हिन्दुओ, त्योहार मनाते समय उसका महत्त्व जानिए और संस्कृति विरोधियों को उचित उत्तर दीजिए !

एक बार शिवजी किसी कार्य से बहुत समय तक अपने स्थान से बाहर रहे । तब लक्ष्मीजी, पार्वतीजी से कहती हैं, आप अपने मैल से पुत्र बनाइए । इससे आपका अकेलापन दूर होगा और संसार का कल्याण भी होगा । तब, पार्वतीजी अपने मैल से एक बालक की मूर्ति बनाकर उसमें प्राण डालती हैं ।

मंडप की पवित्रता बनाए रखना महत्त्वपूर्ण !

मुंबई के प्रसिद्ध अंधेरी का राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल ने जीन्स, स्कर्ट परिधान कर आनेवाली महिलाआें एवं छोटी पैंट पहनकर आनेवाले पुरुषों के लिए गणेशजी के दर्शन करने पर प्रतिबंध लगाया है ।

जिम, पार्लर, फैशन तथा मॉडेलिंग के मायाजाल में फंसकर खो रहे हैं बालक अपना बचपन !

एक अंतराष्ट्रीय षड्यंत्र के माध्यम से भारत की भावी पीढी को योजनाबद्ध ढंग से पतित बनाकर उसका तेज नष्ट किया जा रहा है । समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो भारत के राजधानीवाले नगरों में बढनेवाली इस कुप्रवृत्ति को ग्रामीण भागों में फैलने में समय नहीं लगेगा ।

देवदीपावली

कुलस्वामी, कुलस्वामिनी एवं इष्टदेवताके अतिरिक्त अन्य देवताओंकी पूजा भी वर्षमें किसी एक दिन करना तथा उनको भोग प्रसाद अर्पण करना आवश्यक होता है । यह इस दिन किया जाता है ।

हिन्दुओ, पश्‍चिमी संस्कृति का अंधानुकरण न करें, धर्माचरण से कर्महिन्दू बनकर आनंदमय बनें !

वर्तमान में प्रत्येक क्षेत्र में, पश्‍चिमी संस्कृति ने अपना स्थान बना लिया है । वेशभूषा, आहार अथवा शिक्षा, सभी पर पाश्‍चात्य संस्कृति का प्रभाव दिखाई दे रहा है ।

चाय के गंभीर दुष्परिणाम !

कर्करोग और हृदयरोग रोकनेवाले एन्टी-ऑक्सिडेन्ट नामक पदार्थ केवल बिना दूध की चाय में है । दूध चीनी मिलाकर उबली चाय आयुर्वेद शास्त्रानुसार अग्निमंद करनेवाली (भूख अल्प करने में सहायक) है ।

भोजन बनाने के लिए एल्युमिनियम अथवा हिंडालियम के बरतनों का उपयोग न करें !

एल्युमिनियम अथवा हिंडालियम के बरतन शरीर के लिए हानिकारक है । भोजन बनाने के लिए मिट्टी के बरतनों का उपयोग करने से शरीर के लिए आवश्यक खनिज भोजन के माध्यम से मिलते हैं ।

आकाशदीप

आकाशदीप का मूल आकार कलशसमान होता है । यह मुख्यतः चिकनी मिट्टी का बना होता है । इसके मध्य पर तथा ऊपरी भाग पर गोलाकार रेखा में एक-दो इंच के अंतर पर अनेक गोलाकार छेद होते हैं ।

आकाशदीप लगाने का अध्यात्मशास्त्र (सूक्ष्म विज्ञान)

दीपावली के दिनों में ब्रह्मांड में संचार करनेवाले अनिष्ट तत्त्वों का निर्मूलन करने के लिए श्रीलक्ष्मी-तत्त्व सक्रिय होता है । इसे प्राप्त करने के लिए, घर के बाहर ऊंचे स्थान पर आकाशदीप लगाया जाता है ।

आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रार्थना का महत्त्व

सत्संग में रहने से एवं सात्त्विक तथा सत्प्रवृत्त लोगों से संबंध आने के कारण मानसिक आधार मिलकर मन प्रसन्न रहता है । उसका प्रभाव स्वास्थ्य पर होता है तथा स्वास्थ्य एवं दीर्घायु मिलती है