अधिवक्ताओं संविधान की त्रुटियों के संदर्भ में प्रबोधन करें ! – चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था
अपने वक्तव्य में श्री. चेतन राजहंसजी ने यह प्रतिपादित किया कि, ‘आज भी भारत में ‘इंडियन पीनल कोड १८६०’ यह अधिनियम पारित है । यह अधिनियम मूलतः अंग्रेजों ने भारत में पुनः वर्ष १८५७ के समान उठाव न हो, इसलिए क्रांतिकारकों पर अंकुश रखने हेतु पारित किया था ।
