
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही ब्रह्मदेव ने ब्रह्मांड की निर्मिति हुई । उनके नाम से ही ‘ब्रह्मांड’ नाम प्रचलित हुआ । इसका महत्त्व क्या है तथा इसे कैसे मनाना चाहिए, इसके बारे में सनातन संस्था की ओर से यहां के नक्की घाट स्थित त्रिदेव मंदिर में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को सनातन संस्था की साधिका श्रीमती प्राची जुवेकर ने सभी को मार्गदर्शन किया ।
उसमें यह बताया गया कि नववर्ष के दिन सूर्याेदय से पूर्व ही ब्रह्मध्वज अपने घर में खडा करना चाहिए, उसके माध्यम से उस दिन ब्रह्मतत्त्व तथा प्रजापति तरंगों का लाभ पूजक को अधिक मात्रा में होता है ।
इंद्रप्रस्थ सांस्कृतिक महोत्सव में सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी को जिज्ञासुओं ने दिया उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर
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