लक्ष्मीदेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां
मंगलवार, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा, धनत्रयोदशी, यमदीपदान, देवदीपावली एवं श्री लक्ष्मीपूजनके शुभ प्रसंगमें लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।
मंगलवार, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा, धनत्रयोदशी, यमदीपदान, देवदीपावली एवं श्री लक्ष्मीपूजनके शुभ प्रसंगमें लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।
विशेषकर मंगलवार एवं शुक्रवारके दिन देवीपूजनसे पूर्व तथा नवरात्रिकी कालावधिमें घर अथवा देवालयोंमें देवीतत्त्व आकृष्ट एवं प्रक्षेपित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाएं ।
आदिमानव प्रकृति में मिलनेवाले कंदमूल, फल एवं पशुओं की शिकार कर उसका मांस खाता था । प्रकृति में विद्यमान स्वच्छ हवा और ताजा बनाए गए अन्न के कारण वह निरोगी था ।
‘विमोचन’ अर्थात देवता के कृपाशीर्वाद से उस विशिष्ट घटक में व्याप्त प्रकाश के निर्मितिस्रोत को दिशा अथवा मार्ग दिखाकर उसे समष्टि के लिए कार्यरत करना ।
जो गुरुपदपर आसीन हो और जिसका अहं अल्प हो वह जीव ईश्वर को भी परमप्रिय होता है । ऐसा जीव ही संपूर्ण मानवजाति की दृष्टि से सम्माननीय होता है ।
सत्कारमूर्तियों को चंदन का तिलक, कुमकुम-तिलक अथवा हलदी-कुमकुम (स्त्री हो तो हलदी-कुमकुम) लगाएं । चंदन का तिलक / कुमकुम-तिलक लगाने के लिए एक छोटी कटोरी में चंदन पाउडर अथवा कुमकुम थोडासा गीला करके रखें, तथा सत्कारमूर्तियों में स्त्री हो, तो हलदी-कुमकुम की कटोरियां रखें ।
ऋषि अथवा मुनि कहनेपर हमारे हाथ अपनेआप जुड जाते हैं और मस्तक सम्मान से झुक जाता है । इस भरतखण्ड में कई ऋषियों ने विविध योगमार्गों के अनुसार साधना कर भारत को तपोभूमि बनाया है ।
REST IN PEACE का अर्थ ‘शांति से लेटिए !’ ‘हे मृतात्मा, हमने तुम्हारे शरीर को भूमि में दफनाया है । अब कयामत के दिन उपरवाला तुम्हारे साथ न्याय करेगा; इसलिए अब तुम इस भूमि में शांति से लेटकर कयामत के दिन की प्रतिक्षा करो !’’
हिन्दू इस त्योहार के प्रति लोगों में जागृति लाकर आज इस त्योहार को जो विकृत स्वरूप प्राप्त हुआ है, उसे रोकने हेतु प्रयास करें । हिन्दुओं को इस माध्यम से हमारे त्योहार और संस्कृति का सम्मान करने हेतु संगठित होना चाहिए ।
आषाढ मास में दीपयज्ञ करने की परंपरा है ।