्गदर्शन किया गया ।