भ्रष्टाचार प्रतिबंधित करने के लिए हिन्दु राष्ट्र की स्थापना करना ही एकमात्र समाधान ! – श्रीराम काणे, सनातन संस्था

देश में लोकसंख्या अधिनियम पारित करना
आवश्यक ! – विनोद यादव, अध्यक्ष, धर्मरक्षक संगठन

सभा के लिए संबोधित करते हुए भूतपूर्व विधायक श्री. सुरेंद्रनाथसिंह, व्यासपीठ पर दाएं से श्री. गबरूदादाजी, श्री. अभय पंडित, नगरसेवक महेश मकवाना, मर्घटिया मंदिर के महंत श्री. शंकरदासजी, महापौर श्री. आलोश शर्मा, श्री. अशोक सैनी, श्री. योगेश वनमारे तथा श्री. श्रीराम काणे

भोपाळ – धर्मरक्षक संगठन द्वारा यहां ‘भगवा शौर्य पदयात्रा’ आयोजित की गई थी । उस पदयात्रा से पूर्व इस धर्मसभा का आयोजन किया गया था । उस समय धर्मरक्षक संगठन के नेता श्री. विनोद यादव वक्तव्य कर रहे थे । अपने वक्तव्य में उन्होंने यह प्रतिपादित किया कि, ‘वर्ष १९४७ में भारत का धर्म पर आधारित विभाजन किया गया था । उस समय मुसलमानों के लिए पाकिस्तान की निर्मिती हुई, तो शेष देश हिन्दुओं का होना आवश्यक था; किंतु ऐसा नहीं हुआ । हम रामनवमी, हनुमान जयंति के निमित्त शोभायात्रा आयोजित करते हैं । कदाचित आगामी १०-१५ वर्षों में शोभायात्रा आयोजित करना असंभव रहेगा; क्योकि उस समय तक अनेक स्थानों पर हम अल्पसंख्यक रहेंगे । इस परिस्थिती में परिवर्तन लाने के लिए लोकसंख्या अधिनियम कडी मात्रा में पारित करना आवश्यक है । उसके लिए हम सभी को जातपात का विस्मरण कर
सरकार पर दबाव निर्माण करना चाहिए ।’ इस सभा के लिए २ सहस्त्रों से अधिक धर्मप्रेमी युवक उपस्थित थे । इस सभा के लिए भूतपूर्व विधायक श्री. सुरेंद्रनाथ सिंह, भोपाळ के महापौर आलोश शर्मा, भाजपा नेता श्री. अशोक सैनी, मर्घटिया मंदिर के महंत श्री. शंकरदासजी, नगरसेवक श्री. महेश मकवाना, श्री. अभय पंडित तथा श्री. गबरूदादाजी, हिन्दू जनजागृति समिति के मध्यप्रदेश समन्वयक श्री. योगेश वनमारे तथा सनातन संस्था के श्री. श्रीराम काणे इत्यादि उपस्थिती थे ।

भ्रष्टाचार प्रतिबंधित करने के लिए हिन्दु राष्ट्र की स्थापना
करना ही एकमात्र समाधान ! – श्रीराम काणे, सनातन संस्था

वर्तमान परिस्थिती में यह बात स्पष्ट हुई है कि, ‘आज जनतंत्रवाले भारत का प्रत्येक क्षेत्र भ्रष्टाचार से पीडित है । यह भ्रष्टाचार इतना बढ गया है कि, उसने भारत को पूरी तरह से घेर रखा है । अतः भ्रष्टाचार प्रतिबंधित करने हेतु जनतंत्र पूरीतरह से असफल सिद्ध हुआ है । इस दुःपरिस्थिती पर हिन्दु राष्ट्र की स्थापना करना, ही एकमात्र समाधान है ।

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात