अक्कलकोट के श्री स्वामी समर्थ की समाधि के छायाचित्र

‘डरो मत…! – तुम्हारी रक्षा के लिए मैं तुम्हारे साथ हूं !’ मराठी में ऐसा आशीर्वचन देनेवाले श्री स्वामी समर्थ । स्वामी समर्थ अर्थात प्रभु दत्तात्रेय के चौथे अवतार ।

भारतीय संस्कृति को संजोकर रखनेवाला नेपाल !

भारतीय रुपया जैसा उस पर महात्मा गांधी अथवा किसी नेपाली राजनेता का चित्र नहीं, अपितु इस नोट पर हिमालय का चित्र है ।

फीजियोथेरेपी

अपने शरीर के किसी पीडित अंग, स्नायु तथा हड्डियों को पूर्ववत करने के व्यायाम और फीजियोथेरेपी ये दो भिन्न पद्धति हैं ।

‘कोरोना’ की महामारी में प्रतिरोधकक्षमता और आध्यात्मिक कैसे बढाए !

वर्तमान में ‘कोरोना’ की महामारी सर्वत्र फैल रही है । ‘इस विषाणु के संक्रमण से बचने के लिए चिकित्सकीय उपचारों के साथ प्रतिबंधात्मक उपायों स्वरूप तथा स्वयं की प्रतिरोधक क्षमता एवं आध्यात्मिक बल बढे, इस हेतु मंत्र-उपचार भी करें ।

भक्त शिरोमणि सूरदास

भक्ति काल के सर्वश्रेष्ठ संत कवि सूरदास की रचनाओं को जो भी पढता है, वह श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबे बिना नहीं रह पाता है ।

नवविधा भक्ति : सख्य भक्ति

सख्य भक्ति में भक्त ईश्वर को अपना सखा और सर्वस्व मानकर उसकी सेवा करता है । इसमें भक्त का भाव रहता है कि भगवान मेरे सखा हैं ओैर मेरे सुख-दु:ख में सहायक हैं । इस भाव से भक्ति करना, सख्यभक्ति कहलाता है । सख्यभक्ति में भक्त व भगवान के बीच कोई भेद नहीं होता ।

संत मीरा बाई

संत मीरा बाई ने बताया है कि श्रीकृष्ण के प्रति अटूट आस्था के कारण, उनपर दृढ श्रद्धा के कारण उन्होंने अपने जीवन के कठिन से कठिन प्रसंग भी पार किए हैं ।

सूरदासजी की गुरुभक्ति

गुरुआज्ञा मानकर ही तो संत सूरदास जी ने अपने को कृष्ण भक्ति में ऐसा डुबो दिया था कि आज भी उनके समान दूसरे भक्त कवि नहीं हुए ।

नवविधा भक्ति : वंदनभक्ति

हमारे द्वारा किए जा रहे नमस्कार में जब भाव आता है, तब उसका रूपांतरण वंदन में होता है और इस भाव से नमस्कार करते जानेपर धीरे-धीरे उस नमस्कार का रूपांतरण भक्ति में होता है । उसी का नाम है वंदनभक्ति !