एक गुण के संपूर्ण समर्पण से ही भगवान का विश्व समझ में आकर भगवान के प्रति निकटता प्रतीत होने लगना और उससे ही भावनिर्मिति होना

हमें जो आता है, वह सबकुछ भगवान को अर्पण करने का प्रयास करना चाहिए । एक गुण भी हमें बहुत कुछ सिखाता है । ‘हमने कितना सीखा ?’, इसकी अपेक्षा ‘हमने क्या सीखा ?’, इसका अधिक महत्त्व है । एक गुण के संपूर्ण समर्पण से ही हमें भगवान का विश्व समझ में आने लगता है … Read more

स्वयं में विद्यमान दैवी गुणों को पहचानकर उसके अनुसार प्रयास करने चाहिए !

प्रत्येक व्यक्ति में भगवान के द्वारा ऐसा एक उत्तम गुण प्रदान किया गया होता है, जिसका उचित उपयोग करने से उसकी सेवा और साधना की फलोत्पत्ति बढती है । ‘वह गुण कौनसा है ?, इसका स्वयं चिंतन कर और उसके लिए अन्यों से सहायता लेकर पहचानना चाहिए और उसका उचित उपयोग कर उसके लिए तीव्रगति … Read more

स्वेच्छा के २ प्रकार

‘साधना करनेवाले ‘आगामी जन्म न मिले ; साधना कर इसी जन्म में मोक्ष प्राप्त हो जाए’, ऐसी इच्छा रखते हैं । इसके विपरीत राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमी लोगों को लगता है, ‘धर्मकार्य करने हेतु पुनः-पुनः जन्म मिले ।’ यदि इसे स्वेच्छा कहेंगे, तो ‘अगला जन्म न मिले’, यह भी तो स्वेच्छा ही है !’ – सच्चिदानंद … Read more

साधना में ध्येय साध्य करते समय पुनः-पुनः विफलता मिले, तो क्या करें ?

१. प्रथम स्तर ‘ध्येय मेें से जो कुछ थोडा-बहुत भी साध्य हुआ हो, उस संदर्भ में संतोष रखें तथा गुरु एवं ईश्‍वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें । २. दूसरा स्तर विफलता के पीछे के कारणों को ढूंढना चाहिए । शारीरिक, मानसिक अथवा आध्यात्मिक में से वास्तविक कारण क्या है, इसका चिंतन करें । उन … Read more

ईश्वरप्राप्ति के संदर्भ में मनुष्य की लज्जाजनक उदासीनता !

‘धनप्राप्ति, विवाह, रोग-व्याधि इत्यादि अनेक कारणों के लिए अनेक लोग उपाय पूछते हैं; परंतु ईश्वर प्राप्ति के लिए उपाय पूछने का कोई विचार भी नहीं करता !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

संसार की सर्वश्रेष्ठ पदवी !

‘संसार के अनेक विषयों में अनेक पदवियां हैं। ‘डॉक्टरेट’ जैसी अनेक उच्च स्तर की पदवियां हैं; परंतु उनसे भी सर्वश्रेष्ठ पदवी है, ‘सच्चे गुरु’ का ‘सच्चा शिष्य’ !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

जीवन के आरंभिक काल से साधना करने का महत्त्व !

‘अनेक पति-पत्नी जीवन भर लडते-झगडते रहते हैं और आगे बुढापे में उन्हें समझ में आता है कि ‘ कष्ट का उपाय केवल साधना करना ही है ।’ उस समय ‘जीवनभर साधना क्यों नहीं की’ इसका पश्चाताप करने के अतिरिक्त उनके पास कोई विकल्प नहीं होता ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले,

धर्मकार्य हेतु ईश्वर की कृपा कैसे प्राप्त करें ?

‘हमने ईश्वरप्राप्ति के लिए प्रयास किए, तो ईश्वर का ध्यान हमारी ओर आकर्षित होता है और हमारे द्वारा किए जा रहे धर्मकार्य के लिए ईश्वर की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त होते हैं ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

ईश्वरीय कानून एवं जमा खर्च का महत्त्व !

‘पृथ्वी के कानून और जमा-खर्च आदि सब व्यर्थ हैं । अंत में प्रत्येक को ईश्वरीय कानून एवं जमा-खर्च इत्यादि का सामना करना पडता है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

सीखने की वृत्ति के लाभ !

‘प्रत्येक चूक से कुछ सीख पाएं, तो चूक के कारण दुख नहीं होता। सीखने का आनंद मिलता है।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले,