सच्चिदानंद परब्रम्ह डॉ. जयंत आठवलेजी अद्वितीय कार्य एवं विशेषताओं का संक्षिप्त परिचय !

सच्चिदानंद परब्रम्ह डॉ. जयंत आठवलेजी ने व्यापक अध्यात्मप्रसार के लिए ‘सनातन संस्था’की स्थापना की । उन्होंने शीघ्र ईश्वरप्राप्ति के लिए ‘गुरुकृपायोग’ साधनामार्ग की निर्मिति की । इस विषय में अधिक जानकारी अवश्य पढें ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के देह से बचपन में प्रक्षेपित होनेवाली चैतन्य की अनुभूति

पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, इस उक्ति के अनुसार अवतारी देह में से बचपन से ही चैतन्य का प्रक्षेपण हो रहा है ।