सनातन पर संभावित बंदी के विरोध में शेकाप के नेता एवं भूतपूर्व विधायक श्री. विवेक पाटील को निवेदन !
सनातन के साधक कानूनबाह्य कुछ नहीं कर सकते, इसका मुझे पूरा विश्वास है ! – विधेयक विवेक पाटील
सनातन के साधक कानूनबाह्य कुछ नहीं कर सकते, इसका मुझे पूरा विश्वास है ! – विधेयक विवेक पाटील
आध्यात्मिक क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देनेवाली सनातन संस्था का गौरव करना छोडकर, राजनीतिक स्वार्थ के लिए सनातन को लक्ष्य बनाया जा रहा है । सनातन संस्था आध्यात्मिक क्षेत्र में दीपस्तंभ के समान मार्गदर्शक है, इस प्रकार उसका गला घोंटा जाना हिन्दू समाज कदापि सहन नहीं करेगा ।
सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति, श्री शिवप्रतिष्ठान, हिन्दुस्थान, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल आदि संगठनों के माध्यम से धर्मप्रसार करनेवालों को फंसाने के लिए हिन्दू धर्मविध्वंसक आधुनिकतावादी आैर धर्म की अपकीर्ति करनेवाले लोग कुप्रचार कर दबाव बना रहे हैं ।…
सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने के षड्यंत्र का विरोध करने के लिए तथा इस प्रकार का प्रस्ताव खारिज करने की मांग करते हुए भाजपा के सांसद अनिल शिरोळे को निवेदन दिया गया ।
सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर हिन्दुत्व का गला घोंटने का यह षड्यंत्र हम सफल नहीं होने देंगे, एेसी चेतावनी सनातन संस्था के समर्थन में मार्ग पर उतरे हिन्दुत्वनिष्ठों ने दी ।
शिराळा मतदारसंघ के भाजपा विधायक श्री. शिवाजीराव नाईक ने मत व्यक्त करते हुए कहा कि कहीं कुछ भी घटने पर उसका संबंध सीधे सनातन से जोडना अयोग्य है । सनातन संस्था का कार्य अच्छा है ।
श्री. राजहंस पुढे म्हणाले, धर्मनिरपेक्ष हा ख्रिस्ती विचार आहे. भारतात तो अनावश्यक आहे. वर्ष १९७६ मध्ये आणीबाणीच्या वेळी विरोधी पक्षांच्या नेत्यांना कारागृहात डांबून काँग्रेसने ४२ वी घटनादुरुस्ती करून राज्यघटनेच्या प्रास्ताविकामध्ये धर्मनिरपेक्ष शब्द घातला होता.
महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल ने पिछले कुछ दिनों में कुछ हिन्दुत्वनिष्ठों को बंदी बनाया । ये सभी सनातन के साधक हैं, ऐसा दुष्प्रचार कुछ आधुनिकतावादी व्यक्ति, संगठन, तथा कांग्रेस आदि दलों के राजनेता जानबूझकर कर रहे हैं । इस संदर्भ में समय-समय पर सनातन संस्था ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है; वह हम आज फिर स्पष्ट कर रहे है …
समाज के संत, वारकरी संप्रदाय, सनातन के पाठक, हितचिंतक विज्ञापनदाता, जिज्ञासु, धर्मप्रेमी तथा हिन्दुत्वनिष्ठ सनातन के साथ दृढता के साथ खडे हैं ।
अक्षरनामा’ नामक संकेतस्थलपर पत्रकार निखिल वागळे ने ‘यह खूनी झुंड आती कहां से है ?’, इस शीर्षक के तले एक लेख लिखा है । उसके साथ ही ‘मैक्स महाराष्ट्र’ नामक ‘फेसबुक’ खातेपर ‘किसने बनाई यह हिंसक भीड ?’ नामक शीर्षक के नीचे एक चलचित्र (वीडियो) प्रसारित किया है ।
