अनुक्रमणिका
- १. अंदरूनी चोट / घाव (Bruise/Injury)
- १ अ. आर्निका मोन्टाना (Arnica Montana)
- १ आ. बेलिस पैरेन्निस (Bellis Perennis)
- १ इ. कैलंडुला ऑफिसिनैलिस (Calendula Officinalis)
- १ ई. एकिनेशिया एंगस्टिफोलिया (Echinacea Angustifolia)
- १ उ. नेट्रम् सल्फ्युरिकम् (Natrum Sulphuricum)
- १ ऊ. हायपेरिकम् पर्फाेरेटम् (Hypericum Perforatum)
- १ ओ. रूटा ग्रेविओलेन्स (Ruta Graveolens)
- १ औ. लेडम् पालुस्त्रे (Ledum Palustre)
- १ अं. स्टाफीसाग्रिया (Staphysagria)
- १ अं. सिंफायटम् ऑफिसिनैलिस (Symphytum Officinalis)
- १ क. पायरोजेनियम (Pyrogenium)
- २. मोच (Sprain)

वर्तमान के भागदौड के जीवन में किसी को भी और कभी भी संसर्गजन्य बीमारियों अथवा अन्य किसी भी विकारों का सामना करना पड सकता है । ऐसे समय पर यथाशीघ्र वैद्यकीय विशेषज्ञ से परामर्श उपलब्ध हो ही सकेगा, ऐसा कह नहीं सकते । सर्दी, खांसी, बुखार, उलटियां, जुलाब, बद्धकोष्ठता, आम्लपित्त जैसी विविध बीमारियों पर घर के घर में ही उपचार किया जा सके, इस दृष्टि से होमियोपैथी चिकित्सापद्धति सर्वसामान्य लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है । यह उपचारपद्धति घर के घर ही में कैसे उपयोग में लाएं ? होमियोपैथी की औषधियां किसप्रकार तैयार करें ? उसका संग्रह कैसे करें ? इसप्रकार की अनेक बातें इस लेखमाला द्वारा दे रहे हैं ।
पाठकों से विनती है कि किसी बीमारी पर स्वउपचार आरंभ करने से पूर्व ‘होमियोपैथी स्वउपचार संबंधी मार्गदर्शक सूत्र एवं प्रत्यक्ष औषधि का चयन कैसे करें ?’, इस संदर्भ की जानकारी पाठक पहले समझ लें और उस अनुसार प्रत्यक्ष औषधि का चयन करें !
संकलक : होमियोपैथी डॉ. प्रवीण मेहता, डॉ. अजित भरमगुडे एवं डॉ. (श्रीमती) संगीता भरमगुडे

१. अंदरूनी चोट / घाव (Bruise/Injury)
गिरना, टकराना, दुर्घटना के कारण शरीर को अंदरूनी चोट लग सकती है । बाह्य घटकों के कारण जानबूझकर अथवा अनजाने में शरीर के जीवित भाग को हुई हानि को ‘दुर्घटना’, कहते हैं । दुर्घटना की व्याप्ति के अनुसार विश्राम लेना, दुर्घटनाग्रस्त भाग पर ३-४ बार, हर बार १० मिनट तक बर्फ लगाना इत्यादि उपचार करें । यदि घाव हो, तो उसे स्वच्छ करें; घाव गहरा और बडा हो, तो उस पर मलहम-पट्टी करें । घाव मेें दुर्गंध तो नहीं आ रही न, उसमें मवाद तो नहीं हो रहा है ना, इस ओर ध्यान दें । घाव बडा हो तो टांकें लगाने पड सकते हैं, इसलिए रोगी को अस्पताल ले जाएं ।
१ अ. आर्निका मोन्टाना (Arnica Montana)
सर्व प्रकार की चोट (injury), अंदरूनी चोट (bruise), दुर्घटना में स्नायुयों को चोट लगना (post traumatic soft tissue injury)
आधे कप पानी में इस औषधि के मूल अर्क की (mother tincture की) ४ से ५ बूंदें और उस मिश्रण में भिगाेई हुई मुलायम पट्टी उस मुक्का मारवाले स्थान पर रखें, इसके साथ ही ३० पोटेन्सी की औषधि का सेवन करें । इससे सूजन कम होने में तुरंत सहायता होती है ।
१ आ. बेलिस पैरेन्निस (Bellis Perennis)
चोट अधिक गहरी होना
१ इ. कैलंडुला ऑफिसिनैलिस (Calendula Officinalis)
घाव (जखम) (wound) होना
१ ई. एकिनेशिया एंगस्टिफोलिया (Echinacea Angustifolia)
व्रण (ulcer), घाव से दुर्गंध आना
१ उ. नेट्रम् सल्फ्युरिकम् (Natrum Sulphuricum)
सिर पर चोट लगना
१ ऊ. हायपेरिकम् पर्फाेरेटम् (Hypericum Perforatum)
नसें (nerves), उंगलियों के सिरे, रीढ का निचला सिरा (tail bone/coccyx), रीढ की हड्डी (spine) को चोट लगना
१ ओ. रूटा ग्रेविओलेन्स (Ruta Graveolens)
घूंसा अथवा बिना धार के (ब्लंट) शस्त्र से लगी चोट, त्वचा काली-नीली पडना
१ औ. लेडम् पालुस्त्रे (Ledum Palustre)
चूहा, बिल्ली, कुत्ते के काटने के कारण, कील अथवा अन्य धारदार शस्त्र के कारण होनेवाले घाव
१ अं. स्टाफीसाग्रिया (Staphysagria)
धारदार शस्त्र के कारण, शस्त्रकर्म करने के कारण होनेवाले घाव
१ अं. सिंफायटम् ऑफिसिनैलिस (Symphytum Officinalis)
हड्डीयां, आंख, अस्थिबंधन (Ligaments), स्नायूबंधन (Tendons), कोहनी (tennis elbow) पर चोट लगना
१ क. पायरोजेनियम (Pyrogenium)
घाव दूषित होकर उसमें मवाद होना

२. मोच (Sprain)
जोडों के आसपास के अस्थिबंधन को (ligament को) लगी चोट को मोच कहते हैं । मोच आए भाग में वेदना होती है और सूजन आती है । ऐसी परिस्थिति में उस भाग पर भार नहीं डालना है । जिन कृतियों से अथवा गतिविधियों से उस भाग में वेदना होती हो, वे सब टालें । मोच आए हुए भाग को पूर्ण विश्राम दें । उस भाग को बर्फ से सेंकने से वहां की सूजन शीघ्र उतर जाती है और वेदना भी कुछ मात्रा में कम हो जाती है । इलास्टिक पट्टी से (elastic bandage से) मोच आए हुए भाग को कसकर बांधे रखना भी लाभदायक होता है । मोच आने के उपरोल्लेखित लक्षणों के अतिरिक्त अन्य कोई भी विशेष लक्षण हों, तो नीचे दी गई औषधियां लें ।

२ अ. आर्निका मोन्टाना (Arnica Montana)
मोच के कारण संबंधित भाग काला-नीला पडने से असहनीय वेदना होने लगे तो प्रथम यह औषधि लें ।
२ आ. र्हस टॉक्सिकोडेंड्रॉन (Rhus Toxicodendron)
२ आ १. वजनदार वस्तु उठाने से खिंचाव/लचक आ जाने से सदा के लिए पीठदर्द, कमर दर्द हो जाना
२ आ २. बस में अनेक घंटे हाथ से आधार पकडकर खडे रहने से कलाई में वेदना होना, मुक्केबाज (boxers) की कलाईयों में चोट आना, भागते समय टखनों में मोच आना, मजदूरों के पीठ के स्नायुओं को चोट आना
२ इ. बेलिस पैरेनिस (Bellis Perennis)
मोटर की अथवा रेलगाडी के अपघात में रीढ की हड्डी को चोट, अंदर के स्नायुयों को चोट (injury to deeper tissues), स्नायू बहुत कडक होना (marked stiffness)
| स्वउपचार करने की दृष्टि से साधक, पाठक, राष्ट्र-धर्मप्रेमी, शुभचिंतक एवं अर्पणदाता यह लेख आपात्काल की दृष्टि से संग्रहित रखें । |
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