वाहनशुद्धि की पद्धतियां

वाहनशुद्धि की कुछ सरल पद्धतियां

चारपहिया वाहन में नामपट्टियां लगाना

वाहनशुद्धि के लिए उसमें देवताओं की नामपट्टियां निम्नांकित प्रकार से लगाएं ।

१. चालक के आसन के सामने – श्रीकृष्ण

२. चालक के पासवाले आसन के सामने – गणपति

३. चालक के पीछे बाईं ओर की खिडकी के ऊपर – श्रीराम

४. चालक के पीछे दाईं ओर की खिडकी के ऊपर – दत्तात्रेय

५. वाहन के पीछे बाईं ओर – देवी (दुर्गा, अंबादेवी, भवानीदेवी, रेणुकादेवी इत्यादि)

६. वाहन के पीछे मध्य पर – शिव

७. वाहन के पीछे दाईं ओर – हनुमान (मारुति)

 

 

दुपहिया वाहन में नामपट्टियां लगाने की पद्धति

दुपहिया वाहन में सामने ‘गणपति’ और पीछे ’श्रीकृष्ण’ देवता की नामपट्टी लगाएं ।

वाहन के बारे में हमारे मन में क्या विचार रहता है ? वाहन के बारे में हमें लगता है कि यह एक मशीन है । जो पहियों पर चलती है । हम अपने वाहनों की देखभाल करते हैं अथवा हमारा अपने वाहनों के प्रति मोह भी होता है । अर्थात हम मानसिक और बौद्धिक दृष्टि से ही वाहन की ओर देखते हैं । उसे केवल इंधन पर चलनेवाला निर्जीव यंत्र समझते हैं । उनके प्रति हमारा भाव वाहनदेवता, जैसा नहीं रहता और न ही हम उन्हें वाहनदेवता जैसे रखते हैं । यदि हम वाहन को केवल एक यंत्र की भांति न देखकर, उसके प्रति वाहनदेवता का भाव रखेंगे, तो इसका हमें आध्यात्मिक स्तर पर लाभ होगा । वाहन में चैतन्य निर्माण होकर उसके चारों ओर एक वलय समान कवच की निर्मिति होगी और उसकी नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी होगी ।

आजकल सभी के पास छोटे-बडे वाहन हैं, जिनका हम उपयोग करते हैं । प्रत्येक वाहन के प्रति हमें वाहनदेवता का ही भाव रखना चाहिए और वातावरण के कष्टदायक स्पंदनों से रक्षा होने के लिए वाहन की शुद्धि करना और उसके आसपास ईश्‍वर के चैतन्य का संरक्षणकवच निर्माण करना आवश्यक है । जब हम अपने वाहन के प्रति केवल वाहन नहीं, अपितु वाहनदेवता जैसा भाव रखते हैं तब वाहन का ईश्‍वरीयतत्त्व जागृत होता है । इससे हम पर वाहन देवता की कृपा होने से हमें आनंद मिलता है ।

 

कृति के स्तर पर वाहनदेवता का ध्यान कैसे रखें ?

* जिसप्रकार हम वास्तुदेवता के प्रति भाव रखते हुए उसका ध्यान रखते हैं, अपनी वास्तु स्वच्छ रखने का प्रयत्न करते हैं, उसकी शुद्धि करते हैं, वैसा ही भाव हम स्वयं में वाहन देवता के प्रति निर्माण होने के लिए प्रयत्न करेंगे ।

* वाहन का उपयोग संभालकर करना चाहिए । हमें वाहनों के सभी नियमों का कडा अनुपालन करना चाहिए । प्रतिदिन वाहन को अच्छे से स्वच्छ करना चाहिए । वाहन का रख-रखाव, उसका प्रदूषण जांचना (pollution check) इत्यादि समय से होना चाहिए । वाहन से संबंधित कागज-पत्र व्यवस्थित रखने चाहिए । वाहन से संबंधित यह सब गंभीरता से करना आवश्यक है ।

पर यह सब करते हुए, वाहन के प्रति वाहनदेवता का भाव रखते हुए करना हैे । हमारे मन में कृतज्ञता भाव रहना चाहिए । वाहन के कारण हमारा प्रवास सुखमय होता है । वह हमारा भार सहन करती है । वाहन की गति के कारण हमारा अमूल्य समय बचता है । वाहन हमारा श्रम बचाती है, यात्रा के समय मार्ग कैसा भी हो, रास्ते में गढ्ढे हों, रास्ता ऊबड-खाबड हो, रास्ते में गंदगी हो, कीचड हो, रास्ते पर अनेक उतार-चढाव हों, तब भी वाहनदेवता हमें उसका कष्ट नहीं होने देते हैं । हमारी इसप्रकार पग-पग पर सहायता करनेवाले वाहनदेवता के प्रति हमें कितनी कृतज्ञता लगनी चाहिए ।

* अभी हमने स्थूल से वाहनदेवता का ध्यान कैसे रखें ? यह देखा । अब सूक्ष्म स्तर पर वहां भगवान का चैतन्य कार्यरत रहे और उनकी कृपा हम पर सदैव रहे, इसलिए वाहनशुद्धि करना आवश्यक है ।

* वैसे हम जानते ही हैं कि कोई व्यक्ति जब वाहन खरीदता है, तो वह पहले उसे पास के मंदिर में लेकर जाता है । मंदिर में जाकर पंडितजी से वाहन की पूजा करवाता है अथवा कोई उसके सामने नारियल फोडते हैं, तो कोई हार पहनाते हैं । वैसे ही दशहरे पर भी वाहनों की पूजा की जाती है । जिससे उस वाहन को सुरक्षा कवच मिल सके और दुर्घटनाओं से चालक की रक्षा हो ।

यहां हमारे लिए समझने योग्य यह है कि हिन्दू धर्म हमेशा ही हमें प्रत्येक वस्तु में ईश्‍वरीय तत्त्व जागृत करना सिखाता है ।

 

वाहन की शुद्धि  कैसे करें ?

वाहन की केवल एक-दो बार ही पूजा करना पर्याप्त नहीं होता । वाहनदेवता के प्रति कृतज्ञता का भाव रखते हुए वाहन की हमें नियमित शुद्धि करनी चाहिए ।

वाहन की हम अगरबत्ती से अथवा गोमूत्र छिडककर शुद्धि कर सकते हैं जिससे वाहन के नकारात्मक स्पंदन नष्ट होकर उसकी सात्त्विकता बढे । तो आईए हम देखते हैं कि अगरबत्ती और गोमूत्र से वास्तु की शुद्धि कैसे करें ?

अगरबत्ती से शुद्धि करना – प्रतिदिन वाहन के चारों ओर अगरबत्ती से भी शुद्धि करें । अगरबत्ती हाथ में लेकर उसके चारों ओर घूमते हुए अगरबत्ती का धुआं वाहन को दिखाएं ।

गोमूत्र छिडकना – इसके साथ ही वाहन पर गोमूत्र भी छिडकना चाहिए । इससे वाहन की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और वाहन की सात्त्विकता बढने से हमें वाहनदेवता का आशीर्वाद भी मिलता है ।

इसप्रकार प्रतिदिन वाहन की शुद्धि करने से हमें सुरक्षा कवच तो मिलता ही है । इसके साथ ही वाहनदेवता की भी कृपा हम पर होती है । जिससे वाहन में चैतन्य निर्माण होता है ।

आजकल हम देखते हैं कि वाहन चलाते समय ऊंचे स्वर में सिनेमा के गीत लगाए जाते हैं । जिससे वाहन में रज-तम के स्पंदन निर्माण होते हैं; परंतु वाहन में देवी-देवाताओं के नामजप अथवा संतों की आवाज में भजन लगाने से वाहन में सात्त्विक स्पंदन निर्माण होते हैं । इसके साथ ही वाहन के चारों ओर भी नामपट्टियों का सुरक्षाकवच निर्माण करना आवश्यक है ।

 

अंत में कृतज्ञता व्यक्त करें !

वाहनशुद्धि का कार्य पूरा होने पर उपास्यदेवता और वाहनशुद्धि में सहायक हुए उपकरणों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें ।