बुद्धिवादियों की अपेक्षा ‘मुझे दिखाई नहीं देता’, यह सत्य स्वीकार करनेवाला श्रेष्ठ !

‘मोतियाबिंदु से ग्रस्त व्यक्ति को बारीक अक्षर दिखाई नहीं देता । यदि कोई वह बारीक अक्षर पढ़कर सुनाए, तो मोतियाबिंदु से ग्रस्त व्यक्ति यह नहीं कहता कि, वहां अक्षर है, ऐसा झूठ कहकर आप भ्रमित कर रहे हैं । वह कहता है ‘मुझे बारीक अक्षर दिखाई नहीं देते ।’ चष्मा लगाने पर वह बारीक अक्षर … Read more

भारत और हिन्दू धर्म की असीमित हानि करनेवाले अभी तक के राजनेता !

‘शिक्षा के लिए संपूर्ण संसार से लोग भारत में आते हैं, ऐसा एक ही विषय है, वह है मनुष्य का चिरंतन कल्याण करनेवाला अध्यात्मशास्त्र और साधना । वह हिन्दू धर्म की संसार को देन है । ऐसा होते हुए भी भारत के अभी तक के राजनेता उसका महत्त्व समझ नहीं पाए । इसलिए उन्होंने स्वयं … Read more

‘चरित्रसंपन्न राष्ट्र’ आदर्श राष्ट्र है !

‘अश्लील चलचित्र’, ‘पब’, ‘लिव इन रिलेशनशिप’ जैसी बातों को शासनकर्ताओं ने मान्यता दी । इससे राष्ट्र की जनता का चरित्र नष्ट हो रहा है । ‘रामराज्य’ और छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘हिन्दवी स्वराज्य’ आदर्श था; क्योंकि वे राज्य चरित्रसंपन्न थे । आजकल के शासनकर्ता यह ध्यान में रखकर ‘चरित्रसंपन्न राष्ट्र’ निर्माण करने का प्रयास करेंगे … Read more

बुद्धिवादी, सर्वधर्मसमभावी, साम्यवादी ही देश और धर्म के खरे शत्रु हैं !

‘बुद्धिवादियों के कारण हिन्दुओं की ईश्वर के प्रति श्रद्धा नष्ट हो गई । सर्वधर्मसमभाववादियों के हिन्दू धर्म की अद्वितीयता हिन्दू समझ नहीं पाए एवं साम्यवादियों के कारण हिन्दुओं ने ईश्वर को मानना छोड़ दिया । अतः ईश्वर की कृपा न होने से हिन्दुओं और भारत की स्थिति दयनीय हो गई है । हिन्दू राष्ट्र की … Read more

अहंभाव रखनेवाले लेखापरीक्षक और अहंभावशून्य ईश्वर

‘लेखापरीक्षक कुछ व्यक्तियों का लेखा परीक्षण करते हैं तथा उसका उन्हें अहंभाव होता है । इसके विपरीत ईश्वर अनंत कोटि ब्रह्मांड के प्रत्येक जीव के प्रत्येक क्षण का लेखा जोखा (अकाउंट) रखते हैं, तब भी वे अहंशून्य हैं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

अहंभाव रखनेवाले आधुनिक चिकित्सक (डॉक्टर) और अहंभावशून्य ईश्वर !

‘आधुनिक चिकित्सक (डॉक्टर) रोगियों को छोटे-बडे रोगों से बचाते हैं एवं उसका उन्हें अहंभाव होता है । इसके विपरीत ईश्वर साधकों को भवरोग से, अर्थात जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करते हैं, तब भी वे अहंशून्य होते हैं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

वास्तविक ‘दूरदर्शिता’ !

‘स्वयं के सुख के लिए दूसरों को दुःख देकर धन का संग्रह करना पाप है; परंतु भविष्यकाल को ध्यान में रखकर उसके लिए अपनी तैयारी उचित प्रकार से करने को ‘दूरदर्शिता’ कहते हैं ‌।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

ईश्वर की खोज करना आवश्यक !

‘वैज्ञानिक ईश्वर की खोज करने के स्थान पर ईश्वर द्वारा बनाए गए विश्व की खोज अनेक पीढ़ियों तक करते रहते हैं । इसके विपरीत साधक ईश्वर की खोज करते हैं । ईश्वर मिलने पर उन्हें विश्व की पहेली सुलझती है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले

हिन्दुओ, ध्यान रखें साधना कर ईश्वर का आशीर्वाद मिलनेपर ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होगी !

‘ईश्वर के आशीर्वाद के बिना संसार में कुछ भी नहीं हो सकता । इसलिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना ईश्वर के आशीर्वाद के बिना होना संभव नहीं है । अतः हिन्दुओ, साधना कर ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

भारत का प्रारब्ध परिवर्तित करने के लिए आध्यात्मिक स्तर के उपचार ही आवश्यक !

‘किसी व्यक्ति का प्रारब्ध परिवर्तित करना लगभग असंभव होता है । परिवर्तित करना ही हो, तो तीव्र साधना करनी पड़ती है । ऐसा होते हुए शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक स्तर पर प्रयत्न करने पर भारत का प्रारब्ध परिवर्तित करना क्या संभव है ? उसके लिए आध्यात्मिक स्तर के ही उपचार, अर्थात साधना का बल चाहिए … Read more