‘सभी का विचार करने की अपेक्षा केवल अपनी जाति हेतु आरक्षण की मांग करना, यह स्वार्र्थपरता है तथा उसे स्वीकृति देना, यह जनता को अनपढ रखनेवाले राजनेताओं द्वारा स्वयं के स्वार्थ हेतु अपनाया गया निर्णय ! इसके विपरीत धर्म सर्वस्व का त्याग करना सिखाकर ईश्वरप्राप्ति करवाता है ।’
हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे प्राप्त करके रहूंगा’, ऐसा निश्चय...
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !