वर्षा ऋतु में सर्दी, खांसी, ज्वर एवं कोरोना में उपयुक्त घरेलु औषधियां

औषधि अपने मन से न लेते हुए वैद्यों के मार्गदर्शनानुसार ही लेनी चाहिए; परंतु कई बार वैद्यों के पास तुरंत ही जाने की स्थिति नहीं रहती । कई बार थोडी-बहुत औषधि लेने पर वैद्यों के पास जाने की आवश्यकता ही नहीं पडती । इसलिए ‘प्राथमिक उपचार’ के रूप में यहां कुछ आयुर्वेद की औषधियां दी हैं ।

चिकनगुनिया : लक्षण एवं उपचार !

‘चिकनगुनिया’ इस व्याधि का स्वरूप भले ही भयंकर है, तब भी यह प्राणघातक व्याधि नहीं है । वह ठीक हो जाती है और जोडों में वेदना भी ठीक हो सकती है । केवल योग्य समय पर वैद्य के पास जाना ओर उनसे पर्याप्त समय तक उपचार लेने की आवश्यकता है ।’

रात में यदि नींद नहीं आती हो, तो आंखों पर से आवरण हटाकर आंखों की कष्टदायक शक्ति दूर करें !

नींद न आने का मुख्य आध्यात्मिक कारण आंखों पर होनेवाला कष्टदायक शक्ति का आवरण एवं आंखों में विद्यमान कष्टदायक शक्ति है ।’ कष्टदायक शक्ति के जडत्व के कारण नींद आते हुए भी आंखें बंद नहीं होतीं ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी की धर्मपत्नी वात्सल्यमूर्ति प.पू. जीजी (प.पू. (श्रीमती) सुशीला कसरेकरजी) का देहत्याग !

सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. भक्तराज महाराजजी की (प.पू. बाबा की) धर्मपत्नी तथा पू. नंदू कसरेकरजी की माताजी प.पू. जीजी (प.पू. [श्रीमती] सुशीला कसरेकरजी) (आयु ८६ वर्ष) ने १८ सितंबर को दोपहर २ बजे नाशिक में उनके कनिष्ठ पुत्र श्री. रवींद्र कसरेकर के आवास पर देहत्याग किया ।

श्राद्ध में भोजन परोसने की पद्धति

‘पितरों के लिए थाली में सदैव उलटी दिशा में अन्न पदार्थ परोसने से रज-तमात्मक तरंगें उत्पन्न होकर मृत आत्मा के लिए अन्न ग्रहण करना संभव होता है ।’

खुलकर बात करना एक महान औषधि है !

पूर्वाग्रह, राग, भय के समान मूलभूत स्वभावदोषों के कारण अधिकांश लोगों के लिए खुलकर बात करना असहज रहता है । कुछ लोगों के मन में अनेक वर्षाें के प्रसंग तथा उस संबंधी भावनाएं रहती हैं । यदि मन में किसी भी प्रकार के विचार संगठित हुए, तो उसका परिणाम देह पर होता है तथा विभिन्न शारीरिक कष्ट आरंभ होते हैं ।

शारदापीठ तथा ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज का देहावसान !

द्वारका स्थित शारदापीठ तथा बद्रिकाश्रम के ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज के देहावसान से हिन्दू धर्म के लिए धधकती ब्राह्मतेजकी ज्वाला शांत हो गई ।

किसी को नामजपादि उपाय ढूंढकर देते समय उस व्यक्ति का कष्ट, उसका आध्यात्मिक स्तर, अनिष्ट शक्तियों के उस पर हो रहे आक्रमण इत्यादि घटकों का विचार करें !

कष्ट होनेवाले साधक अथवा संत का आध्यात्मिक स्तर, उनका समष्टि कार्य, उन्हें होनेवाला आध्यात्मिक कष्ट, अनिष्ट शक्तियों के उन पर हो रहे आक्रमण इत्यादि घटकों का विचार कर उन्हें नामजप, की जानेवाली उंगलियों की मुद्रा एवं उन मुद्राओं से किया जानेवाला न्यास ढूंढें ।

व्यक्ति को होनेवाले आध्यात्मिक कष्ट दूर होने हेतु आध्यात्मिक स्तर पर उपाय करना ही आवश्यक !

मनुष्य के जीवन में आनेवाली ८० प्रतिशत समस्याएं आध्यात्मिक कारणों से होती हैं । इन समस्याओं में शारीरिक एवं मानसिक विकार भी आते हैं । इन विकारों का कारण ८० प्रतिशत आध्यात्मिक होने से ये विकार मुख्यरूप से आध्यात्मिक स्तर के उपायों से ही ठीक होते हैं । ये आध्यात्मिक स्तर के उपाय, अर्थात प्राणशक्तिवहन … Read more