बच्चे के विकास के लिए मां का दूध ही आदर्श अन्न !

मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणि है । पहले ५ महिनों में मां का दूध शिशु का मुख्य अन्न होता है । तब मस्तिष्क का विकास सबसे अधिक होता है; इसलिए मां के दूध में ऐसे घटक होते हैं कि जिससे वह दूध मस्तिष्क के विकास हेतु उत्कृष्ट अन्न प्रमाणित होता है ।

सहजन, जोडों में वेदना एवं भारतीय खेती

भारतीय नागरिक कैल्शियम बढाने के लिए गोलियां खाते हैं; परंतु कैल्शियम से भरपूर सहजन की फलियां खाने के प्रति उदासीनता दिखाते हैं !

युद्धकाल में उपयोगी और आपातकाल से बचानेवाली ये कृतियां अभी से करें !

‘रूस-युक्रेन युद्ध आरंभ हो गया है । युक्रेन की जनता ‘युद्ध की आंच में झुलसना क्‍या होता है ?’, इसे कैसे अनुभव कर रही है, यह प्रतिदिन आनेवाले समाचारों से हमें ज्ञात हो ही रहा है । आगे इस युद्ध में यदि अन्‍य देश भी सम्‍मिलित हो गए, तो तीसरा महायुद्ध आरंभ होने में अधिक …

रासायनिक अथवा जैविक कृषि नहीं, अपितु प्राकृतिक कृषि अपनाइए ! (भाग १)

रासायनिक कृषि स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक है, यह इस लेख से समझ में आता है । मंडी में बिकनेवाली सब्जियों पर विषैले रसायनों की फुहार किए जाने से अब प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिए आवश्यक सब्जियों की स्वयं ही उपज करना आवश्यक बन गया है ।

कृषि उत्पादों में स्थित रासायनिक अंश : नित्य आहार में समावेशित विष !

रसोई के लिए जो सब्जियां, अनाज, दालें, तेल, नमक इत्यादि का उपयोग किया जाता है, उनमें भी मानवीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घटक हो सकते हैं, यहांतक विष के अंश भी हो सकते हैं; परंतु उस विषय में कोई बोलता दिखाई नहीं देता ।

आच्छादन : ‘सुभाष पाळेकर प्राकृतिक कृषि तंत्र’ का एक प्रमुख स्तंभ !

आच्छादन, वाफसा, जीवामृत एवं बीजामृत, ये ‘सुभाष पाळेकर प्राकृतिक कृषि तंत्र’ के मूल तत्त्व हैं । इस लेख में ‘आच्छादन का अर्थ क्या है ?’, इसके साथ ही उसका महत्त्व एवं लाभ समझ लेंगे ।

वाफसा : पेडों को पानी देने की आवश्यक स्थिति !

‘भूमि में मिट्टी के २ कणों के मध्य की रिक्ति में पानी का अस्तित्व न होकर ५० प्रतिशत भाप और ५० प्रतिशत हवा का मिश्रण होना ‘वाफसा’ है ।

विश्वयुद्ध, भूकंप आदि आपदाओं का प्रत्यक्ष सामना कैसे करें ? (भाग ५)

इस लेख में सुनामी की जानकारी दी गई है । सुनामी क्या है ? सुनामी आने से पूर्व की जानेवाली तैयारी, सुनामी आने के संकेत, प्रत्यक्ष सुनामी के समय किन बातों पर ध्यान दें और सुनामी समाप्त होने के पश्चात क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी गई है ।

शरीर में गर्मी बढने पर उसके लिए शारीरिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर करने योग्य विविध उपचार !

तुलसी के पत्ते गरम व बीज ठंडा होता है । गर्मी न्यून करने हेतु १ चम्मच तुलसी के बीज आधा कटोरा पानी में भिगोएं और सवेरे उसमें १ कटोरा गुनगुना दूध मिलाकर खाली पेट सेवन करें । ऐसा ७ दिन करें ।

आपातकाल और सनातन धर्म की पुनर्स्थापना के विषय में विविध संतों और भविष्यवक्ताओं द्वारा की गई भविष्यवाणी

अब कलियुगांतर्गत कलियुग समाप्त होने जा रहा है और सत्ययुग आनेवाला है । अधर्म की परिसीमा लांघनेवाले मनुष्य ने स्वयं ही स्वयं के विनाश का मार्ग रेखांकित कर रखा है । अधर्म का नाश होने हेतु कोई न कोई महाभारत घटित होता ही है ।