
हिंगलाजमाता मंदिर ५१ शक्तिपीठों में से एक हैं और पाकिस्तान में है । इस स्थान पर सती का ब्रह्मरंध्र (सिर) गिरा था । वह बलुचिस्तान की लारी तालुका की एक घनी घाटी में हैं । हिंगोल नदी के तट पर और मकरान मरुस्थल की खेरथार पहाडियों में बसा श्री हिंगलाजमाता मंदिर करोडों हिन्दुओं का श्रद्धास्थान है ।
श्री हिंगलाजमाता की स्वयंभू शिला
श्री हिंगलाजमाता मंदिर एक प्राकृतिक गुफा में है । मंदिर में एक मिट्टी की वेदी है । इस मंदिर में देवी की मूर्ति नहीं, अपितु स्वयंभू शिला है । यह शिला सिंदूर से आच्छादित है । उसे संस्कृत में ‘हिंगुला’ कहते हैं । संभवत: उसीसे कदाचित् श्री हिंगलाजमाता नाम मिला होगा । इस स्थान पर श्री हिंगलाजदेवी को ‘हिंगुलादेवी’ कहकर भी संबोधित करते हैं । गत ३ दशकों में यह मंदिर बहुत लोकप्रिय हो गया है । यह देवी डोडिया राजपूतों के लिए प्रथम कुलदेवी के रूप में पूजनीय है । इस परिसर में हिंगलाजदेवी मंदिर के अतिरिक्त और भी पूजास्थल हैं ।’
(संदर्भ : जालस्थल)
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