ईश्वरनिष्ठ, राष्ट्रप्रेमी तथा धर्मप्रेमी सनातन संस्था को सभी हिन्दुत्वनिष्ठों का जोरदार समर्थन !
समाज के संत, वारकरी संप्रदाय, सनातन के पाठक, हितचिंतक विज्ञापनदाता, जिज्ञासु, धर्मप्रेमी तथा हिन्दुत्वनिष्ठ सनातन के साथ दृढता के साथ खडे हैं ।
समाज के संत, वारकरी संप्रदाय, सनातन के पाठक, हितचिंतक विज्ञापनदाता, जिज्ञासु, धर्मप्रेमी तथा हिन्दुत्वनिष्ठ सनातन के साथ दृढता के साथ खडे हैं ।
अक्षरनामा’ नामक संकेतस्थलपर पत्रकार निखिल वागळे ने ‘यह खूनी झुंड आती कहां से है ?’, इस शीर्षक के तले एक लेख लिखा है । उसके साथ ही ‘मैक्स महाराष्ट्र’ नामक ‘फेसबुक’ खातेपर ‘किसने बनाई यह हिंसक भीड ?’ नामक शीर्षक के नीचे एक चलचित्र (वीडियो) प्रसारित किया है ।
कांग्रेस के उतावले नेता निरंतर मांग कर रहे हैं, सनातन पर प्रतिबंध लगाओ और सनातन के प्रमुख को गिरफ्तार करो ! कांग्रेस के नेता अपनी चमडी बचाने के लिए सनातन को लक्ष्य करने के लिए यह मांग कर रहे हैं ।
महाराष्ट्र राज्य में कहीं भी किसी आधुनिकतावादी की हत्या हो जाए अथवा अन्य कोई हिन्दुत्ववादी किसी प्रकरण में पकडा (फंसाया) जाए, तत्काल किसी भी जांच की औपचारिकता पूरी किए बिना, हर प्रकरण में सीधे सनातन संस्था का नाम लिया जाता है ।…
मालेगांव बम-विस्फोट प्रकरण में यदि हिन्दुत्वनिष्ठों के घर में एटीएस के अधिकारी आरडीएक्स रख सकते हैं, तो यही श्री. वैभव राऊत के साथ नहीं हुआ, ऐसे कोर्इ कह नहीं सकता । अभी तक उनके खिलाफ कोई भी सबूत नहीं मिला है, इसलिए अभी से उन्हें दोषी मानना अनुचित होगा ।…
भारत में अयोध्या में राममंदिर का निर्माणकार्य अभीतक नहीं हुआ है; किंतु थायलंड के अयोध्या में अर्थात् ‘अयुध्या’ (१५ वे शतक तक यह नाम था । अब उसे ‘बैंकोक’ कहा जाता है ।) में राममंदिर का निर्माणकार्य आरंभ हुआ है । यहां भव्य राममंदिर हो रहा है ।
श्री. वैभव राऊत एक साहसी गोरक्षक हैं और वे गोरक्षा करनेवाले संगठन हिन्दू गोवंश रक्षा समिति के माध्यम से सक्रिय थे ।
कुछ नररत्न जैसे परमेश्वर का अवतारकार्य पूरा करने के लिए ही पृथ्वीपर जन्म लेते हैं ! सहस्रों वर्षों के कालपटलपर अपनी मुद्रा अंकित करनेवाले अवतारी सत्पुरुष परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी उन्हीं में से एक हैं !
वाराणसी के साधक वेदप्रकाश गुप्ता ने प्राप्त किया ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर | उस समय सनातन के संत पू. नीलेश सिंगबाळ के हाथों श्री. गुप्ता का श्रीकृष्ण की प्रतिमा देकर आदर किया गया ।
आषाढ पूर्णिमा को (२७.७.२०१८) चंद्रग्रहण है । यह ग्रहण भारत में सर्वत्र ‘खग्रास’ दिखाई देनेवाला है । ग्रहण २७.७.२०१८ की रात्रि ११.५४ से ३.४९ तक है । ग्रहणकाल में की गई साधना का फल सहस्रों गुना अधिक प्रमाण में मिलता है ।