मनुष्य के विविध कुकर्म और तदनुसार उसे होनेवाली नरकयातना (श्रीमद्भागवत्)

मनुष्य के त्रिगुणों के कारण होनेवाले कृत्यों का फल
शुकदेव गोस्वामी महाराज परिक्षित से कहते हैं, यह जग ३ प्रकार के कृत्यों से भरा है । सत्त्वगुण (भलाई के उद्देश्य से किए जानेवाले कृत्य), रजोगुण (वासना के अधीन होकर होनेवाले कृत्य) और तमोगुण (अज्ञान के कारण होनेवाले कृत्य) । इसलिए उन्हें ३ विविध प्रकार के परिणाम भोगने पडते हैं ।

दाऊद की कोई भी संपत्ति सनातन संस्था ने नहीं खरीदी – सनातन संस्था

नवाब मलिक ने स्वयं पर किए गए आरोपों के खुलासे के लिए सत्य न जानते हुए सनातन संस्था के नाम का अनुचित उपयोग किया है । दाऊद की कोई भी संपत्ति सनातन संस्था ने नहीं खरीदी है ।

ज्योतिषशास्त्र को झूठा बोलनेवाले बुद्धिवादियों को तमाचा !

‘ज्योतिषशास्त्र मन और स्वभाव का भी वेध ले सकता है । इसलिए जाने-अनजाने में जिनके अपराध की ओर मुडने की संभावना हो, उन्हें समय रहते ही सावधान कर, इसके साथ ही जो पहले ही अपराधी जगत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें अच्छे मार्ग पर लाने के लिए उनका मार्गदर्शन कर समाज में अपराध नियंत्रित करने में यह शास्त्र सहायता कर सकता है ।’

फरार आतंकवादी जाकिर नाईक को नहीं; किन्तु अध्यात्मप्रसार करनेवाली सनातन संस्था को खतरनाक माननेवाली ‘फेसबुक’ हिन्दुद्वेषी है ! – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

वास्तव में भारत द्वारा जिहादी आतंकवादी और संकटजनक (खतरनाक) घोषित डॉ. झाकीर नाईक के ‘फेसबुक’ पर 50 से अधिक अकाऊंट है, जो दिन-रात प्रचार कर रहे हैं; परंतु वे ‘फेसबुक’ को संकट नहीं लगते ।

सनातन संस्था के ‘ज्ञानशक्ति प्रसार अभियान’ का शुभारंभ; संस्था का आवाहन ‘सर्वांगस्पर्शी ग्रंथसंपदा का लाभ लें’ !

सनातन के ग्रंथों का दिव्य ज्ञान समाज तक पहुंचाने के लिए संस्था की ओर से पूरे भारत में ‘ज्ञानशक्ति प्रसार अभियान’ चलाया जा रहा है । यह ग्रंथ समाज के प्रत्येक जिज्ञासु, मुमुक्षू, साधक इत्यादि तक पहुंचाकर हर किसी के जीवन का कल्याण हो, इसलिए यह ‘ज्ञानशक्ति प्रसार अभियान’ आरंभ किया गया है । अधिकाधिक लोग इन ग्रंथों का लाभ लें ।

चीन पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव

बहुत प्राचीन समय से चीन, तिब्बत और भारत के सांस्कृतिक संबंध थे । तिब्बत को त्रिविष्टप अर्थात स्वर्ग’ कहा गया है । मनु ने चीन का उल्लेख किया है (ई.स.पू. ८०००) । रेशम चीन से आता है; इसलिए पाणिनि ने (ई.स.पू. २१०० वर्ष) उसे चीनांशुक’ कहा है ।

सनातन-निर्मित सर्वांगस्पर्शी आध्यात्मिक ग्रंथसंपदा सर्व भारतीय और विदेशी भाषाओं में प्रकाशित हो, इस हेतु ग्रंथ-निर्मिति की व्यापक सेवा में सहभागी हों !

ये सेवाएं करने के इच्छुक जिलासेवकों के माध्यम से आगे दी गई सारणीनुसार अपनी जानकारी श्रीमती भाग्यश्री सावंत के नाम [email protected] इस संगणकीय पते पर अथवा नीचे दिए पते पर भेजें ।