कालानुसार आवश्यक देवीमांकी उपासना

आजकल चित्र, नाटक, विज्ञापन इत्यादिद्वारा देवी-देवताओंका अनादर किया जा रहा है । इससे धर्महानि होती है । श्री दुर्गादेवी और उनके अन्य रूपोंके अनादरके उदाहरण
 

 

अ. ग्रीस अर्थात यूनानकी `सदर्न कम्फर्ट विस्की’ नामक कंपनीने एक विज्ञापनमें दुर्गादेवीके आठों हाथोंमें विस्कीकी बोतल दर्शायी । हिंदु जनजागृति समितिने भारतमें ग्रीसके राजदूतको निषेध पत्र भेजा । इस विरोधके कारण यह चित्र कंपनीद्वारा हटाया गया ।

 

आ. `बायर’ नामक कंपनीके `सिंग सर सिंग’ नामक मच्छर भगानेकी औषधिके विज्ञापनमें पहले चित्रमें कालीमांको दस हाथोंमें शस्त्रसहित दिखाया । दूसरे चित्रमें देवीके दो हाथ ही शस्त्ररहित दिखाए गए हैं, क्योंकि उनके पास बायर कंपनीकी मच्छर मारनेवाली दवाई है ! इस अपमानकी जानकारी मिलते ही हिंदु जनजागृति समितिने कंपनीको निषेध पत्र भेजकर रोष व्यक्त किया । निषेधकी ओर तत्काल ध्यान देकर कंपनीने क्षमायाचना की ।

कंपनीने समितिको भेजे अपने पत्रमें कहा, हमारे कारण आपको हुई असुविधा एवं कष्टके लिए हम आपकी क्षमा मांगते है । हम हिंदू धर्मका आदर करते है । आपका विश्वसनीय – मार्क क्लाफेन ।

अपनी कल्पनासे देवताओंके इस प्रकारके या व्यंगात्मक चित्र बनाना अनुचित है । व्यंगात्मक चित्र बनानेसे देवताओंका विडंबन होता है ।

मूर्ति शास्त्रानुसार बनाई जाए, तो ही देवताका तत्त्व आकृष्ट होता है । ध्यान रहे, जहां देवताका शब्द अर्थात नाम है, वहां उनकी शक्ति भी होती है । इसलिए ऐसा करना अनुचित है । श्रद्धा, देवताओंकी उपासनाकी नींव है । देवताओंका अनादर श्रद्धाको क्षति पहुंचाता है । इसलिए देवताओंके इस प्रकारके अनादरसे धर्महानि होती है । यह धर्महानि रोकना कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । यह देवताकी समष्टि स्तरकी अर्थात् सामाजिक स्तरकी उपासना ही है । ऐसी घटनाओंको रोकना और इस संदर्भमें अन्योंका मार्गदर्शन करना ईश्वरकी सेवा है । यह साधनाका ही एक अंग है ।

इस विडंबनाको रोकनेके लिए सनातन संस्था एवं हिंदु जनजागृति समिति सन् २ सहस्त्र से विभिन्न माध्यमोंद्वारा जनजागृति अभियान चला रही है । आप इस इस संदर्भमें जागृत रहिए और इस दिशामें प्रयास कीजिए । यह धर्महानि रोकनेके इसके लिए देवीमां हमें बल, बुद्धि एवं क्षात्रवृत्ति अर्थात अन्यायके विरुद्ध प्रतिकार करनेकी क्षमता प्रदान कर साधनामें आनेवाले विघ्नोंका अवश्य हरण करेंगी ।

 

संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘त्यौहार धार्मिक उत्सव एवं व्रत’

Leave a Comment