सांप्रदायिकों का निःस्वार्थी मन

‘स्वार्थ के लिए राजकीय दल परिवर्तित करनेवाले हजारों होते हैं; परंतु स्वार्थत्यागी सांप्रदायिकों के मन में संप्रदाय परिवर्तित करने का विचार एक बार भी नहीं आता !’
-(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

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