काल के अनुसार आवश्यक सप्तदेवताओं के नामजप सनातन संस्था के जालस्थल (वेबसाइट) एवं ‘सनातन चैतन्यवाणी’ एप पर उपलब्ध !

परात्पर गुरु डॉ. आठवले

 

‘आज के काल अनुसार कौनसा नामजप करना चाहिए ?, इसका अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से अध्ययन कर महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने विविध नामजप ध्वनिमुद्रित किए हैं । महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ६३ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त संगीत समन्वयक सुश्री (कुमारी) तेजल पात्रीकर (संगीत विशारद) ने परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के मार्गदर्शन में नामजप ध्वनिमुद्रित किए हैं तथा वे सभी के लिए सनातन संस्था का जालस्थल एवं ‘सनातन चैतन्यवाणी’ एप पर उपलब्ध हैं । उनमें सप्तदेवताओं के ‘श्री गणेशाय नमः’, ‘ॐ गं गणपतये नमः’, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’, ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘श्री गुरुदेव दत्त’, ‘श्री हनुमते नमः’, ‘श्री दुर्गादेव्यै नमः’ एवं ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ ये नामजप, साथ ही जिन्हें अपनी कुलदेवता ज्ञात नहीं है, ऐसे लोगों के लिए ‘श्री कुलदेवतायै नमः’ ये नामजप भी सम्मिलित हैं । इन नामजपों का महत्त्व, विशेषताएं, नामजप करने की पद्धति, साथ ही देवता का नामजप अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से उचित होना क्यों आवश्यक है ?, इस विषय में यहां जानकारी दे रहे हैं ।

सुश्री (कुमारी) तेजल अशोक पात्रीकर

 

१. देवता के नामजप का उच्चारण अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से उचित होना आवश्यक क्यों है ?

देवता की विविध उपासनापद्धतियों में से कलियुग की सबसे सरल उपासना है ‘देवता का नामजप करना !’ मन में देवता के प्रति बहुत भाव उत्पन्न होने के उपरांत देवता का नाम कैसे भी लिया, तब भी चलता है; परंतु सर्वसामान्य साधक में इतना भाव नहीं होता । उसके लिए देवता के नामजप से देवता के तत्त्व का अधिक लाभ मिलने हेतु उस नामजप का उच्चारण अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से उचित होना आवश्यक होता है ।

 

२. देवता के नामजप का महत्त्व

भावपूर्ण और लगन के किए गए नामजप के कारण व्यक्ति को हो रहे अनिष्ट शक्तियों के कष्ट का निवारण हो सकता है; परंतु यह बात कई लोगों को ज्ञात न होने से वे अनिष्ट शक्तियों के निवारण हेतु तांत्रिकों के पास जाते हैं । तांत्रिक द्वारा किए जानेवाले उपाय तात्कालिक होते हैं । कुछ समय पश्चात अनिष्ट शक्तियां उस व्यक्ति को पुनः कष्ट देना आरंभ करती हैं, साथ ही तांत्रिकों से धोखाधडी किए जाने की भी संभावना होती है । इसलिए अनिष्ट शक्तियों के कष्ट पर विजय प्राप्त करने के लिए नामजप उपयुक्त है ।

 

३. सनातन-निर्मित ‘सप्तदेवताओं के नामजपों’ का महत्त्व

३ अ. काल के अनुसार नामजपों की निर्मिति

कोई भी कार्य काल के अनुसार किया, तो उससे अधिक लाभ मिलता है । ‘आज के समय में काल के अनुसार देवताओं का तत्त्व नामजपों से किस प्रकार से अधिकाधिक मिल सकता है ?’, इसका अध्यात्मशास्त्र की दृष्टि से अध्ययन कर इन नामजपों का ध्वनिमुद्रण किया गया है । इसके लिए सुश्री (कुमारी) तेजल पात्रीकर ने परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के मार्गदर्शन में कई प्रयोग किए । उनसे ये नामजप तैयार हुए हैं । इससे नामजप करनेवाले व्यक्ति को उसके भाव के अनुसार संबंधित देवता का काल के अनुसार तत्त्व मिलने में सहायता मिलेगी ।

३ आ. काल के अनुसार बढते जा रहे अनिष्ट शक्तियों के कष्टों पर विजय प्राप्त करने हेतु उपयुक्त नामजप

वर्ष २०२५ में सात्त्विक और आदर्श ‘हिन्दू राष्ट्र’ की (ईश्वरीय राज्य की) स्थापना होनेवाली है । ‘वह न हो’, इसके लिए वातावरण में विद्यमान अनिष्ट शक्तियां अपने संपूर्ण बल का उपयोग कर विरोध कर रहे हैं । उसके परिणामस्वरूप साधकों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों में बहुत वृद्धि हो रही है । ये नामजप काल के अनुसार परिणामकारक होने से तीव्र आध्यात्मिक कष्टवाले व्यक्तियों को इन नामजपों का आध्यात्मिक स्तर के उपचारों की दृष्टि से अच्छा लाभ मिल सकता है ।

३ इ. आत्यंतिक बीमार व्यक्ति और वास्तुशुद्धि के लिए भी नामजप लाभदायक

आत्यंतिक बीमार व्यक्तियों को स्वयं नामजप करना संभव न हो, तो उन्हें इन नामजपों को केवल सुनने से भी लाभ मिलेगा । आज के समय में अनिष्ट शक्तियों के बढते हुए आक्रमणों के कारण वास्तु भी प्रभावित होकर वह रज-तम से दूषित बनती है । दिनभर घर में नामजप चलाते रहने से वास्तुशुद्धि होकर घर का वातावरण भी प्रसन्न होने में सहायता मिलेगी ।

३ ई. जिन्हें उनकी कुलदेवता ज्ञात नहीं है, ऐसे लोगों के लिए कुलदेवता का ‘श्री कुलदेवतायै नमः’ नामजप उपलब्ध !

कुलदेवता कुल की माता होती है । साधक की साधना का आरंभ कुलदेवता की उपासना से होता है । उसकी उपासना से ही साधक साधना करते-करते श्री गुरुतक पहुंच सकता है । सनातन संस्था में साधक को आरंभ में उसके कुलदेवता का नामजप करने की साधना बताई जाती है । आजकल कई लोगों को उनकी कुलदेवता ज्ञात नहीं होती है अथवा उसे बतानेवाले कुल में कोई उपलब्ध नहीं होते । ऐसे समय में उनके सामने ‘अब क्या करें ?’, यह प्रश्न उठ सकता है । अतः जिन्हें कुलदेवता ज्ञात नहीं है, उनके लिए ‘श्री कुलदेवतायै नमः’ नामजप उपलब्ध किया गया है ।

३ उ. इन नामजपों के लिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का संकल्प

‘संपूर्ण विश्वभर के साधकों के आध्यात्मिक कष्ट शीघ्र दूर हों, साथ ही उन्हें देवताओं के तत्त्व का अधिकाधिक लाभ मिले’, इसके लिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने काल के अनुसार नामजपों की निर्मिति करवा ली है । इसमें अप्रत्यक्ष रूप से उनका संकल्प ही कार्यरत होने से साधकों ने उसके अनुसार नामजप किया, तो उससे उनके कष्ट दूर होने में, साथ ही उन्होंने देवताओं के तत्त्व का लाभ मिलने में निश्चितरूप से सहायता मिलेगी ।

 

४. नामजप सुनने की अथवा करने की पद्धति

अ. उक्त उल्लेखित सप्तदेवताओं के नामजप आरंभ में प्रत्येक नामजप आधा घंटा सुनना अथवा करना चाहिए । आध्यात्मिक कष्ट से पीडित साधकों को इन नामजपों में से जो भी नामजप सुनते समय अधिक कष्ट प्रतीत हो, वह नामजप आध्यात्मिक स्तर के उपचार के रूप में उपचारों के समय सुनें अथवा करें ।

आ. जिन्हें आध्यात्मिक कष्ट नहीं हैं, वे इन नामजपों में से जिस नामजप को सुनते समय उन्हें अधिक अच्छा प्रतीत होता हो, वे साधना के रूप में उस नामजप को सुनें अथवा करें ।

 

५. नामजप करने की गति और २ जपों में अंतराल

नामजप करते समय ‘प्रत्येक शब्द का उच्चारण कैसे करना चाहिए ?, उसकी अवधि कितनी होनी चाहिए ?, साथ ही उसे बोलने की पद्धति कैसी होनी चाहिए ?, इस दृष्टि से और भाव के साथ बोले जानेवाले ये नामजप परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के मार्गदर्शन में ध्वनिमुद्रित किए गए हैं । ये नामजप प्रातिनिधिक है । व्यक्तियों के अनुरूप नामजप करने की गति और २ जपों में का अंतराल बदल सकता है ।

५ अ. नामजप बोलने की गति

मनुष्य की प्रकृति के अनुसार उसकी नामजप बोलने की गति होती है । हमारे द्वारा निर्मित सभी नामजप मध्यम गति के हैं । जिन्हें तीव्र गति से नामजप बोलना है, वे नामजप गति से बोलें; परंतु नामजप बोलने की पद्धति न बदलें । ‘जितने व्यक्ति, उतनी प्रकृतियां और उतने ही साधनामार्ग’, यह साधना का सिद्धांत होने से जिस गति से नामजप करने पर अधिक मात्रा में भाव जागृत होता है, उस गति से नामजप करना चाहिए ।

५ आ. दो नामजपों के बीच का अंतराल

‘एक नामजप के उपारांत वही नामजप सुनने से पूर्व मध्य में कितना अंतराल होना चाहिए ?’, इस विषय में मार्गदर्शन करते समय परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने बताया, ‘‘व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार दो नामजपों के बीच का अंतराल अल्पाधिक हो सकता है । इसलिए हम अपनी सुविधा के अनुसार ये नामजप बोलते समय इस अंतराल को बदल सकते हैं ।’’ ध्वनिमुद्रित किए गए इन नामजपों में सर्वसामान्य अंतराल रखा गया है ।

सनातन संस्था में इस प्रकार से सूक्ष्म की ओर ले जानेवाला अध्ययन करना सिखाया जाता है । उसके कारण ही अन्य संप्रदायों के साधकों की तुलना में सनातन के साधकों की प्रगति तीव्र गति से हो रही है । ’

– सुश्री (कुमारी) तेजल पात्रीकर (संगीत विशारद), संगीत समन्वयक, महर्षि अध्यात्म विश्यविद्यालय, गोवा. (२२.१२.२०२१)

१. नामजप सुनने के लिए सनातन के जालस्थल की लिंक : https://www.sanatan.org/hindi/audio-gallery

२. ‘सनातन चैतन्यवाणी’ एप डाउनलोड करने के लिए देखें ! : https://www.sanatan.org/Chaitanyavani

 ‘ये सभी नामजप सुनकर क्या प्रतीत होता है ?’, इसका अध्ययन कीजिए और आपको कुछ विशेषतापूर्ण अनुभूतियां हुई हों, तो हमें [email protected] इस ई-मेल पते पर अथवा जिनके पास ई-मेल की सुविधा नहीं है, वे निम्नांकित पते पर अवश्य सूचित करें ।

डाक पता

श्रीमती भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पीन – ४०३ ४०१’

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