विवाहपत्रिका आजकल प्रतिष्ठा का विषय बन गया है । अनेक पृष्ठों की, सुगंधित, मंहगी पत्रिकाओं को छापने की ओर समाज का झुकाव बढ गया है । ‘विवाह’ एक धार्मिक विधि होने से विवाहपत्रिका सात्त्विक हो और उससे धर्मप्रसार हो, इसके लिए प्रयास करना चाहिए । इस दृष्टि से विवाहपत्रिका के विविध घटक कैसे हाेने चाहिए, इसका विवेचन आगे किया है ।
१. सात्त्विक चित्र और कलाकृति (डिजाइन) का उपयोग
अ. विवाहपत्रिका में छापने हेतु देवी-देवताओं के विडंबनात्मक चित्र (उदाहरणार्थ, श्री गणेश का केवल मुख, पत्तों पर चित्रित किया हुआ, फेटा बांधे हुए आदि) का उपयोग ना करें । देवी-देवताओं के सात्त्विक चित्रों का (उदाहरणार्थ, मूर्तिशास्त्रानुसार बनाई हुई पूर्णाकृति श्री गणेशमूर्ति) उपयोग करें ।

चित्र २. श्री गणेशजी के शास्त्रानुसार चित्र का उपयोग करनेवाली सात्त्विक विवाहपत्रिका
आ. पत्रिका में लेखन की संरचना करते समय शुभचिन्हों का (उदा. स्वस्तिक, ॐ, कलश, गोपद्म, कमल) उपयोग करें !
सात्त्विक विवाहपत्रिका के नमूने





लिफाफे का नमूना

२. लेखन
अ. विवाहपत्रिका का लेखन मातृभाषा में प्रकाशित करें । मातृभाषा का लेखन सभी सगे-संबंधियों को समझ में न आता हो तो उसे राष्ट्रीय भाषा में प्रकाशित करें; परंतु वह अंग्रेजी में न हों ।
आ. विवाहपत्रिका के लेखन का व्याकरण शुद्ध होना चाहिए, इसके साथ ही लेखन में विदेशी भाषाओं के शब्दों का उपयोग भी टालें ।
इ. अक्षरों का आकार गोलाकार हों और अक्षर प्रभावीरूप से दिखाई दें; अक्षर बहुत बडे न हों । इसके साथ ही अक्षर टेढे न बनाएं ।
ई. निमंत्रण का मैटर/मजकूर सादा हों; परंतु गुरु एवं ईश्वर के प्रति भाव व्यक्त करनेवाला होना चाहिए, उदाहरणार्थ ‘हमारे कुलदेवता श्री भवानीदेवी की कृपा से ….’, ‘श्री गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी की कृपा से…’, इसप्रकार निमंत्रण का आरंभ हाेना चाहिए ।
३. विवाहपत्रिका पर छापने के लिए कुछ सुवचन
अ. वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।।
आ. बांधकर बंधन सात जन्मों का,
साथ निभाने सात फेरों का,
सदा मिले सान्निध्य गुरुचरणों का,
मिलकर करें संकल्प गुरुकार्य का ।
इ. हिन्दुओं, ध्यान रखे, विवाह ‘सामाजिक समारोह’ नहीं, अपितु एक ‘धार्मिक विधि’ है !
ई. धर्मसूर्य के सामने नतमस्तक होकर, मार्गक्रमण करेंगे संसार पथ ।
राष्ट्र-धर्म कार्य का व्रत लेकर, देखेंगे ‘हिन्दू राष्ट्र’ की प्रभात ।।
उ. ‘जो धर्म का कठोरता से पालन करता है, उसकी रक्षा धर्म (ईश्वर) करता है !’ – महाभारत ३.३१३.१२८
ऊ. गुरुकृपा से संबंध बना पति-पत्नी का ।
धर्मकार्य बढाने आशीर्वाद हो श्री गुरु का ।।
ए. नाम घेता मुखी त्यांचे । ओढी गाडे संसाराचे ।। – प.पू. भक्तराज महाराज (अर्थात, मुख से भगवान / गुरु का नामस्मरण करते हुए संसार रूपीय गाडी को आगे लेकर जाना है ।)
४. विवाहपत्रिका पर छापने के लिए राष्ट्र एवं धर्म विषयक लेखन
अ. आचारधर्म का पालन करें और जीवन आनंदी बनाएं !
१. पुरुष भ्रूमध्य (आज्ञाचक्र) पर खडा तिलक लगाएं और स्त्रियां अनामिका से (छोटी उंगली के पास की उंगली से) गोल कुमकुम लगाएं ।
२. अन्न ग्रहण करने से पहले भगवान से प्रार्थना करें ।
३. शाम को भगवान के आगे दीप जलाएं और वास्तु में सर्वत्र धूप अथवा उदबत्ती दिखाएं ।
४. स्वयं के चारों ओर भगवान की नामपट्टियों का मंडल रखें और भगवान से प्रार्थना कर पूर्व-पश्चिम दिशा में सोएं ।
(अधिक विवेचन के लिए पढें – सनातन की ‘आचारधर्मविषयक ग्रंथमाला’)
आ. हिन्दू संस्कृतिनुसार आचरण ही धर्माचरण !
१. विवाहसमारोह, शिलान्सास समारोह, दीपप्रज्वलन जैसे प्रसंगों में जूते-चप्पल न पहनें !
२. मंदिर एवं वहां के परिसर में फिल्मीगीत लगाकर अथवा धूम्रपान कर वहां की पवित्रता नष्ट न करें !
३. सैर-सपाटे के रूप में नहीं, अपितु भक्तिभाव से तीर्थस्थलों को भेट दें !
४. अपने से बडों को नमस्कार करते समय सिर थोडा नीचे झुकाकर विनम्रता से प्रणाम करें !
५. जन्मदिन की शुभकामनाएं रात १२ बजे नहीं, अपितु सूर्योदय होने के पश्चात दें !
६. सम्मान करते समय पुष्पगुच्छ नहीं, अपितु फूल दें अथवा हार पहनाएं !
७. उद्घाटन फीता (ribbon) काटकर नहीं, अपितु नारियल चढाकर करें !
८. दीपप्रज्वलन तमोगुणी मोमबत्ती से नहीं, अपितु सात्त्विक तेल के दीप से (सकर्ण दीप से) करें !
इ. हस्तांदोलन (शेक हैंड) नहीं, नमस्कार करें !
१. पश्चिमी संस्कृति का विरोध करें ! स्वागत हस्तांदोलन से न करें !
हस्तांदोलन के कारण होनेवाली हानि : हस्तांदोलन के माध्यम से छोटे-बडे संसर्गजन्य रोगों का प्रसार हो सकता है । एक-दूसरे को अनिष्ट शक्तियों का कष्ट हो सकता है ।
२. हिन्दू संस्कृति का पालन करें ! स्वागत हाथ जोडकर नमस्कार से करें !
नमस्कार के कारण होनेवाले लाभ : नमस्कार करते समय मन में सामनेवाले व्यक्ति के प्रति आदरभाव निर्माण होता है । नमस्कार की मुद्रा से सात्त्विकता मिलती है ।
हिन्दुओ, पश्चिमी संस्कृति तामसिक (कष्टदायक) है, जबकि हिन्दू संस्कृति सात्त्विक है; इसलिए महान हिन्दू संस्कृति पर गर्व करें !
ई. पश्चिमी संस्कृति के अधीन होकर महान हिन्दू संस्कृति को न भूलें !
१. दिनांक लिखते समय ईसाई कालगणना का नहीं, अपितु हिन्दू कालगणना का उपयोग करें !
२. बोलते समय अंग्रेजी भाषा का नहीं, अपितु मातृभाषा का अथवा राष्ट्रभाषा का उपयोग करें, उदाहरण, मां-पिताजी को ‘मॉम-डैड’ न कहते हुए ‘मां-पिताजी’ कहें !
३. शिष्टाचार (मैनर्स) के रूप में अन्न थाली में न छोडें, अपितु ‘अन्न भगवान का प्रसाद है’, ऐसा भाव रखकर उसे पूरा ग्रहण करें !
४. संध्या दीप-बाती के समय मनोरंजन के लिए टेलीवीजन देखने में न रममाण हो जाएं, अपितु भगवान के सामने दीप जलाकर आरती, श्लोकपठण और नामजप करें !
(शास्त्रीय विवेचन के लिए अवश्य पढें : सनातन की ‘आचारधर्म’संबंधी ग्रंथमाला)
उ. धर्मशिक्षा लें, धर्माचरणी बनें; जीवन सार्थक करें !
१. घर में पूजाघर न हो, तो पूजाघर बनाकर उसे पूर्व-पश्चिम दिशा में रखें !
२. पूजाघर में श्री गणेश की मूर्ति / चित्र मध्यभाग में, श्री गणेशजी के दाईं ओर पुरुषदेवता और बाएं स्त्रीदेवता की मूर्ति अथवा प्रतिमा (चित्र) रखें !
३. जीवन आनंदी हो, इसलिए कुलदेवता का नामजप प्रतिदिन न्यूनतम (कम से कम) एक घंटा से लेकर अधिकाधिक निरंतर करें !
४. गणेश चतुर्थी, नवरात्रि इत्यादि कुलाचार कर रहे हों, तो उनका यथोचित पालन करें !
५. अपने कुलदेवता के दर्शन के लिए वर्ष में कम से कम एक बार तो जाएं !
६. प्रतिदिन अपने परिसर के मंदिर में जाकर देवता के दर्शन लें !
७. अतृप्त पूर्वजों के कष्टों से रक्षा होने हेतु प्रतिदिन भगवान दत्त का नामजप कष्ट की तीव्रतानुसार न्यूनतम २ से अधिकाधिक ६ घंटे करें !
संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘अध्यात्म का प्रास्ताविक विवेचन’
ऊ. स्वयं को ‘हिन्दू’ कहते हो, तो यह अवश्य करें !
१. धर्माचरण : प्रतिदिन तिलक लगाएं ! कुलाचार का पालन करें ! मंदिर स्वच्छ रखें !
२. धर्मरक्षा : देवताओं का अनादर करनेवाले कार्यक्रमों का बहिष्कार करें !
३. धर्मबंधुत्व को संजोना : संकट के समय हिन्दुओं की आर्थिक सहायता करें और आश्रय दें !
४. संस्कृतिरक्षा : ‘वैलेंटाईन डे’ जैसी पश्चिमी ‘डे’ प्रथाओं का विरोध करें ! जीन्स, टी-शर्ट, शेरवानी जैसी विदेशी वेशभूषा न करते हुए हिन्दू धर्मानुसार धोती-कुर्ता, साडी परिधान करें !
५. राष्ट्रप्रेमवृद्धि : राष्ट्रपुरुष एवं क्रांतिकारियों के स्मृतिदिन मनाएं !
६. स्वभाषारक्षा : जहां तक संभव हो अंग्रेजी में वार्तालाप टालें ! हस्ताक्षर अपनी भाषा में करें !
७. धर्म के लिए त्याग : धर्मकार्य के लिए प्रतिदिन १ घंटा तो दें और अपनी उत्पन्न का कुछ भाग नियमितरूप से धर्म के लिए दान करें !
८. धर्माभिमान : ‘मैं ‘हिन्दू’ हूं, ऐसा कहने में लजाएं नहीं !’ – वीर सावरकर
ए. हिन्दुओ, राष्ट्राभिमानी बनने के लिए यह करें और अपनी संतान से भी यह करवाएं !
१. देशभक्ति पर गीत / शौर्यगीत सुनें, साथ ही क्रांतिकारियों का चरित्र पढेें !
२. क्रांतिकारियों और राष्ट्रपुरुष के जन्मस्थल, स्मारक, इसके साथ ही ऐतिहासिक गढ (दुर्ग), जलदुर्ग एवं संग्रहालय देखने जाएं !
३. राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रीय प्रतीकों का मान रखें !
४. क्रांतिकारियों के चरित्र का वर्णन करनेवाले व्याख्यान, कथाकथन स्पर्धा, इसके साथ ही देशभक्ति पर चलचित्र (फिल्म) का आयोजन करें !
ऐ. राष्ट्र एवं धर्म के लिए प्रतिदिन कमसेकम १ घंटा दें !
१. चित्र, नाटक, विज्ञापन इत्यादि के माध्यम से होनेवाला देवी-देवताओं का अनादर रोकें !
२. राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रपुरुषों का होनेवाला अनादर रोकें !
३. जीवन को सार्थक करने के लिए धर्माचरण करें !
४. प्रतिदिन स्त्रियां गोल कुमकुम और पुरुष खडा तिलक लगाएं !
५. कुलाचार का पालन करें और प्रतिदिन कुलदेवता का नामजप करें !
ओ. हिन्दुओं, हिन्दूएकता ही राष्ट्र को एकजुट रखेगी !
१. विद्यालय के संचालक अथवा प्राचार्य, अधिवक्ता (वकील), व्यापारी, उद्योजक जैसे व्यक्ति अपने अधिकारक्षेत्र में प्रधानता से हिन्दुबंधुओं का हित देखते हुए कृतिशील हों ।
२. किसी भी वस्तु की खरीदते समय, अथवा व्यवहार करते समय हिन्दूहित को प्रधानता दें ।
३. देश में एवं जगत में कहीं पर भी हिन्दुओं पर अन्याय हो, तो उन हिन्दुओं को समर्थन दर्शाने के लिए तालुका अथवा जिला स्तर पर निषेध सभा / आंदोलन / मोर्चा जैसी कृतियां करें ।
४. अन्यायग्रस्त हिन्दुओं को शीघ्र से शीघ्र न्याय देने की, साथ ही उन्हें हुई हानि की भरपाई देने की मांग प्रशासन से करें । ऐसे हिन्दुओं को न्यायालयीन लडाई के लिए भी सहायता करें ।
५. आपद्ग्रस्त अथवा दंगेग्रस्त हिन्दुओं को वस्तु अथवा आर्थिक स्वरूप में सहायता करें ।
औ. हिन्दूसंगठन के लिए धर्मबंधुत्व संजोएं !
१. दंगे, बाढ इत्यादि के समय निराश्रित हुए हिन्दुओं की आर्थिक सहायता करें, तथा उन्हें आश्रय दें !
२. धर्मांतर के चंगुल में फंसे हिन्दुओं का प्रबोधन कर उन्हें धर्मांतर से परावृत्त करें !
३. एक हिन्दू पर अन्याय होने पर उसे न्याय मिलने के लिए सरकार से अनुवर्ती प्रयास करें !
४. अपने धर्मबंधुओं पर समाजकंटकों द्वारा आक्रमण होने पर उनकी सुरक्षा के लिए आगे आएं !
अं. हिन्दुत्व का ध्वज फहराने का संकल्प करेंगे !
१. धर्मशिक्षा लेकर स्वयं में धर्मनिष्ठा जागृत करें !
२. व्यवहार में अंग्रेजी भाषा नहीं, अपितु मातृभाषा / हिन्दी का उपयोग करें !
३. राष्ट्रपुरुषों के बलिदान का स्मरण कर, खरे राष्ट्रभक्त बनें !
४. विदेशी कंपनियों की नहीं; स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें !
५. पश्चिमी प्रथा नहीं; हिन्दू संस्कृति का आचरण करें !
क. राष्ट्र एवं धर्म हित साधनेवाले प्रत्याशी को ही मत दें !
संतों का कहना है कि, वर्तमान में ‘हिन्दुओं की धर्मशक्ति मतों के माध्यम से प्रकट होनी आवश्यक है’ । हिन्दुओं , संतवचनानुसार अपना मत राष्ट्रनिष्ठ एवं धर्मनिष्ठ प्रत्याशी को देकर अपना कर्तव्य निभाएं !
इन्हें अपना मत न दें !
१. भ्रष्टाचारी, गुंडे एवं पक्ष बदलनेवाले
२. मतों के लिए विविध प्रलोभन देनेवाले
३. देशद्रोहियों की चापलूसी / तुष्टीकरण करनेवाले
४. हिन्दू धर्मविरोधी कानून बनानेवाले और धर्म, देवता, संत आदि का द्वेष करनेवाले
५. स्विस बैंक में पैसे छिपानेवाले एवं आतंकवाद का भस्मासुर न रोकनेवाले
इन्हें अपना मत दें !
१. प्रामाणिकता से कर भरनेवाले और नीतिमान
२. सर्व आश्वासनों की पूर्ति करनेवाले
३. हिन्दूहित के प्रश्नों को प्रधानता देनेवाले
४. हिन्दू धर्म, देवी-देवता, संत आदि का अनादर न हो, इसके लिए सतर्क रहनेवाले
५. अपने आचरण से जनता को स्वअनुशासन, त्याग एवं राष्ट्राभिमान सिखानेवाले प्रत्याशी कौनसे पक्ष के हैं, यह न देखते हुए केवल ‘हिन्दुत्व’ एवं ‘राष्ट्रहित’ के लिए प्रत्यनशील कर्महिन्दुओं को ही चुनाव में विजयी बनाएं !
ख. हिन्दुओ, स्वभाषा एवं स्वधर्म का अभिमान संजोएं !
१. एक-दूसरे से मिलते समय पश्चिमी पद्धतिनुसार हस्तांदोलन (शेकहैंड) न करते हुए हिन्दू धर्मानुसार हाथ जोडकर नमस्कार करें !
२. प्रतिदिन स्त्रियां बिंदी के स्थान पर गोल कुमकुम और पुरुष कुमकुम का खडा तिलक लगाकर ही घर के बाहर निकलें !
३. हिन्दू संस्कृतिनुसार पुरुष कुर्ता-पायजमा / धोती और महिलाएं साडी, ऐसे सात्त्विक कपडे परिधान करें !
४. बडों को नमस्कार करते समय सिर थोडा नीचे झुकाकर विनम्रभाव से नमस्कार करें !
५. दूरभाष पर / भ्रमणभाष पर `हैलो’ न कहते हुए `नमस्कार’ अथवा `जय श्रीराम’ बोलें !
६. जन्मदिन पश्चिमी पद्धतिनुसार केक काटकर और मोमबत्तियां बुझाकर नहीं, अपितु हिन्दू संस्कृतिनुसार जन्मतिथि पर आरती उतारकर मनाएं !
७. दैनंदिन व्यवहार करते समय मातृभाषा / हिन्दी भाषा का उपयोग करें, मातृभाषा / हिन्दी बोलते समय अंग्रेजी शब्दों का उपयोग टालें और अपने हस्ताक्षर मातृभाषा / हिन्दी में ही करें !
हिन्दुओं, करोडों वर्षों की चैतन्यमय हिन्दू संस्कृति का संवर्धन कर्तव्यभावना से करें !
ग. मातृभाषा पर गर्व करें !
१. ‘हैलो’ न कहते हुए ‘नमस्कार’ कहें !
२. ‘शुभकामनाएं’ एवं ‘बधाइयां’ मातृभाषा में दें !
३. ‘थैंक्यू’ न कहते हुए ‘धन्यवाद’ कहें !
४. हस्ताक्षर अंग्रेजी में न करते हुए मातृभाषा में करें !
५. अपने बच्चों को मातृभाषा / हिन्दी माध्यमिक पाठशाला में पढाएं !
(सविस्तर शास्त्रीय विवेचन के लिए पढें – सनातन की ‘भाषाविषयक ग्रंथमाला’ !)
घ. भेंटवस्तु लेना और देना !
भेंट देते समय और लेते समय ध्यान रखने योग्य दृष्टिकोण
१. व्यावहारिक वस्तुओं की भेंट देने से स्विकारनेवाले व्यक्ति में आसक्ति निर्माण होती है । इसके विपरीत आध्यात्मिक ग्रंथ एवं दृश्यश्रव्य-चक्रिका (ऑडियो सीडी) समान भेंट देने से व्यक्ति धर्माचरण के लिए प्रवृत्त होता है ।
२. भेंट लेनेवाला ऐसा भाव रखे कि भेट ईश्वर से मिला हुआ वस्तुरूपी अथवा धनरूपी प्रसाद है ।
संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘सोलह संस्कार’
च. विवाह आचारसंहिता
वधु-वर की वेशभूषा कैसी होनी चाहिए ?
१. वधु : नौ गज की साडी पहने । नौ गज की साडी पहनना संभव न हो, तो छः गज की साडी पहने । लाल, केसरी, नीली, पीली, गुलाबी जैसे सात्त्विक रंगों की सूती अथवा रेशमी साडी परिधान करें ।
२. वर : वर कृत्रिम धागों से सिले शर्ट-पैंट, कोट-टाई जैसे कपडे न पहनें, अपितु प्राकृतिक धागों से बने हुए सूती अथवा रेशमी धोती और उपरण अथवा कुर्ता-पायजामा पहने ।
विवाहभोजन कैसा होना चाहिए ?
१. अत्यंत तेलयुक्त, मिर्च-मसालेदार ऐसे तामसिक पदार्थों की तुलना में दाल-चावल-घी, कचूमर, लड्डू आदि सात्त्विक पदार्थ भोजन में होने चाहिए ।
२. चायनीज जैसे फास्टफूड; पानीपुरी-भेलपुरी, ब्रेड जैसे पदार्थ; मांसाहारी पदार्थ; कृत्रिम शीतलपेय जैसे तामसिक अन्न टालें ।
३. पश्चिमी प्रथा दर्शानेवाली ‘बुफे’ पद्धति नहीं, अपितु पारंपरिक भारतीय भोजन पद्धति अपनाएं !
छ. विवाह के अवसर पर अशास्त्रीय एवं अनिष्ट कृति टालकर विवाहविधि की पवित्रता संजोएं !
१. विवाहविधि के स्थल पर जूते-चप्पलें पहनकर न जाएं !
२. मंगलाष्टक फिल्मीगीतों की धुनों पर न बोलें !
३. वधु-वर एकदूसरे को हार डालते समय उन्हें उठाएं नहीं !
४. अक्षत वधु-वर पर न फेंकते हुए उनके निकट जाकर सिर पर डालें !
५. ‘बैंड’ अथवा पटाखे न बजाएं, अपितु सात्त्विक शहनाई-ढोल बजाएं !
६. ‘वर की चप्पलें ले जाना और उसकी भरपाई मांगना’ यह कुप्रथा टालें !
ईश्वरप्राप्ति हेतु विवाहविधि अध्यात्मशास्त्र के अनुरूप ही करें !
विवाह निश्चित करते समय वधु-वर की जन्मकुंडली मिलाने का महत्त्व
विवाह विधिमें ऐसी अनिष्ट प्रथाओंका निषेध करें !
वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए ?
धार्मिक विधियोंमें पति एवं पत्नीद्वारा करने योग्य कृत्य
विवाहांतर्गत अन्य विधियां