हनुमानजीको तेल, सिंदूर, मदारके फूल एवं पत्ते इत्यादि अर्पण करनेका महत्त्व

सारिणी


 

१. हनुमानजीको तेल, सिंदूर, मदारके फूल एवं पत्ते इत्यादि क्यों अर्पण करें ?

ऐसा कहते हैं कि, देवताको जो वस्तु भाती है, वही उन्हें पूजामें अर्पण की जाती है । उदाहरणके रूपमें गणपतिको लाल फूल, शिवजीको बेल, विष्णुको तुलसी इत्यादि । वास्तवमें उच्च देवताओंकी रुचि-अरुचि नहीं होती । विशिष्ट वस्तु अर्पण करनेके पीछे अध्यात्मशास्त्रीय कारण होता है । पूजाका उद्देश्य है, मूर्तिमें चैतन्य निर्माण होकर पूजकको उसका लाभ हो । यह चैतन्य निर्माण होनेके लिए विशिष्ट देवताको विशिष्ट वस्तु अर्पित की जाती है, जैसे हनुमानजीको तेल, सिंदूर एवं मदारके फूल तथा पत्ते । इन वस्तुओंमें हनुमानजीके महालोकतकके देवताके सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण, जिन्हें पवित्रक कहते हैं, उन्हें आकृष्ट करनेकी क्षमता होती है । अन्य वस्तुओंमें ये पवित्रक आकृष्ट करनेकी क्षमता अल्प होती है । इसी कारण हनुमानजीको तेल, सिंदूर एवं मदारके पुष्प-पत्र इत्यादि अर्पण करते हैं ।

 

२. हनुमानजीकी पूजामें प्रयुक्त मदारके पत्तेका सूक्ष्म-चित्र

ब्रह्मांड-मंडलसे चैतन्यका प्रवाह पत्तेकी ओर आकृष्ट होता है । इसके कारण मदारके पत्तेमें चैतन्यका वलय निर्माण होता है । इस चैतन्यके वलयद्वारा पत्तेमें चैतन्यके प्रवाह प्रक्षेपित होते हैं । मदारके पत्तेमें हनुमानतत्त्व आकृष्ट करनेकी क्षमता अधिक होती है, इसलिए हनुमानतत्त्व-स्वरूप शक्तिका प्रवाह ब्रह्मांड-मंडलसे मदारके पत्तेमें आकृष्ट होता है । इसके कारण पत्तेमें हनुमानतत्त्व-स्वरूप शक्तिका वलय निर्माण होता है । इस वलयसे कार्यरत शक्तिके वलय निर्माण होते हैं । शक्तिके वलयसे पत्तेके हरितद्रव्य अर्थात chlorophyll में शक्तिके कण संग्रहित होते हैं । पत्तेके डंठलके निकट भागमें डंठलसे प्रवाहित शक्तिका वलय निर्माण होता है । पत्तेकी शिराओंमें शक्ति तरंगें प्रवाहित होती हैं । मदारके पत्तेमें तारक शक्तिके वलय कार्यरत रूपमें घूमते रहते हैं । मदारके पत्तेके चारों ओर हनुमानतत्त्वका कवच निर्माण होता है । इस सूक्ष्म-चित्रद्वारा आपको यह स्पष्ट हुआ होगा कि, मदारके पत्तेकी ओर हनुमानजीकी तत्त्वतरंगें किस प्रकार आकृष्ट होती हैं, एवं किस प्रकार मदारपत्रके माध्यमसे उनका प्रक्षेपण होता है । मदारपत्रद्वारा आकृष्ट चैतन्य, शक्ति आदीका प्रक्षेपण सूक्ष्म स्तरपर अर्थात आध्यात्मिक स्तरकी प्रक्रिया है । इसका परिणाम विविध प्रकारसे होता है । इनमेंसे एक है, वातावरणमें विद्यमान रज-तम प्रधान तत्त्वोंका प्रभाव अल्प होना । मदारपत्रद्वारा प्रक्षेपित पवित्रकोंके कारण वातावरणमें विद्यमान अनिष्ट शक्तियोंको कष्ट होता है । उनकी तमप्रधान काली शक्ति कम होती है, या नष्ट होती है । संक्षेपमें कहा जाए, तो मदारपत्र हनुमानजीकी तत्त्वतरंगोंको प्रक्षेपित कर वातावरणमें विद्यमान अनिष्ट शक्तियोंके साथ एक प्रकारसे युद्ध ही करते हैं । जब अनिष्ट शक्तियोंसे पीडित व्यक्तिका मदारपत्रसे संपर्क होता है, तो उसे कष्ट होने लगता है ।

 

३. अनिष्ट शक्तियोंसे पीडित साधिकापर मदारके पत्तेका परिणाम

पत्तेमें हनुमानतत्त्वसे आकृष्ट चैतन्यका वलय निर्माण होता है । इस वलयसे व्यक्तिकी ओर चैतन्यका प्रवाह प्रक्षेपित होता है एवं उसके देहमें चैतन्यका वलय निर्माण होता है । पत्तेमें हनुमानतत्त्वसे आकृष्ट शक्तिका वलय निर्माण होता है । वातावरणमें शक्तिके वलयोंका प्रक्षेपण होता है । शक्तिके वलयसे शक्तिका प्रवाह पीडित व्यक्तिकी दिशामें प्रक्षेपित होता है । बडी अनिष्टशक्ती नेत्रोंके माध्यमसे काली शक्ति प्रक्षेपित करता है एवं वह पत्तेसे प्रक्षेपित शक्तिके प्रवाहसे लडता रहता है । शक्तिके प्रवाहसे व्यक्तिके देहमें शक्तिके अनेक प्रवाह प्रक्षेपित होते हैं । मारक शक्तिका वलय व्यक्तिके देहमें कार्यरत रूपमें घूमता रहता है एवं उनका अनिष्टशक्तीद्वारा सप्तचक्रोंपर निर्माण किए गए काले शक्तिके स्थानसे युद्ध होता है । सप्तचक्रोंपर शक्तिके वलय निर्माण होते हैं । अनिष्ट शक्तियोंकी पीडाके कारण व्यक्तिके देहके चारों ओर काली शक्तिका घना आवरण रहता है । काले आवरणमें शक्तिके कण संचारित होते हैं एवं शक्तिके कणोंका काले आवरणके साथ युद्ध होता है । व्यक्तिके देहपर बने काला आवरणका विघटन होता है ।

अभी हमने चित्रफीत एवं सूक्ष्म-चित्रद्वारा देखा, अनिष्ट शक्तिपर हुआ मदारपत्रका परिणाम । इससे स्पष्ट होता है कि सनातन संस्कृतिमें बताई गई धार्मिक विधियां, उन विधियोंके अंतर्गत प्रत्येक कृति तथा उनमें प्रयुक्त प्रत्येक घटक, इन सबके पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण है । हनुमानतत्त्वको आकृष्ट करनेकी क्षमता रखनेवाला मदारपत्र मानवको मिला एक वरदान है ।

 

४. हनुमानजीको चढाए जानेवाले मदारके फूल

हनुमानजीकी पूजामें मदारके फूलोंका प्रयोग किया जाता है । फूल चढाते समय फूलोंके डंठल हनुमानजीकी प्रतिमाके ओर होते हैं । कहते हैं, हनुमानजीको मदारके फूल अच्छे लगते हैं; परंतु यह मानसिक स्तरका विश्लेषण हुआ । इसका अध्यात्मशास्त्रीय कारण यह है कि, मदारके फूलोंमें हनुमानजीकी तत्त्वतरंगें अधिक मात्रामें आकृष्ट होती हैं तथा फूलोंसे पवित्रकोंके रूपमें प्रक्षेपित भी होती हैं ।

(संदर्भ – सनातनका ग्रंथ – त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत)