संतों की श्रेष्ठता !
‘अपने पुत्र का आगे कैसे होगा ?’, यह चिंता उसके माता-पिता को होती है । इसके विपरीत ʻराष्ट्र के सभी लोगों को संत अपनी संतान मानते हैं । इस व्यापक भाव के कारण संत सदैव आनंदी रहते हैं ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘अपने पुत्र का आगे कैसे होगा ?’, यह चिंता उसके माता-पिता को होती है । इसके विपरीत ʻराष्ट्र के सभी लोगों को संत अपनी संतान मानते हैं । इस व्यापक भाव के कारण संत सदैव आनंदी रहते हैं ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘हिन्दुओं को शोध करने की आवश्यकता नहीं होती; क्योंकि सुख नहीं, अपितु आनंदप्राप्ति के लिये अर्थात मोक्षप्राप्ति तक सबकुछ हिन्दू धर्म में बताया हुआ है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
‘हिन्दू धर्म का जितना अध्ययन करना प्रारंभ किया, उतनी ही परिपूर्ण हिन्दू धर्म में जन्म देने के कारण ईश्वर के प्रति कृतज्ञता में वृद्धि होती गई ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
पुलिसकर्मियों को कानून, नीति और धर्म सिखाएं, जिससे वे निर्दोषों को प्रताडित करने और झूठी रिपोर्ट बनाने का पाप नहीं करेंगे !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘पांच ज्ञानेंद्रियों, मन और बुद्धि से परे ज्ञान देनेवाला सूक्ष्म कुछ है, यह ज्ञात न होने से विज्ञानवादियों का शोध बच्चों के खेल समान है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम ने रावण को युद्ध में मारा ।उसी रावण के भारत में २-३ स्थानों पर ‘रावण महाराज’ के नाम से मंदिर हैं ! इसलिए हिन्दूओं को कोई सर्वधर्मसमभाव न सिखाए !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘तन, मन, धन एवं अहं का त्याग होने पर तथा ईश्वर के प्रति भाव एवं भक्ति बढने पर ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
‘ईश्वरप्राप्ति आधे समय का काम (पार्ट टाइम जॉब) नहीं है; अपितु पूर्णकालीन साधना है । इसलिए हमारी प्रत्येक कृति हमें भक्तिभाव से करनी चाहिए ।’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले
भारत की स्वतंत्रता से लेकर ७५ वर्ष भारत पर राज्य करनेवाली अभी तक की सरकारों ने नहीं, अपितु संतों ने ही संसार में भारत का मान बनाए रखा है । – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘आजकल पश्चिमी देशों में अधिकांशतः लडने के लिए कोई अपना चाहिए; इसलिए विवाह करते हैं । आगे लडाई-झगडे से ऊब जाने पर संबंध विच्छेद करते हैं । पुनः विवाह करते हैं और पुनः संबंध विच्छेद करते हैं । यह चक्र जारी रहता है । हमारे यहां ऐसी स्थिति न हो, इसके लिए साधना करें !’ … Read more