‘सभी धर्मों का अध्ययन किए बिना संसार में केवल हिन्दू ही सर्वधर्म समभाव कहते हैं । अन्य किसी भी धर्म का एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं कहता । हिन्दुओं को यह ध्यान में नहीं आता कि ‘सर्वधर्म समभाव’ कहना, अज्ञान की उच्चतम सीमा है, यह ‘प्रकाश और अंधकार एक समान है’, ऐसा कहने जैसा है !’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे प्राप्त करके रहूंगा’, ऐसा निश्चय...
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !