छोटे बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि होने हेतु आयुर्वेद के निम्न उपचार करें !

वैद्या (श्रीमती) पूनम शर्मा

प्रत्येक अभिभावक के मन में छोटे बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढाने के विषय में जिज्ञासा रहती है । रोगप्रतिरोधक शक्ति अच्छी रहने के लिए शरीर का बल और पाचनशक्ति उत्तम होना आवश्यक है । १ से १२ वर्ष की आयु के बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति उत्तम रहे, इसलिए हम आयुर्वेद के अनुसार निम्न उपचार कर सकते हैं ।

१. नियमित रूप से अभ्यंग करें, अर्थात सुबह स्नान करने के पूर्व पूरे शरीर की शुद्ध तिल के तेल से अथवा नारियल के तेल से मालिश करें ।

२. छोटे बच्चों को प्रतिदिन १ – २ घंटे खेलना चाहिए अथवा व्यायाम करना चाहिए ।

३. अभ्यंग, व्यायाम और उसके उपरांत स्नान इस क्रम से यह कृतियां करें ।

४. सुबह स्नान के उपरांत बच्चों को आहार दें ।

 

बच्चों की उत्तम पाचनक्रिया के लिए यह करें !

१. भोजन में हल्का और पौष्टिक आहार दें ।

२. बेसन और मैदे से बने पदार्थाें के स्थान पर सूजी से बने स्वादिष्ट पदार्थ, जैसे उपमा और इडली खिलाएं ।

३. छोटे बच्चों को विरुद्ध आहार, अर्थात दूध और फल एक साथ न दें, साथ ही कस्टर्ड खाने के लिए न दें ।

४. छोटे बच्चों को प्रतिदिन विशेषत: रात के समय केला और दही खाने के लिए न दें । सप्ताह में २ – ३ बार दिन के समय दे सकते हैं ।

५. बच्चों को भूख लगने पर ही भोजन दें । उन्हें भूख न लगी हो, तो उचित वैद्य को दिखाकर औषधोपचार करें ।

६. बाहर का खाना उदा. चाइनीज, पिज्जा, बर्गर आदि पदार्थ अधिक न खाने दें ।

७. बच्चे दूरदर्शन अथवा ‘स्मार्ट फोन’ देखते हुए भोजन न करें, इस ओर ध्यान दें ।

टिप्पणी : छोटे बच्चों की रोगप्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि करने के लिए आयुर्वेद में बताई गई ‘सुवर्णप्राशन विधि’ उचित आयुर्वेद वैद्यों के मार्गदर्शन में करें ।

– वैद्या (श्रीमती) पूनम शर्मा, स्त्री और बालरोग विशेषज्ञ, हरितश आयुर्वेद, हरियाणा.

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