सोमनाथ शिवलिंग के दिव्यांशों के दर्शन हेतु भी मुख्यमंत्री ने दिया सहयोग का आश्वासन !

रायपुर (छत्तीसगढ) : छत्तीसगढ के विभिन्न तीर्थस्थलों, पवित्र नदियों और पौराणिक स्थलों की आध्यात्मिक मूल्य वाली वस्तुओं और वास्तुओं को भावी पीढियों के लिए संरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार सनातन संस्था को हर संभव सहायता प्रदान करेगी । यह महत्वपूर्ण आश्वासन छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दिया ।
गोवा के प्रतिष्ठित संगठन ‘सनातन संस्था’ की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्री सत्शक्ति श्रीमती बिंदा सिंगबाळ जी एवं श्री चित्शक्ति श्रीमती अंजली गाडगीळ जी ने सौजन्य भेंट की ।
इस अवसर पर घर वापसी अभियान के प्रमुख एवं छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी… pic.twitter.com/jw7QABdYkk
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) July 22, 2026
सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ और श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने हाल ही में छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री श्री. विष्णुदेव साय से भेंट की । इस भेंट के दौरान सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई, जिस पर मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया ।
Shrisatshakti (Mrs.) Binda Nilesh Singbal ji and Shrichitshakti (Mrs.) Anjali Mukul Gadgil ji of the Sanatan Sanstha called upon the Hon’ble Chief Minister of Chhattisgarh, Shri. Vishnu Deo Sai ji (@vishnudsai) and apprised him of the Sanstha’s activities. They presented him with… pic.twitter.com/4OIdrnsnmd
— Sanatan Sanstha (@SanatanSanstha) July 22, 2026

सोमनाथ शिवलिंग के दिव्यांशों के दर्शन करेंगे श्रद्धालु

एक सहस्र वर्ष पूर्व महमूद गजनवी ने ऐतिहासिक सोरटी सोमनाथ शिवलिंग का विध्वंस किया था; परंतु सौभाग्य से उस शिवलिंग के दिव्यांश आज भी सुरक्षित हैं । विशेष चुंबकीय तत्व से युक्त इस सोमनाथ शिवलिंग के दिव्यांशों के दर्शन छत्तीसगढ के श्रद्धालुओं को भी प्राप्त हो सकें, इसके लिए केंद्र सरकार के ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ अभियान के अंतर्गत राज्य में विशेष आयोजन करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री श्री. विष्णुदेव साय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासकीय सहयोग का आश्वासन दिया ।

मुख्यमंत्री ने की सनातन के कार्य की सराहना
इस विशेष भेंट के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने सनातन संस्था द्वारा राष्ट्र और धर्म के हित में देश भर में चलाए जा रहे कार्यों तथा गोवा स्थित सनातन आश्रम में चल रहे आध्यात्मिक अनुसंधान के विभिन्न उपक्रमों की अत्यंत रुचि के साथ जानकारी ली । इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री. प्रबल प्रताप जूदेव, हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के अधिवक्ता आशीष शर्मा, हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट तथा समिति के छत्तीसगढ से सर्वश्री कमल विश्वास, आशीष परेडा, रोहित सिंह तिरंगा, हेमंत कानसकर और नीरज क्षीरसागर उपस्थित थे ।
छत्तीसगढ के धर्मकार्य को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करनेवाला सद्गुरुद्वयी का दौरा ।

१. श्री. कमल बिश्वास को संतों के इस दौरे की स्वप्न में मिली पूर्वसूचना ।
छत्तीसगढ में सनातन संस्था के कार्य से नए सिरे से जुडे एक धर्मप्रेमी श्री. कमल बिस्वास को इस दैवी दौरे से ८ दिन पूर्व ही स्वप्न में एक दृश्य दिखाई दिया । उन्हें स्वप्न में श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबालजी ‘छत्तीसगढ में धर्मकार्य कैसे बढाना चाहिए तथा साधना कैसी करनी चाहिए’, इस विषय में सभी साधकों एवं धर्मप्रेमियों का मार्गदर्शन करती हुईं दिखाई दीं । उन्होंने जब इस स्वप्न के विषय में सूचित किया, उस समय यह दौरा वास्तव में सुनिश्चित नहीं हुआ था, परंतु उसके २ दिन उपरांत ही प.पू. डॉ. युधिष्ठिरलाल महाराज के निमंत्रण पर यह दौरा सुनिश्चित हुआ । इससे ईश्वर का सूक्ष्म नियोजन कैसे होता है तथा साधकों एवं धर्मप्रेमियों की कैसे पहले ही इसकी पूर्वसूचना मिलती है, यह बात सभी के ध्यान में आई ।
सैकडों किलोमीटर दूर संतों को सूक्ष्म से ज्ञान मिलकर उनके शिष्य अधिवक्ता आशिष शर्मा को सद्गुरुद्वयी के सान्निध्य में रहने के लिए कहा जाना !
भिलाई के अधिवक्ता आशिष शर्मा इस दौरे में सद्गुरुद्वयी के साथ थे । उनके गुरु हिंगणघाट (जिला वर्धा, महाराष्ट्र) के हैं तथा उन्होंने अधिवक्ता आशिष शर्मा को दूरभाष कर सूचित किया, ‘‘अब आपके सहित जो दो महान विभूतियां हैं, वे साक्षात् श्री सरस्वतीमाता एवं श्री महालक्ष्मीमाता हैं । आप उनसे कृपाशीर्वाद प्राप्त करें तथा आप अधिक से अधिक उनके सान्निध्य में रहें ।’’ ‘सैकडों किलोमीटर दूर संतों को सूक्ष्म से यह ज्ञान मिलना तथा उनके द्वारा उनके शिष्य को (अधिवक्ता आशिष शर्मा को) यह बताया जाना दैवी योजना का ही अंश होने की बात ध्यान में आई ।
दूसरे दिन अधिवक्ता आशिष शर्मा को उनके गुरुदेवजी ने दूरभाष कर पुनः बताया, ‘‘हिमालय के एक महान सद्गुरु हैं तथा ये दोनों माताजी उनकी शिष्याएं हैं, ऐसा मुझे दिखाई दे रहा है । ये दोनों माताजी देवियों के ही रूप हैं तथा उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा बहुत बडे स्तर पर कार्यरत है ।’’
२. संतों के चैतन्य से प्रभावित प्रतिष्ठित उद्यमी अधिवक्ता आशिष शर्मा ने सकारात्मक रहकर अनेक उद्यमियों को सद्गुरुद्वयी के दर्शन हेतु निमंत्रित किया ।
सद्गुरुद्वयी के सान्निध्य में आने पर सभी उद्यमियों ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यहां आकर हमारा भाग्य खिल गया । इससे आगे हम इस ईश्वरी कार्य के साथ निरंतर जुडे रहेंगे ।’’
‘बिजनेस नेटवर्क इंटरनैशनल’, इस उद्यमियों के संगठन के उपाध्यक्ष तथा उनके सहयोगी पहली बार ही सद्गुरुद्वयी के दर्शन के लिए आए थे । सद्गुरुद्वयी का अस्तित्व तथा उनके सहजता से बातें करने से वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अत्यंत विनम्रतापूर्वक चरणों पर मस्तक रखकर दर्शन किए । ‘ऐसे संतों के आशीर्वाद मिलना हमारा सौभाग्य है । इसके आगे संस्था के धर्मकार्य में हमारा सदैव ही सहयोग रहेगा ।’, ऐसा उन्होंने कहा । इसके साथ ही गोवा में होनेवाली आगामी उद्यमी परिषद में आयोजित शिविर के समय आश्रम से भेंट करने की उन्होंने इच्छा व्यक्त की ।
३. साधना के संदर्भ में मार्गदर्शन लेने आए छत्तीसगढ के उच्चपदस्थ अधिकारी ।
छत्तीसगढ राज्य के एक उच्चपदस्थ अधिकारी स्वयं अत्यंत सादगीपूर्ण एवं आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हैं । वे सवेरे ही सद्गुरुद्वयी से मिलने आए थे । उन्होंने ‘साधना कैसे करनी चाहिए एवं स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया कैसे अपनाएं’, इसे आत्मियता के साथ समझ लिया । उसके पश्चात उन्होंने सद्गुरुद्वयी के मार्गदर्शन के अनुसार नियमित रूप से साधना करने का निश्चय किया ।
४. बिना किसी योजना के छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री की अत्यंत भावपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में भेंट हुई ।
छत्तीसगढ के ‘अखिल भारतीय घरवापसी अभियान’के प्रमुख तथा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव के तत्त्वावधान में राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री. विष्णुदेव साय से सद्गुरुद्वयी से मिले । इस भेंट में मुख्यमंत्री ने लगभग १ घंटा समय देकर सद्गुरुद्वयी से विभिन्न विषयों पर चर्चा की । छत्तीसगढ की सांस्कृतिक धरोहर, वहां के प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परंपरा, इन विषयों पर विचारमंथन हुआ । ‘सनातन संस्था जिसप्रकार से आध्यात्मिक शोधकार्य कर रही है तथा दौरे कर वस्तुओं का जतन कर उनका आध्यात्मिक महत्त्व आनेवाली पीढी को ज्ञात हो, इस पर शोधकार्य कर रही है । इसविषय में छत्तीसगढ सरकार की ओर से संपूर्ण सहयोग मिलेगा’, ऐसा आश्वासन मुख्यमंत्री ने दिया । इस भेंट के उपरांत श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव के साथ बात करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा, ‘‘इस भेंट से मुझे बहुत बडे स्तर पर सकारात्मक ऊर्जा मिली तथा यह भेंट बहुत अच्छी रही ।’’
मा. मुख्यमंत्री ने दोनों सद्गुरुद्वीय के संतत्व को पहचान कर उत्स्फूर्तता से छत्तीसगढ की पारंपरिक शॉल एवं सम्मानचिन्ह प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया ।
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रायपुर, छत्तीसगढ़ मे @SanatanSanstha के संस्थापक पूजनीय सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी परमपूज्य श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाल एवं परमपूज्य श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजलि मुकुल गाडगिल के रायपुर आगमन पर उनका स्वागत एवं… pic.twitter.com/TxeACSmGap
— Prabal Pratap Singh Judev (@prabaljudevBJP) July 22, 2026
५. श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव को सद्गुरुद्वयी के संबंध में प्राप्त अनुभूति
मुख्यमंत्री की भेंट के उपरांत श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव ने दूरभाष पर बताया, ‘‘मुख्यमंत्री की भेंट से पूर्व मैं बहुत थका हुआ था; परंतु इस भेंट के उपरांत हमें सद्गुरुद्वयी के माध्यम से प्रचंड स्तर पर आध्यात्मिक ऊर्जा मिली । उन्होंने इस दौरे की अवधि में ऐसे संतों का सान्निध्य प्राप्त होना हमारा परमसौभाग्य है ।’’
६. घरवापसी के महाअनुष्ठान हेतु सद्गुरुद्वयी को भावपूर्ण निमंत्रण ।
श्री. प्रबल प्रतापसिंह जुदेव ने छत्तीसगढ में सहस्रों हिन्दुओं की ‘घरवापसी’ (अन्य धर्म से हिन्दू धर्म में वापस लेना) की है । बस्तर एवं दंतेवाडा, इन स्थानों पर २ माह उपरांत घरवापसी के एक बडे कार्यक्रम का आयोजन किया गया है । उस कार्यक्रम के लिए उन्होंने सद्गुरुद्वयी को अत्यंत आदरपूर्वक आमंत्रित किया । ‘सद्गुरुद्वयी की पावन उपस्थिति में यह धर्मकार्य हो’, यह उनका भाव था ।
७. धर्मप्रेमियों एवं साधकों द्वारा अनुभव किया गया उच्च कोटि का भावसमारोह ।

छत्तीसगढ राज्य में पहली बार ही सनातन संस्था की सद्गुरुद्वयी एक ऐसा पहला दौरा आयोजित हुआ था । उसमें साधकों एवं धर्मप्रेमियों के लिए मार्गदर्शन का आयोजन किया गया था । यह मार्गदर्शन एक उच्च कोटि का ‘भावसमारोह’ ही सिद्ध हुआ । प्रत्येक धर्मप्रेमी अपनी मनोभावना व्यक्त करते समय श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी को ‘गुरुमाता’, इस भावपूर्ण शब्द से संबोधित कर रहा था । इस शब्द का उच्चारण करते ही सभी की भावजागृति हो रही थी । ‘हमें साक्षात् सद्गुरुमाता का एवं देवी का प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त हो रहा है तथा हम देवी के सामने ही आत्मनिवेदन कर रहे हैं’, इस भाव से सभी लोग खुलेमन से साधना, उसमें आनेवाली समस्याएं तथा अन्य प्रश्न पूछ रहे थे । इस कार्यंक्रम के २ दिन उपरांत तक सभी साधक एवं धर्मप्रेमी एक अलग ही भावावस्था में थे । ‘गुरुपूर्णिमा के पूर्व ही गुरुदेवजी ने हमें यह कृपा प्रसाद की बडी ऊर्जा प्रदान की’, इन शब्दों में सभी ने कृतज्ञता व्यक्त की ।
८. ‘छत्तीसगढ में धर्मकार्य के विस्तार का ईश्वरीय काल निकट आया है’, ऐसा श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी द्वारा बताया जाना ।
साधकों एवं धर्मप्रेमियों को मार्गदर्शन करते हुए श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने कहा, ‘‘यह दौरा संपूर्णतः ईश्वरीय नियोजन के अनुसार संपन्न हुआ है । छत्तीसगढ में बने नए साधक एवं धर्मप्रेमी तथा यहां का बढा हुआ हिन्दूसंगठन का कार्य देखते हुए ऐसा ध्यान में आता है कि यहां का धर्मकार्य व्यापक स्तर पर वृद्धिंगत होने के लिए ही ईश्वर ने यह समय सुनिश्चित किया है ।’’ उनके इस आशीर्वाद से छत्तीसगढ में एकप्रकार से धर्मकार्य का संकल्प ही लिया गया, ऐसा प्रतीत हुआ ।
‘यह संपूर्ण दौरा तो छत्तीसगढ की भूमि पर ईश्वर के चैतन्य की हुई महावर्षा ही थी’, इसके लिए हम सभी साधक एवं धर्मप्रेमी सद्गुरुद्वयी के चरणों में अनंत कोटि कृतज्ञता व्यक्त कर रहे हैं !
– श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति (२४.७.२०२६)
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