परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका जन्म, आध्यात्मिक वृत्तिसम्पन्न परिवार, और शिक्षा तथा छात्र जीवनमें किया कार्य

होनहार बिरवान के, होत चीकने पात इस उक्ति के अनुसार परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का जन्म ६ मई १९४२ को श्री. बाळाजी वासुदेव आठवलेजी और श्रीमती नलिनी बाळाजी आठवलेजी के परिवार में हुआ । आगे वे दोनों संतपद पर विराजित हुए ।

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का परिचय

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी जैसे उच्च कोटि के संत पर आज अत्यंत हीन आरोप लग रहे हैं । इसलिए परात्पर गुरु डॉक्टर जी की संक्षिप्त जानकारी तथा उनके द्वारा स्थापित या उनकी प्रेरणा से स्थापित संस्था, संगठन आदि के कार्य की जानकारी दी है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के देह से बचपन में प्रक्षेपित होनेवाली चैतन्य की अनुभूति

पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, इस उक्ति के अनुसार अवतारी देह में से बचपन से ही चैतन्य का प्रक्षेपण हो रहा है ।