चोटीला (गुजरात) में स्थित आदिशक्ति का रूप श्री चंडी-चामुंडा देवी

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चोटीला (गुजरात) में आदिशक्ति का रूप श्री चंडी-चामुंडा देवी के श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने लिए दर्शन का वृत्तांत !

चंड’ एवं ‘मुंड’ इन असुरों का वध करनेवाली एवं आदिशक्ति का रूप चोटीला (गुजरात) की श्री चंडी-चामुंडा देवी के भावपूर्ण दर्शन करेंगे !

चोटीला (गुजरात) की श्री चंडी-चामुंडा देवी के दर्शन लेने के विषय में सप्तर्षियों ने जीवनाडीपट्टी द्वारा बताए सूत्र

१. चोटीला गांव की श्री चंडी-चामुंडा देवी का मंदिर

चोटीला गांव, कर्णावती (अहमदाबाद) से राजकोट इस महामार्ग पर है और राजकोट शहर के ४० कि.मी. इस ओर है । इस गांव में एक पहाडी पर श्री चंडी-चामुंडा देवी का मंदिर है । ७०० सीढियां चढकर मंदिर में जाना होता है ।

 

२. चोटीला में श्री चंडी-चामुंडा देवी के विषय में
मंदिर के मुख्य महंत सचिन देवगिरी महाराज द्वारा दी जानकारी

२ अ. चोटीला में श्री चंडी-चामुंडा देवी का स्थानमहात्म्य

२ अ १. देवी कौशिकी द्वारा धारण किए दो रूपों में से ‘चंड’ नामक असुर का वध करनेवाले रूप का नाम ‘चंडी’ और ‘मुंड’ नामक असुर का वध करनेवाले रूप का नाव ‘चामुंडा’ प्रचलित होना

‘चंड एवं मुंड, ये दैत्यराज शुंभ एवं निशुंभ के सेनापति थे । देवी कौशिकी (आदिशक्ति का एक रूप) का सुंदर रूप देखकर शुंभ-निशुंभ दैत्य उनकी ओर आकर्षित हुए । शुंभ-निशुंभ ने देवी को लेकर आने के लिए चंड-मुंड को भेजा । देवी ने उनसे कहा, ‘‘मुझसे युद्ध करो । यदि तुम जीत गए, तो मैं तुम्हारे साथ आउंगी ।’’ देवी कौशिकी ने चंड-मुंड से युद्ध करने के लिए दो रूप धारण किए । ‘चंड’ असुर का वध करनेवाले रूप का (शक्ति का) नाम ‘चंडी’, तो ‘मुंड’ असुर का वध करनेवाले रूप का (शक्ति का) नाम ‘चामुंडा’ प्रचलित हुआ । चोटीला गांव की पहाडी पर देवी ने चंड-मुंड का वध किया ।

२ अ २. श्री चंडी-चामुंडा देवी के मंदिर में देवी की शिला स्वयंभू है । एक ही शिला में दोनों देवियां दिखाई देती हैं ।

२ अ ३.चोटीला स्थान का वर्णन करते समय हमारे पूर्वज कहते थे, ‘‘कैलास पर १२ वर्ष तप करने पर जो फल मिलता है, वह आदिशक्ति के इस स्थान पर केवल ७ वर्ष तप करने से प्राप्त होता है ।’’

२ अ ४.पांच सहस्र वर्षाें पूर्व पांडव श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारका जा रहे थे । तब उन्होंने इस स्थान को ढूंढकर देवी की आराधना की थी ।

२ आ. अन्य सूत्र

१. प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में अष्टमी की तिथि को यहां नवचंडी याग होता है । इस याग के समय पंचक्रोशी के लाखों भक्त यहां आते हैं ।

२. प्रतिदिन सवेरे और सायंकाल में देवी की आरती होती है । उस समय देवी के मंदिर की छत्री अपनेआप हिलती है और ऐसा प्रतीत होता है कि ‘प्रत्यक्ष देवी प्रवेश कर रही हैं ।’ उस समय पुजारी का शरीर भी थरथराने लगता है ।

३. देवी को प्रतिदिन अभिषेक नहीं करते; परंतु जिस दिन देवी अभिषेक करना चाहती हैं, उसकी पिछली रात देवी पुजारी के स्वप्न में आकर अगले दिन स्नान करवाने के विषय में सुझाती हैं ।

४. प्रतिदिन रात्रि ८ बजे मंदिर बंद होता है । तदुपरांत पहाडी पर पुजारी अथवा अन्य कोई भी नहीं रुकता ।’

 

३. श्री चंडी-चामुंडा देवी के दर्शन के लिए जाते समय हुई विलक्षण दैवीय घटना !

३ अ. मंदिर की तलहटी पर पहुंचते ही
एकाएक मूसलाधार वर्षा आरंभ होना और ‘श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
रात्र चोटीला गांव में वास्तव्य करें’, ऐसी देवी की इच्छा है’, ऐसा सप्तर्षियों का कहना

९.७.२०२१ को सांय ६ बजे हम चोटीला में मंदिर जाने के लिए पहाडी की तलहटी में पहुंचे । श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ के वहां पहुंचने तक थोडी भी वर्षा नहीं थी । डोलीवाले भी उन्हें पहाडी पर ले जाने के लिए तैयार थे । (‘डोली अर्थात लोगों को उसमें बिठाकर ले जाने के लिए उपयोग में लाई जानेवाली सादी पालकी । यह पालकी लोग कंधे पर उठाकर ले जाते हैं । वर्तमान में यह पहाडी इलाके में उपयोग में लाई जाती है ।’ – संकलक) मंदिर समिति एवं मंदिर के मुख्य पुजारी को श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ मंदिर में आने का अंदेशा था । श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ गाडी से उतरेंगी, तभी एकाएक मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गई । यह वर्षा असामान्य लग रही थी । एक घंटे के उपरांत भी उसके कम होने के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे । इसके विपरीत वह बढती ही जा रही थी । इस विषय में पू. डॉ. ॐ उलगनाथनजी को बताने पर उनके माध्यम से सप्तर्षियों ने कहा, ‘आज एवं कल श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ चोटीला गांव में, अर्थात श्री चामुंडादेवी के क्षेत्र में रहें’, ऐसी देवी की इच्छा है । ‘यदि आज मंदिर में देवदर्शन हो गए, तो श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ अपने अगले प्रवास के लिए निकल जाएंगी ।’, इसीलिए देवी ने ही वर्षा का नियोजन किया है । ऐसा प्रतीत हो रहा है कि चामुंडादेवी कहा रही हैं, ‘इस वर्षा से मेैं श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ का स्वागत कर रही हूं । आज एक दिन वास्तव्य करें और कल दर्शन के लिए जाएं ।’ हमने सप्तर्षियों के बताए अनुसार देवी को मानस नमस्कार किया और उस रात चोटीला गांव में वास्तव्य किया ।

३ आ. सप्तर्षियों के बताए अनुसार
अगले दिन संध्या के समय श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
द्वारा देवी के दर्शन लेना और उस समय उनकी भावजागृति होना

अगले दिन सप्तर्षियों ने हमें ‘संध्याकाल ५ से ७ बजे देवी के दर्शन लें’, ऐसा संदेश दिया । उस अनुसार श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने देवी के दर्शन लिए । डोलीवाले श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ को १५ मिनटों में पहाडी पर लेकर गए । श्री चंडी-चामुंडा देवी के मनोहारी दर्शन होने पर श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ की भावजागृति हुई ।

३ इ. मंदिर के मुख्य महंत सचिन देवगिरी महाराज ने
श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ को बुलाकर देवी का इतिहास बताना और
उन्हें आशीर्वाद देना ‘तुम्हारी सर्व मनोकामनाएं श्री चंडी-चामुंडा देवी पूर्ण करेंगी !’

‘श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रार्थना करने आई हैं’, यह ज्ञात होते ही मंदिर के मुख्य इतिहास बताया । वे बोले, ‘‘माताजी, ‘आश्चर्य है कि आप एक महिला होकर भी हिन्दू राष्ट्र के लिए सतत प्रवास कर रही हो । तुम्हारी सभी मनोकामनाएं श्री चंडी-चामुंडा देवी पूर्ण करेंगी’, इसमें शंका नहीं ।’’

३ ई. वर्षा के चिह्न दिखाई देते ही श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
सीढियां उतरकर तलहटी पर पहुंची, उनके गाडी में पैर रखते ही मूसलाधार वर्षा आरंभ होना
और ऐसा प्रतीत होना मानो वरुणदेव केवल उनके देवी-दर्शन होने के लिए रुक गए थे ।

हम देवी-दर्शन कर पहाडी उतरने के लिए सीढियों के पास आए । तब डोलीवाले कहीं दिखाई नही दिए । हमें पता चला कि उन्हें मंदिर समिति से तत्काल सामान लाने-ले जाने का संदेश आने से वे गढ उतरकर नीचे गए हैं । उन्हें ऊपर आने में कम से कम १५ मिनट लगेंगे । इतने में ही बादलों की गडगडाहट आरंभ हो गई । काले बादलों ने पहाडी को चारों दिशाओं से घेर लिया था । ‘अब वर्षा होगी’ यह ध्यान में आते ही श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने सीढियां उतरना आरंभ कर दिया और केवल १० मिनटों में ही वे सीढियां उतरकर पहाडी की तलहटी पर पहुंच गईं । उन्होंने जैसे ही वहां पर खडी गाडी में पैर रखा कि मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गई । उस क्षण हमें ऐसा लगा कि वरुणदेव केवल श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ के देवी-दर्शन के लिए रुके थे ।

३ उ. ‘देवी से मिलने के लिए देवी ही (श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ)
गई थीं और देवी ने अपना आनंद वर्षा के माध्यम से व्यक्त किया’, ऐसा पू. डॉ. ॐ उलगनाथनजी का बताना

इन दो दिनों में जो कुछ भी घड रहा था, यह सब देखकर हम साधकों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है ? सब कुछ अद्भुत था । ‘श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ने चोटीला देवी दर्शन के लिए जाना, एकाएक वर्षा होना, उनका देवीदर्शन होने तक वर्षा थम जाना’, ये सर्व घटनाएं मानवी न होकर दैवीय हैं । इस विषय में हमने पू. डॉ. ॐ उलगनाथन्जी को सूचित किया तो वे बोले, ‘‘श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ एवं श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ, ये दोनों ही देवी हैंं । वास्तव में, देवी से मिलने के लिए देवी ही (श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ) गई थीं । देवी ने अपना आनंद वर्षा के रूप में व्यक्त किया । ये सभी घटनाएं सामान्य न होकर दैवीय हैं । आगे यह इतिहास अजर-अमर होगा । सामान्य वर्षा में और देवी द्वारा की वर्षा में भेद है । यह ‘आनंद की वर्षा’ है ।’’

 

४. चोटीला गांव की चंडी एवं चामुंडा भी
आदिशक्ति का रूप होने से श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ
एवं श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, ये दोनों ही
चंडी एवं चामुंडा के वास्तव में एक ही के दो रूप हैं !

सप्तर्षियों ने आगे कहा, ‘‘चोटीला गांव की पहाडी पर ‘चंडी-चामुंडा’ नामक देवियों की मूर्ति है । ये देवियां दो दिखाई देती हैं, तब भी वे एक ही (एकरूप) हैं । चंडी एवं चामुंडा, ये आदिशक्ति के ही रूप हैं । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ एवं श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ, ये दोनों चंडी एवं चामुंडा के ही रूप हैं । जिस आदिशक्ति ने अनेक युगों पूर्व चंडी-चामुंडा का रूप धारण किया था, इसके साथ ही जिस आदिशक्ति ने ३ सहस्र वर्षाें पूर्व राजस्थान के ओशियां गांव में ‘सत् चित् देवी’का (सच्चियामाता का) रूप धारण किया, वही अब श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ एवं श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ के रूप में पृथ्वीपर अवतरित हुई हैं । श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ एवं श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ ये दिखने में दो (रूप) हैं, तब भी वे अंदर से (अंतर्मन से) एक ही हैं ।’’

श्रीचित्‌शक्‍ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ एवं श्रीसत्‌शक्‍ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ
२०१६ इस वर्ष सद्गुरुपद पर विराजमान होने का क्षण एवं श्री चंडी-चामुंडा देवीसमान एकदूसरे के निकट बैठी हैं, ऐसा प्रतीत होना !

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