माहवारी से संबंधित शिकायतों पर (Ailments related to menses) होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

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वर्तमान के भागदौड के जीवन में किसी को भी और कभी भी संसर्गजन्य बीमारियों अथवा अन्य किसी भी विकारों का सामना करना पड सकता है । ऐसे समय पर यथाशीघ्र वैद्यकीय विशेषज्ञ से परामर्श उपलब्ध हो ही सकेगा, ऐसा कह नहीं सकते । सर्दी, खांसी, बुखार, उलटियां, जुलाब, बद्धकोष्ठता, आम्लपित्त जैसी विविध बीमारियों पर घर के घर में ही उपचार किया जा सके, इस दृष्टि से होमियोपैथी चिकित्सापद्धति सर्वसामान्य लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है । यह उपचारपद्धति घर के घर ही में कैसे उपयोग में लाएं ? होमियोपैथी की औषधियां किसप्रकार तैयार करें ? उसका संग्रह कैसे करें ? इसप्रकार की अनेक बातें इस लेखमाला द्वारा दे रहे हैं ।

पाठकों से विनती है कि किसी बीमारी पर स्वउपचार आरंभ करने से पूर्व ‘होमियोपैथी स्वउपचार संबंधी मार्गदर्शक सूत्र एवं प्रत्यक्ष औषधि का चयन कैसे करें ?’, इस संदर्भ की जानकारी पाठक पहले समझ लें और उस अनुसार प्रत्यक्ष औषधि का चयन करें !

संकलक : होमियोपैथी डॉ. प्रवीण मेहता, डॉ. अजित भरमगुडे एवं डॉ. (श्रीमती) संगीता भरमगुडे

मासिक धर्म से संबंधित विविध प्रकार की शिकायतों का स्त्रियों को सामना करना पडता है । इसमें से कुछ प्रमुख शिकायतों के उपचारों के संदर्भ में जानकारी आगे दी गई है । कौन से विशेष लक्षण होने पर कौन-सी औषधि लें, वह औषधि के नाम के आगे दिया है ।

होमियौपैथी वैद्य (डॉ.) प्रवीण मेहता

१. माहवारी के पहले की शिकायतें

१ अ. फॉस्फोरम् एसिडम् (Phosphorum Acidum)

१ अ १. पेटदर्द, सफेद पानी जाना (ल्यूकोरिया) और मन की स्थिति खराब होना

१ अ २. मसूडों और गालों में सूजन आना

१ अ ३. शरीर के घावों से (ulcers से) रक्तस्राव होना

१ आ. कल्केरिया कार्बाेनिकम् (Calcarea Carbonicum)

१ आ १. चक्कर आना

१ आ २. जीभ को खट्टा स्वाद आना

१ आ ३. थूक से थोडा रक्त गिरना

१ इ. नेट्रम् म्युरियाटिकम् (Natrum Muriaticum)

१ इ १. स्तनों में वेदना होना

१ इ २. रक्तस्राव शीघ्र और भारी मात्रा में होना

१ ई. कोनियम मैक्युलेटम् (Conium Maculatum)

स्तनों में वेदना होना और रक्तस्राव अत्यंत अल्प मात्रा में होना

१ उ. ग्रेफायटिस (Graphites)

योनीमार्ग में खाज

१ ऊ. वेराट्रम् आल्बम् (Veratrum Album)

माहवारी आरंभ होने से पहले मितली अथवा जुलाब होना

१ ए. क्रियोसोटम् (Kreosotum)

माहवारी आरंभ होने के कुछ दिन पहले अस्वस्थ और चिडचिड होना

१ ऐ. मैग्नेशियम म्युरियाटिकम् (Magnesium Muriaticum)

माहवारी आरंभ होने के एक दिन पहले बहुत चिडचिड होना

१ ओ. सेपिया ऑफिसिनैलिस (Sepia Officinalis)

माहवारी आरंभ होने के पहले निराशा आना

१ औ. लायकोपोडियम क्लैवेटम् (Lycopodium Clavatum)

माहवारी आरंभ होने के पहले खिन्नता आने से प्रत्येक बात का विरोध करना

१ अं. कॉस्टिकम् (Causticum)

माहवारी आरंभ होने से पहले प्रत्येक बात का नकारात्मक पहलू देखना

१ क. कैमोमिल्ला (Chamomilla)

माहवारी आरंभ होने के पहले विचित्र व्यवहार करना

डॉ. (श्रीमती) संगीता अ. भरमगुडे

२. माहवारी के पहले और माहवारी के समय शिकायतें

२ अ. ग्रेफायटिस (Graphites)

सूखी खांसी, इसके साथ ही पसीना आना

२ आ. लीथियम कार्बाेनिकम् (Lithium Carbonicum)

हृदय के स्थान पर वेदना होना

३. माहवारी शुरू होने पर शिकायतें

३ अ. ग्रेफाइटिस (Graphites)

३ अ १. माहवारी के समय आवाज भारी होना और सर्दी-बुखार आना

३ अ २. शरीर में थरथराहट

३ आ. बोरेक्स (Borax)

माहवारी के समय दोनों जंघाओं के जोडों में (groin में) वेदना होना

डॉ. अजीत भरमगुडे

४. माहवारी के पहले अथवा दो माहवारी के बीच स्त्रियों के पेट में वेदना (Dysmenorrhoea)

कुछ स्त्रियों को माहवारी शुरू होने से १-२ दिन पहले पेट में वेदना होने लगती है और माहवारी आरंभ होने पर २-३ दिनों में वह अपनेआप रुक जाती है । इस समय पेट में मरोड सी (cramps) आती है । कुछ को मितली, थकान अथवा जुलाब होते हैं । माहवारी के समय सामान्यतः पाया जानेवाला पेटदर्द किसी भी वैद्यकीय बीमारी के कारण नहीं होता ।

४ अ. कॉलोफायलम् थैलिकट्रोयडेस (Caulophyllum Thalictroides)

४ अ १. पेट में बीच-बीच में तेज दर्द उठना

४ अ २. ऐसा प्रतीत होना मानो अंतडियां (आतें) बाहर आ रही हों ।

४ अ ३. गर्भाशय से आसपास की अन्य इंद्रियों की ओर वेदना जाना

४ आ. कैमोमिल्ला (Chamomilla)

४ आ १. अत्यधिक तीव्र वेदना जैसे प्रसूति के समय होती है ।

४ आ २. वेदना सहन न होना, वेदना के साथ सुन्न-सा प्रतीत होना

४ आ ३. पेट के ऊपरी भाग पर दबाव लगना और रक्त के थक्के बाहर आना

४ आ ४. उष्ण हवामान हाेनेपर कष्ट में वृद्धि होना

४ इ. पल्सेटिल्ला निग्रिकन्स (Pulsatilla Nigricans)

४ इ १. वेदना कई बार एक भाग में, तो तुरंत ही दूसरे भाग में प्रतीत होना

४ इ २. वेदना के साथ ठंड लगना; जितनी अधिक वेदना, उतनी अधिक ठंड लगना

४ इ ३. माहवारी देर से आना अथवा दब जाना, मुख्यरूप से पैर गीले करने पर रक्तस्राव बंद होना

४ इ ४. माहवारी के समय वेदना होना और रक्तस्राव बहुत कम होना । उस समय जुलाब भी होना

४ इ ५. स्त्री का स्वभाव ‘कोमल, मृदु, झुक जानेवाली, दुःखी, निराश, शीघ्र रो पडनेवाली, बात-बात पर रोनेवाली, अपनी प्रत्येक शिकायत रोते हुए बतानेवाली’, इसप्रकार होना

४ इ ६. वेदना, ठंड, शौच इत्यादि के लक्षणों के स्वरूपों में सतत परिवर्तन होना

४ इ ७. अन्यों से सहानभूति की अपेक्षा

४ ई. मैग्नेशियम फॉस्फोरिकम् (Magnesium Phosphoricum)

४ ई १. माहवारी का स्राव आरंभ होने से पूर्व मज्जातंतूगत (neuralgic) वेदना होना, इसके साथ ही मरोड (cramps) उठना

४ ई २. पेट में प्रमुखरूप से दाईं ओर वेदना होना

४ ई ३. सेंकने, आगे झुकने और दबाव देने से अच्छा लगना । गतिविधि करने से वेदना में वृद्धि होना

४ ई ४. निरुत्साही, सुस्त और थकानग्रस्त स्त्रियों में माहवारी के कष्ट के लिए उपयुक्त

पेट में वेदना होना

४ उ. एकोनाईट नैपेलस (Aconite Napellus)

४ उ १. स्वस्थ, गुलाबी चेहरा (plethoric) वाली स्त्रियों में माहवारी के समय असहनीय वेदना होना

४ उ २. अचानक भय लगना और अस्वस्थ होना, चिंता लगना

४ उ ३. मृत्यु का भय लगना, मृत्यु का वास्तविक समय भी बताना

४ ऊ. कैक्टस ग्रैंडिफ्लोरस् (Cactus Grandiflorus)

४ ऊ १. पेट में अत्यंत भयानक वेदना होना

४ ऊ २. वेदना के कारण रोगी को जोर-जोर से रोना

४ ऊ ३. रोगी को अत्यधिक थकान आना

४ ए. कोलोसिंथिस (Colocynthis)

४ ए १. पेट में तीव्र वेदना होना, ऐसा लगना मानो आंतें (अंतडियां) पत्थर के नीचे कुचल दी गई हों

४ ए २. वेदना के कारण एकदम झुककर चलना

४ ए ३. रोगी का पीडा से तडपना

४ ए ४. पेट अपने हाथों से दबाकर आगे झुकने पर रोगी को अच्छा लगना

४ ऐ. वायबरनम् ओप्यूलस (Viburnum Opulus)

४ ऐ १. बीच-बीच में पेट में तीव्र वेदना, के साथ ही पेट में क्रैंप्स (cramps) आना

४ ऐ २. वेदना के साथ पेट में वायु होकर जोर से डकार आना

४ ओ. सेपिया ऑफिसिनैलिस (Sepia Officinalis)

४ ओ १. गर्भाशय नीचे खींचे जाने समान प्रतीत होना

४ ओ २. सर्व अवयव योनी से बाहर आ रहे हैं क्या, ऐसा प्रतीत होना और उसके कारण कैंची समान पैर डालकर बैठना अथवा वह भाग हाथ से पकडकर रखने के लिए बाध्य होना

४ ओ ३. माहवारी अत्यंत अल्प होना

४ औ. ब्रायोनिया (Bryonia)

४ औ १. माहवारी के समय मासिक स्राव के स्थान पर नाक से रक्तस्राव होना

५. मासिक स्राव अधिक होना (Menorrhagia)

कुछ स्त्रियों को माहवारी के समय अधिक मात्रा में और अधिक दिनों तक योनीमार्ग से रक्तस्राव होता है । ७ दिनों से अधिक और हमेशा की तुलना में अधिक मात्रा में रक्तस्राव होना, इसे ‘मासिक स्राव अधिक होना’, कहते हैं । मासिक स्राव अधिक हो रहा हो, तो निर्जलीकरण रोकने के लिए ‘जलसंजीवनी’ (ओरल रिहायड्रेशन सल्यूशन (ओ.आर्.एस्.)) दें । जलसंजीवनी, यह पानी और  ‘इलेक्ट्रोलाईट’ का मिश्रण है । बाजार में ‘ओ.आर्.एस्.’के तैयार पैकट मिलते हैं; परंतु यदि वे उपलब्ध न हों तो १ लीटर उबले हुए ठंडे पानी में ६ चम्मच शक्कर और आधा चम्मच नमक मिलाकर हम ‘जलसंजीवनी’ तैयार कर सकते हैं । अधिक रक्तस्राव होने से पंडुरोग (anaemia) होकर थकान आ सकती है । ऐसे समय पर रक्त बढाने के लिए लोह की गोलियां (iron tablets) लेना आवश्यक होता है ।

५ अ. बोरेक्स (Borax)

५ अ १. मासिक स्राव अपेक्षित समय के बहुत पहले आरंभ होकर उसकी मात्रा बहुत अधिक होना

५ अ २. मासिक स्राव के साथ ही पेट में मराेड आने के साथ मितली आना

५ आ. कल्केरिया कार्बाेनिकम् (Calcarea Carbonicum)

५ आ १. माहवारी, अपेक्षित समय के बहुत पहले आरंभ होना, स्राव की मात्रा बहुत अधिक होना और स्राव अनेक दिन शुरू रहना

५ आ २.रोगी स्थूल; परंतु निस्तेज (pale) होना

५ आ ३. पैर ठंडे पडना

५ इ. एलो सोकोट्रिना (Aloe Socotrina)

५ इ १. माहवारी अपेक्षित समय के बहुत पहले शुरू होना, स्राव की मात्रा बहुत अधिक होना और स्राव अनेक दिन शुरू रहना

५ इ २. प्रसूती के समय जैसी वेदना होती है, उसीप्रकार नीचे की दिशा में ढकेलने समान वेदना होकर गर्भाशय योनीमार्ग से बाहर आना

५ इ ३. शौच के लिए हडबडी होना

५ ई. फेरम् मैटेलिकम् (Ferrum Metalicum)

अन्य कोई भी लक्षण न होते हुए भी केवल माहवारी के स्राव की मात्रा अधिक होना

५ उ. हैमेमेलिस (Hamamelis)

५ उ १.  माहवारी अधिक होना

५ उ २. माहवारी गहरे रंग की होना

५ उ ३. विशेषरूप से यदि साथ में अंडाशय में वेदना होना (pain in ovaries)

५ ऊ. चायना ऑफिसिनैलिस (China Officinalis)

मासिक स्राव अधिक होना, स्राव में काली-सी गांठें होना

५ ए. क्रॉकस सटायवस (Crocus Sativus)

मासिक स्राव काला, गाढा, जोंक समान होना

५ ऐ. थैलेप्सी बर्सा पास्टोरिस (Thlapsi Bursa Pastoris)

५ ऐ १. मासिक स्राव बहुत होना

५ ऐ २. साथ में गांठें-सी पडना और पेट में वेदना होना

५ ऐ ३. माहवारी के उपरांत महीने भर में भी कमजोरी दूर न होना

५ ओ. कैमोमिल्ला (Chamomilla)

५ ओ १. मनःक्षोभ के कारण अति मात्रा में मासिक स्राव होना, उसके साथ ही बहुत चिडचिड होना

५ ओ २. स्राव गांठयुक्त और काले रंग का होना

५ औ. सिकेल कॉरन्युटम् (Secale Cornutum)

५ औ १. मासिक स्राव गाढा, रक्त और मवाद मिश्रित, साथ ही पतला होना

५ औ २. रोगी स्त्री ‘कृशकाय और दुर्बल’ (thin and cachectic) होना

५ अं. मैग्नेशियम कार्बाेनिकम् (Magnesium Carbonicum)

५ अं १. मासिक स्राव बहुत अधिक और प्रमुखरूप से रात्रि में अधिक मात्रा में होना

५ क. सबिना ऑफिसिनैलिस (Sabina Officinalis)

५ क १. मासिक स्राव गहरे लाल रंग का, बहुत अधिक और बीच-बीच में होना

५ क २. चलते समय अथवा खडे होने पर स्राव बढना

५ ख. इपिकैकुआन्हा (Ipecacuanha)

५ ख १. मासिक स्राव भारी मात्रा में और गहरे लाल रंग का होना

५ ख २. इस लक्षण के साथ मितली होना अथवा न होना

५ ग. नायट्रिकम् एसिडम् (Nitricum Acidum)

५ ग १. गर्भपात के उपरांत अथवा माहवारी के समय पेट में वेदना होकर भारी मात्रा में स्राव होना

५ ग २. रजोनिवृत्ति की (menopause के) अवधि में पेढू (पेट के निचले भाग) में खींचे जाने समान वेदना के साथ पीठ और जांघों में भी वेदना होना

५ ग ३. पेशाब में घोडे के मूत्र समान दुर्गंध आना

५ ग ४. मध्यरात्रि के उपरांत अस्वस्थ होना

५ ग ५. तीव्र मरोड (cramps) आकर नीचे खीचें जाने समान वेदना, तदुपरांत तुरंत ही स्राव होना

५ ग ६. हरे रंग का जलनयुक्त स्राव यानि ल्यूकोरिया

५ घ. आर्सेनिकम् आल्बम् (Arsenicum Album)

५ घ १. लंबे समय से माहवारी अधिक होना

५ घ २. पतला, जलनयुक्त स्राव होना (ल्यूकोरिया)

५ च. एंब्रा ग्रीसिया (Ambra Grisea)

माहवारी के उपरांत भी छोटे-छोटे कारण से रक्तस्राव होना

५ छ. युस्टिलगो मेडिस (Ustilago Maydis)

माहवारी के समय अत्यधिक स्राव होना; उससे पहले और बाद में ‘सामान्य रक्तस्राव’ (non-menstrual blood) होना

स्वउपचार करने की दृष्टि से साधक, पाठक, राष्ट्र-धर्मप्रेमी, शुभचिंतक एवं अर्पणदाता यह लेख आपात्काल की दृष्टि से संग्रहित रखें ।

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