यमदीपदान करते समय १३ दीपक क्यों अर्पण करते हैं ?

दीपकों की संख्या १३ मानकर, पूजा की जाती है । इस दिन यमदेवता द्वारा प्रक्षेपित लहरें ठीक १३ पल नरक में निवास करती हैं । इसका प्रतीक मानकर यमदेवता को आवाहन करते हुए १३ दीपकों की पूजा कर, उन्हें यमदेवता को अर्पण किया जाता है ।

आकाशदीप

आकाशदीप का मूल आकार कलशसमान होता है । यह मुख्यतः चिकनी मिट्टी का बना होता है । इसके मध्य पर तथा ऊपरी भाग पर गोलाकार रेखा में एक-दो इंच के अंतर पर अनेक गोलाकार छेद होते हैं ।

आकाशदीप लगाने का अध्यात्मशास्त्र (सूक्ष्म विज्ञान)

दीपावली के दिनों में ब्रह्मांड में संचार करनेवाले अनिष्ट तत्त्वों का निर्मूलन करने के लिए श्रीलक्ष्मी-तत्त्व सक्रिय होता है । इसे प्राप्त करने के लिए, घर के बाहर ऊंचे स्थान पर आकाशदीप लगाया जाता है ।

श्री लक्ष्मी पूजाविधि

आश्विन अमावस्या, अर्थात लक्ष्मीपूजन के दिन सर्व मंदिरों, दुकानों तथा घरों में श्रीलक्ष्मीपूजा की जाती है । यहां, इस पूजा की सरल भाषा में शास्त्रीय जानकारी दी है ।

दीपावलीका पूर्वायोजन

दीपावली शब्दका अर्थ है, दीपोंकी पंक्ति । अपने घरमें सदैव लक्ष्मीका वास रहे, ज्ञानका प्रकाश रहे, इसलिए हरकोई बडे आनंदसे दीपोत्सव मनाता है । घर शुद्ध एवं सुशोभित कर दीपावली मनानेसे श्री लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं तथा वहां स्थायीरूपसे निवास करती हैं ।

‘दीपावली’

वसुबारस अर्थात् गोवत्स द्वादशी दीपावलीके आरंभमें आती है । यह गोमाताका सवत्स अर्थात् उसके बछडेके साथ पूजन करनेका दिन है । शक संवत अनुसार आश्विन कृष्ण द्वादशी तथा विक्रम संवत अनुसार कार्तिक कृष्ण द्वादशी गोवत्स द्वादशीके नामसे जानी जाती है । यह दिन एक व्रतके रूपमें मनाया जाता है ।

गोवत्सद्वादशीका महत्त्व

वसुबारस अर्थात गोवत्स द्वादशी दीपावलीके आरंभमें आती है । हिंदू कृतज्ञतापूर्वक गौको माता कहते हैं । जहां गोमाताका, भक्तिभावसे पूजन किया जाता है, वहां व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्रका उत्कर्ष हुए बिना नहीं रहता।

यमतर्पण

श्री यमराज धर्मके श्रेष्ठ ज्ञाता एवं मृत्युके देवता हैं । असामयिक मृत्युके निवारण हेतु यमतर्पणकी विधि बताई गई है । नरक चतुर्दशी के दिन यह विधि अभ्यंगस्नान के उपरांत की जाती है ।

धनत्रयोदशी

‘धनत्रयोदशी’ दिनके विशेष महत्त्वका कारण यह दिन देवताओंके वैद्य धन्वंतरिकी जयंतीका दिन है । धनत्रयोदशी मृत्युके देवता यमदेवसे संबंधित व्रत है । यह व्रत दिनभर रखते हैं । व्रत रखना संभव न हो, तो सायंकालके समय यमदेवके लिए दीपदान अवश्य करते हैं ।