१. अध्यात्मप्रसार
सनातन संस्था ऋषिमुनि और संत-महंतों के धर्मशास्त्र को आधारस्तंभ मानकर समाज, राष्ट्र और धर्म की उन्नति का जो मार्ग दिखाया गया, उसके अनुसार कार्य करनेवाली अग्रणी संस्था है । सनातन संस्था का दृष्टिकोण केवल व्यक्ति की पारमार्थिक उन्नति तक मर्यादित नहीं है । सनातन संस्थाने व्यक्ति के साथ समाज, राष्ट्र और धर्म के उत्कर्ष को प्रधानता दी है । इसके लिए अध्यात्मप्रसार के साथ समाजसहायता, राष्ट्ररक्षण और धर्मजागृति के लिए ‘सनातन संस्था’ विविध उपक्रम आयोजित करती है ।
२. धर्मजागृति
धर्मरक्षा के लिए कृति करना धर्मपालन ही है !
‘धर्मो रक्षति रक्षित:,’ अर्थात जो धर्म का पालन करता है, उसकी रक्षा धर्म अर्थात ईश्वर करते हैं । यदि धर्म का ही नाश हो गया, तो राष्ट्र पर संकट आने में अधिक विलंब नहीं होगा । धर्म के प्रति समाज की उदासीनता दूर करने, धर्म की आड में समाज में घुसी दुष्प्रवृत्ति रोकने, साथ ही समाज को सच्चा धर्म समझाने के लिए सनातन संस्था कार्यप्रवण है ।
३. समाजसहायता
समाजसहायता के लिए ‘सनातन संस्था’ आगे दिए विविध उपक्रम आयोजित करती है
अ. व्यावसायिक प्रशिक्षण
आ. आरोग्यसंवर्धन के लिए कार्य
इ. शैक्षणिक उपक्रम
ई. दारिद्र्यनिर्मुलन उपक्रम
४. राष्ट्ररक्षा
राष्ट्ररक्षा के लिए ‘सनातन संस्था’ विविध उपक्रम आयोजित करती है, यथा राष्ट्रीय अस्मिताओं की रक्षा, संस्कृति का संवर्धन, पर्यावरण संतुलन उपक्रम, वृक्षारोपण, शिक्षाक्षेत्र में अनुचित प्रकरणों के विरुद्ध आंदोलन, नि:शुल्क प्रथमोपचार और आपात्कालीन प्रशिक्षणवर्ग, समाजहित में संलग्न संस्थाओं के साथ कार्य आदि ।
सनातन संस्था के कार्यों के विविध अंगों की अधिक जानकारी के लिए आगे दी लिंक देखें, ‘कार्य’.
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