द्वापरयुग में पांडवों ने एक ही रात में निर्माण किया बनखंडी, जिला कांगडा में श्री बगलामुखी मंदिर !

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दशमहाविद्याओं में श्रीबगलामुखीदेवी एक महाविद्या है । श्रीबगलामुखीदेवी का मंदिर कांगडा (हिमाचल प्रदेश) जिले के बनखंडी गांव में है । पांडुलिपी में देवी का जैसा वर्णन है, उसी स्वरूप में देवी यहां विराजमान हैं । देवी का यह मंदिर महाभारत काल का है । द्वापरयुग में पांडवों ने अज्ञातवास के समय एक रात में यह मंदिर बनाया और पूजाअर्चा की । इस मंदिर में प्रथम अर्जुन और भीम ने युद्धकला में सफलता मिलने के लिए देवी की उपासना की थी और शत्रुसंहारिणी देवी बगलामुखी मंदिर में विविध प्रकार के कष्टों के निवारण के लिए शत्रुुनाश हवन करवाया था । देवी के मंदिर में हवन करने से मनोवांच्छित फलप्राप्ति होती है ।

१. श्रीबगलामुखीदेवी की उत्पत्ति

मंदिर में प्रतिष्ठापित श्रीबगलामुखीदेवी

एक बार दानव ने ब्रह्मदेव का ग्रंथ चुराकर उसे पाताल में छिपा दिया । उसे ऐसा वरदान मिला था कि पानी में वह किसी मानव अथवा देवता से मारा नहीं जा सकता । ऐसे समय पर ब्रह्मदेव ने देवी भगवती की उपासना की और उससे श्रीबगलामुखीदेवी अवतरित हुईं । देवी ने बगुले का रूप धारण कर उस दानव का वध किया और ब्रह्मदेव को उनका ग्रंथ लौटा दिया ।

सत्ययुग में एक बार सृष्टि में भयंकर तूफान आया । इस तूफान को शांत करने के लिए भगवान श्रीविष्णु ने तपस्या कर श्रीबगलामुखीदेवी को प्रसन्न किया । लंका पर विजय पाने के लिए श्रीराम ने शत्रुविनाशिनी श्रीबगलामुखीदेवी का पूजन किया और उसे विजय प्राप्त मिली ।’

– श्रीचित्‌‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, चेन्नई, तमिलनाडु. (१४.६.२०१६, सवेरे ९.३२)

सनातन की श्रीचित्‌‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने लिए  श्रीबगलामुखी देवी के दर्शन !

‘२९.१२.२०१८ को सनातन की श्रीचित्‌‌शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने कांगडा (हिमाचल प्रदेश) में जाकर श्रीबगलामुखी देवी से प्रार्थना की । हिन्दू राष्ट्र स्थापना की बाधाएं दूर हों और साधकों की रक्षा हो, इसलिए यहां यज्ञ भी किया ।’ – श्री. विनायक शानभाग (१९.१०.२०२०)

२. शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करनेवाली श्रीबगलामुखीदेवी और उनकी उपासना की विशेषताएं

२ अ. कहा जाता है कि शिवजी एवं श्रीमहाकालीदेवी के पश्चात यह देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं । साधना कर शीघ्र ही कुछ प्राप्त करने के लिए इस देवी का स्तवन प्रमुखरूप से करते हैं ।

२ आ. बगलामुखी-ब्रह्मास्त्र मंत्रजप अत्यंत मारक स्वरूप में कहा जाता है । मंत्रजप करते समय स्तोत्र का पठन करनेवाले की नींद तो दूर भाग ही जाती है; परंतु सुननेवाले को भी अलौकिक शक्ति का भान होता है । विशेष बात यह है कि इस चैतन्य में उसकी भी नींद उड जाती है ।’ – डॉ. अजय जोशी, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

२ इ. बगलामुखी-ब्रह्मास्त्र मंत्रजप से शत्रु का संहार होता है ।

२ ई. यह मंत्रजप विन्मुख नहीं करता; यानी जो साध्य करने के लिए साधना करते हैं, उसे साध्य किए बिना नहीं रहता । इसीलिए इसे ‘ब्रह्मास्त्र मंत्र’ कहते हैं । काेई इसका दुरुपयोग न करे; इसलिए धर्मशास्त्र ने इस देवी और उनकी साधना की जानकारी गुप्त रखी है ।’

–  एक भक्त

२ उ. ‘श्रीबगलामुखीदेवी का रंग सुवर्ण समान पीला है । इसलिए देवी को ‘पीतांबरी’ भी कहते हैं । देवी के वस्त्र, प्रसाद और आसन से लेकर उनकी प्रत्येक बात पीली ही होती है । देवी को पीला रंग प्रिय है; इसीलिए देवी के पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोेग होता है । देवी की उपासना करते समय साधक को पीले वस्त्र परिधान करने चाहिए ।

२ ऊ. श्रीबगलामुखीदेवी में संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश है ।

२ ए. देवी के अनेक स्वरूप हैं । इस महाविद्यादेवी की उपासना रात्र के समय करने से विशेष सिद्धी प्राप्त होती है ।

२ ऐ. देवी के भैरव महाकाल हैं । देवी बगलामुखी भक्तों का भय दूर कर शत्रु और अनिष्ट शक्तियों का नाश करती है ।’

(संदर्भ : जालस्थल)

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