‘आपातकालीन परिस्थिति और तनाव पर उपाययोजना’ पर सनातन संस्था की डॉ. सायली यादव का मार्गदर्शन

मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ और गुजरात में डॉक्टर का ऑनलाईन परिसंवाद

मुंबई – ‘‘समाज और राष्ट्र की वर्तमान स्थिति में भय, असुरक्षितता, भ्रष्टाचार आदि अनेक आघातों के कारण बिगड गई है । होमिओपैथी उपचार में बताया जाता है कि शरीर में आने से पहले बीमारी व्यक्ति के मन में आती है । व्यक्ति का आरोग्य, उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक आरोग्य पर निर्भर होता है । इसलिए शारीरिक और मानसिक आरोग्य का विचार करने के साथ ही व्यक्ति के सामाजिक और आध्यात्मिक आरोग्य का भी विचार करना चाहिए । इसीलिए राष्ट्र और धर्म की स्थिति का अभ्यास किए बिना समाज में रहनेवाले व्यक्ति के आरोग्य का विचार नहीं किया जा सकता । इसलिए व्यक्ति के आरोग्य के साथ-साथ राष्ट्र और धर्म की स्थिति की ओर भी ध्यान देना आवश्यक है’’, ऐसा प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति केे राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारूदत्त पिंगळे ने ऑनलाईन परिसंवाद में सहभागी डॉक्टरों से किया । सनातन संस्था औेर हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड और गुजरात में डॉक्टरों के लिए आयोजित इस परिसंवाद में ‘राष्ट्र और धर्म की वर्तमानस्थिति और डॉक्टरों का योगदान’ इस विषय पर उन्होंने मार्गदर्शन किया ।

इस परिसंवाद में १०० से भी अधिक डॉक्टर सहभागी हुए थे । शंखनाद, वेदमंत्रपठन और प्रार्थना से परिसंवाद का प्रारंभ हुआ । पुणे की डॉ. ज्योति काळे ने परिसंवाद का उद्देश्य बताया । कार्यक्रम का सूत्रसंचालन मुंबई की डॉ. ममता देसाई ने किया । वैद्यकीय उपचारों को अध्यात्म की जोड कैसे दें, उसका लाभ कैसे होता है आदि विविध शंकाओं का समाधान इस परिसंवाद से हुआ । इस अवसर पर डॉक्टरों ने नामस्मरण, मंत्रउपाय, सेवा का महत्त्व, साधना से होनेवाला लाभ इस विषय पर विविध प्रश्‍न उत्स्फूर्तता से पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान करवाया ।

आपातकाल का सामना करने के लिए साधना के
अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं ! –  डॉ. सायली यादव, सनातन संस्था

इस अवसर पर ‘आपातकालीन परिस्थिति और तनाव पर उपाययोजना’ पर मार्गदर्शन करते समय मुंबई की डॉ. सायली यादव ने कहा, ‘‘वर्तमान में कोरोना महामारी के कारण संपूर्ण जग हताश हो गया है । जागतिक स्तर पर कभी भी युद्ध छिड सकता है । मानवनिर्मित प्रलय के साथ-साथ  प्राकृतिक प्रकोप का भी सामना करना पड रहा है । संत त्रिकाल ज्ञानी होते हैं । अनेक संतों के साथ-साथ सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवले ने भी आपत्काल की तीव्रता ध्यान में रखकर सभी को साधना करने का आवाहन किया है । भगवान की कृपा होगी, तो इस आपातकाल से हमारी रक्षा हो सकती है । इसके लिए नामस्मरण साधना बताई है । आपातकालीन परिस्थिति का सामना करने के लिए सभी के लिए साधना करना आवश्यक है । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. सुनिल घनवट ने इस परिसंवाद में सहभागी डॉक्टरों का आवाहन किया कि वे भी प्रथमोपचार, वैद्यकीय उपक्रम, आरोग्य शिविर आदि उपक्रमों के माध्यम से  समाजकार्य में सहभागी हों और आध्यात्मिक बल प्राप्ति के लिए साधना करेें । अत: इस सूत्र पर १५ दिनों में कॉन्फरन्स कॉल द्वारा एकत्र आने के लिए किए आवाहन को डॉक्टरों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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