भगवान की कृपादृष्टि रहे एवं अपने सर्व ओर सुरक्षाकवच निर्माण हो, इस हेतु प्रतिदिन की जानेवाली कुछ कृतियां !

देवपूजा के कारण अपनी सात्त्विकता बढती है, अपने मन में भक्तिभाव का केंद्र निर्माण होता है, हम पर देवताओं की कृपादृष्टि होती है एवं घर में वातावरण सात्त्विक एवं प्रसन्न बनता है । जो भगवान को प्रतिदिन भक्तिभाव से पूजता है, वह भगवान को प्रिय होता है ।

लकडी कोल्हू का आरोग्यदायी तेल !

लकडी के कोल्हू का तेल अत्यंत शुद्ध, रसायनविरहित एवं आरोग्य के लिए हितकारक होता है, इसके साथ ही वह प्राकृतिक एवं शास्त्रोक्त पद्धति से निर्माण किया जाता है । उसे शुद्ध तेल की गंध आती है और वह चिपचिपा भी होता है; कारण उसमें ४-५ प्रकार के जीवनसत्त्व होते हैं । लकडी के कोल्हू से तेल निकालने में अत्यल्प घर्षण होने से उसमें से एक भी प्राकृतिक घटक नष्ट नहीं होता ।

बुद्धिप्रमाणवाद से विश्वबुद्धि द्वारा ज्ञानप्राप्ति के चरण

जिज्ञासुवृत्ति बुद्धि की सात्त्विकता की प्रक्रिया करवाने के लिए महत्त्वपूर्ण है । इसलिए मनुष्य जिज्ञासु के चरण पर होते हुए धर्म अथवा अध्यात्म का ज्ञान प्रथम बुद्धि से जानकर उस अनुसार कृति करते जाने से उसकी बुद्धि सात्त्विक होकर वह प्रथम साधक, तदुपरांत शिष्य और अंत में संत अथवा गुरु इस स्तर तक पहुंच सकता है

वास्तु-विक्री यंत्र

आजकल साधकों को अपनी वास्तु बेचते समय अनेक अडचनें आ रही हैं’, ऐसे अनेक साधकों के उदाहरणों से ध्यान में आया है । भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि वास्तु का क्रय होने में आनेवाली अडचनें दूर होने के लिए कुछ उपाय सुझाएं ।’ भगवान श्रीकृष्ण ने वास्तु-विक्री की कुछ अडचनों को दूर होने हेतु ‘वास्तु-विक्री यंत्र’ सुझाया ।

पानी की शक्ति और सकारात्मकता

पानी अर्थात जीवन । पानी में स्वयं की विशिष्ट एक स्मरणशक्ति होती है । पानी पीते समय जिसप्रकार के अपने विचार होते हैं अथवा जिस मानसिक स्थिति में हम पानी पीते हैं, उसका भारी परिणाम पानी पर और हम पर होता है ।

मनुष्य के विविध कुकर्म और तदनुसार उसे होनेवाली नरकयातना (श्रीमद्भागवत्)

मनुष्य के त्रिगुणों के कारण होनेवाले कृत्यों का फल
शुकदेव गोस्वामी महाराज परिक्षित से कहते हैं, यह जग ३ प्रकार के कृत्यों से भरा है । सत्त्वगुण (भलाई के उद्देश्य से किए जानेवाले कृत्य), रजोगुण (वासना के अधीन होकर होनेवाले कृत्य) और तमोगुण (अज्ञान के कारण होनेवाले कृत्य) । इसलिए उन्हें ३ विविध प्रकार के परिणाम भोगने पडते हैं ।

दाऊद की कोई भी संपत्ति सनातन संस्था ने नहीं खरीदी – सनातन संस्था

नवाब मलिक ने स्वयं पर किए गए आरोपों के खुलासे के लिए सत्य न जानते हुए सनातन संस्था के नाम का अनुचित उपयोग किया है । दाऊद की कोई भी संपत्ति सनातन संस्था ने नहीं खरीदी है ।

ज्योतिषशास्त्र को झूठा बोलनेवाले बुद्धिवादियों को तमाचा !

‘ज्योतिषशास्त्र मन और स्वभाव का भी वेध ले सकता है । इसलिए जाने-अनजाने में जिनके अपराध की ओर मुडने की संभावना हो, उन्हें समय रहते ही सावधान कर, इसके साथ ही जो पहले ही अपराधी जगत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें अच्छे मार्ग पर लाने के लिए उनका मार्गदर्शन कर समाज में अपराध नियंत्रित करने में यह शास्त्र सहायता कर सकता है ।’