पुणे में नक्सलवादियों के समर्थन में शहरी
कॉम्रेड लोगों का मार्ग पर आकर क्रोध से पैर पटकना !

पुणे, ३१ अगस्त (संवाददाता) – शहरी नक्सलवादियों को पुणे पुलिस ने बंदी बनाया । तत्पश्चात नक्सलवाद के समर्थक तथा कथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने क्रोध से पैर पटकना प्रारंभ कर दिया है । इसी के एक भाग स्वरूप ३० अगस्त को हम शहरी कॉम्रेड के नारे लगाते हुए जनपदाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किए गए । इस अवसर पर अत्यंत उत्तेजित भाषण देते हुए नक्सलवादियों को बंदी बनानेवाली पुलिस, सत्ताधारी भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सनातन का निषेध किया गया । इस समय आरोप लगाया गया कि दाभोलकर, पानसरे, लंकेश, कलबुर्गी की हत्याओं के अन्वेषण में सनातन संस्था का नाम आया है । ईद और गणेश उत्सव में बमविस्फोट कर धार्मिक दंगे करने का उनका षड्यंत्र था । लोगों का ध्यान अन्यत्र मोडने के लिए ये गिरफ्तारी की गर्इ है ।( शहरी नक्सलवादियों की थ्योरी । ऐसी फालतू बातों पर छोटा बच्चा भी विश्वास नहीं कर सकता ! – संपादक)
हिन्दुत्व एवं भारतीयत्व पर विषवमन करनेवाली एल्गार परिषद का भी इस समय समर्थन किया गया तथा पू. भिडेगुरुजी को बंदी बनाने की मांग की गर्इ । इस अवसर पर कथित समाजसेविका किरण मोघे, विद्या बाळ, सुभाष वारे सहित अन्य उपस्थित थे ।
सनातन संस्था के पास शस्त्रास्त्र तथा बम बनाने के साधन मिले हैं, तब भी संस्था पर प्रतिबंध नहीं लगाया जाता तथा संस्था के वरिष्ठ को बंदी नहीं बनाया गया है; परंतु फुले, शाहू, अंबेडकर की सामग्री मिलने के नाम पर देशद्रोही कहकर बंदी बनाया जाता है, यह सरकार का पक्षपात है, ऐसा शोर भी इस समय मचाया गया । (किसी भी अन्वेषण तंत्र ने सनातन संस्था को किसी भी प्रकरण में दोषी नहीं बताया है, तब भी निरंतर झूठा प्रचार करना अर्थात सूर्य को काला कहने के समान है । सूर्य को काला कहने से सूर्य काला तो नहीं बन जाता, अपितु नारे लगानेवालों का बौद्धिक दिवालियापन ही उजागर होता है । – संपादक)
बंदी बनाए गए नक्सलवादी मान्यवर अधिवक्ता, लेखक, विचारक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं । वे देश के पिछडेवर्ग, आदिवासी, किसान, मजदूर, वंचित जनता के अधिकारों के लिए लडनेवाले तथा सरकारी नीतियों के विरोध में आवाज उठानेवाले हैं । उनकी आवाज एवं विचार दबाने के लिए उनकी गिरफ्तारी का खेल खेला गया है । (नक्सल समर्थकों की गिरफ्तारी के पश्चात जिस तडप के साथ कथित आधुनिकतावादी और संविधानवाले बिल से बाहर निकले हैं, उसे देखते हुए पुलिस को इन सबका भी अन्वेषण करना चाहिए । – संपादक)
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(कहते हैंं), कहीें ऐसा तो नहीं कि सनातनवालों ने चूहे एवं घूसों को नहर में...
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