चिंता अथवा डर (Anxiety/Fear/Panic) पर होमियोपैथी औषधियों की जानकारी

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वर्तमान के भागदौड के जीवन में किसी को भी और कभी भी संसर्गजन्य बीमारियों अथवा अन्य किसी भी विकारों का सामना करना पड सकता है । ऐसे समय पर यथाशीघ्र वैद्यकीय विशेषज्ञ से परामर्श उपलब्ध हो ही सकेगा, ऐसा कह नहीं सकते । सर्दी, खांसी, बुखार, उलटियां, जुलाब, बद्धकोष्ठता, आम्लपित्त जैसी विविध बीमारियों पर घर के घर में ही उपचार किया जा सके, इस दृष्टि से होमियोपैथी चिकित्सापद्धति सर्वसामान्य लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है । यह उपचारपद्धति घर के घर ही में कैसे उपयोग में लाएं ? होमियोपैथी की औषधियां किसप्रकार तैयार करें ? उसका संग्रह कैसे करें ? इसप्रकार की अनेक बातें इस लेखमाला द्वारा दे रहे हैं ।

पाठकों से विनती है कि किसी बीमारी पर स्वउपचार आरंभ करने से पूर्व ‘होमियोपैथी स्वउपचार संबंधी मार्गदर्शक सूत्र एवं प्रत्यक्ष औषधि का चयन कैसे करें ?’, इस संदर्भ की जानकारी पाठक पहले समझ लें और उस अनुसार प्रत्यक्ष औषधि का चयन करें !

संकलक : डॉ. प्रवीण मेहता, डॉ. अजित भरमगुडे आणि डॉ. (सौ.) संगीता अ. भरमगुडे

चिंता और भय, ये सामान्य मानवी भावनाएं हैं; परंतु जब जीवन की सामान्य परिस्थिति में भी निरंतर और अत्यधिक चिंता अथवा भय निर्माण होता हो और उससे धडकनें बढना, पसीना आना, श्वासोच्छ्वास की गति बढ जाना इत्यादि लक्षण दिखाई देें, तो उसपर उपचार लेना आवश्यक होता है । इसके साथ ही तनाव निर्माण करनेवाली परिस्थिति में सामान्यतः चिंता / भय लगना स्वाभाविक होता है; परंतु जब वह निरंतर और अधिक मात्रा में हो, तब उपचार लेना आवश्यक होता है । अत्यधिक चिंता / भय कम करने के लिए नियमित योगासन, प्राणायाम, ध्यान एवं स्वसूचना देना लाभदायी होता है । इसके अतिरिक्त आगे दी गई औषधियों में से उपयुक्त औषधि लें । औषधियों के नाम के आगे यह भी बताया है कि कौन से लक्षण में क्या औषधि लेनी है ।

१. एकोनाईट नैपेलस (Aconite Napellus)

होमियोपैथी वैद्य (डॉ.) प्रवीण मेहता

१ अ. अचानक घबराहट निर्माण होना, अस्वस्थ होना, चिंता होना

१ आ. प्रत्येक कृति हडबडी में करना

१ इ. शरीर की अवस्था सतत बदलते जाना

१ ई. मृत्यु का तीव्र भय लगना, मृत्यु का समय बताना

१ उ. भीड में जाने से भय लगना

१ ऊ. बंद कक्ष में रुकने से डर लगना (Claustrophobia)

२. अर्जेंटम् नायट्रिकम् (Argentum Nitricum)

२ अ. कुछ अनहोनी (बुरी घटना) होगी, इसकी चिंता करना

२ आ. भेंटवार्ता अथवा किसी कार्यक्रम में जाते समय, आगे होनेवाले प्रसंगों के विषय में भय अथवा प्रवास के विषय में चिंता होना

२ इ. विमान से यात्रा करने का, ऊंचाई का भय लगना (fear of heights)

२ ई. सतत जल्दीबाजी में रहना

३. जल्सेमियम सेम्पर्विरेन्स् (Gelsemium Sempervirens)

३ अ. परीक्षा की, असफलता की, व्यासपीठ पर से बोलने का भय लगना

३ आ. भय के कारण शरीर में थरथराहट, जुलाब होना, कमजोरी लगना

३ इ. सतत हलचल नहीं की, तो हृदय की क्रिया बंद हो जाएगी, ऐसा भय लगना

४. आर्सेनिकम् आल्बम् (Arsenicum Album)

डॉ. अजीत भरमगुडे

४ अ. रात में चिंता के कारण अस्वस्थ होने से नींद न आना

४ आ. मृत्यु की चिंता और भय लगना

४ इ. ‘औषधि का कुछ उपयोग नहीं, मेरी बीमारी ठीक नहीं हो सकती, मैं अवश्य मर जाऊंगा’, ऐसे विचार करना

४ ई. मन के स्तर पर अस्वस्थता (बेचैनी) और शारीरिक स्तर पर तीव्र थकान के कारण कोई हलचल न कर पाना

५. इग्नेशिया अमारा (Ignatia Amara)

५ अ. सतत दुःखी विचारों में रहना, रोना

५ आ. दुःख से कराहना, गहरी श्वास छोडना

५ इ. सतत कुछ न कुछ करने की चिंता में रहना

५ ई. कभी आनंदी, तो कभी अचानक खिन्न होकर रोने लगना

५ उ. भय लगना, छोटे-छोटे कारणोंवश भय लगना और हृदय की धडकनों का बढ जाना

५ ऊ. ‘कभी ठीक नहीं होऊंगा’, इस विचार से निराश होना

५ ए. रात में चोरों का भय लगना

५ ऐ. निकट के व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत चिंता के लक्षण आरंभ होना

६. कल्केरिया कार्बाेनिका (Calcarea Carbonica)

डॉ. (श्रीमती) संगीता अ. भरमगुडे

६ अ. सारासार विचार न कर पाने से संसर्गजन्य रोग होने की, आर्थिक हानि इत्यादि दुर्भाग्य जी‍वन में आने का भय लगना

६ आ. भय उत्पन्न करनेवाली कोई बात सुनने से अथवा चिंता के कारण मानसिक अस्वस्थता से हृदय की धडकनें बढना, विश्राम न मिलना

६ इ. शाम को अथवा रात को भय लगना और शरीर थरथराना

६ ई. कल्पना अथवा भय उत्पन्न करनेवाली कथाओं के कारण उत्तेजित होना

६ उ. रोग, दुर्भाग्यपूर्ण घटना, दुःखद अपघात, मृत्यु के विषय में भय लगना

७. फॉस्फोरम् एसिडम् (Phosphorum Acidum)

७ अ. अत्यधिक निरुत्साही – शारीरिक और मानसिक काम करने की इच्छा नष्ट होना

७ आ. छोटे से कारणवश अप्रसन्न होना

७ इ. कोने-कोने से मानो हमारी ओर कुछ रेंगता हुआ आने समान लगने से भयभीत होना

७ इ. उजाला, गंध, आवाज, स्पर्श के विषय में अति संवेदनशीलता अथवा उस कारण चौंक जाना

स्वउपचार करने की दृष्टि से साधक, पाठक, राष्ट्र-धर्मप्रेमी, शुभचिंतक एवं अर्पणदाता यह लेख आपात्काल की दृष्टि से संग्रहित रखें ।

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