इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर कपूर के वृक्षों की खोज में दुर्गम प्रवास

हमारे दक्षिण-पूर्व राष्ट्रों के दौरे पर जानकारी मिली की इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर कपूर के वृक्ष हैं और उससे शुद्ध भीमसेनी कपूर मिलता है ।

श्रीलंका के जाफना शहर के निकट नैनातीवू द्वीप पर और ५१ शक्तिपीठों में एक नागपुषाणी देवी का सुप्रसिद्ध मंदिर !

प्राचीन काल में नैनातीवू को नागद्वीप नाम से पहचाना जाता था । यहां शक्तिपीठ के स्थान पर देवी का एक मंदिर है । उस देवी का नाम नागपुषाणी देवी है ।

बौद्धों द्वारा हिन्दू मंदिरों पर किए गए आक्रमणों का एक उदाहरण श्रीलंका के कैन्डी शहर का बौद्ध मंदिर !

कैन्डी शहर के इस बौद्ध मंदिर के पिछले भाग में एक संग्रहालय है । १७ बौद्ध देशों ने इस संग्रहालय के लिए अपने-अपने देशों से विविध विशेषतापूर्ण वस्तुएं और प्रतिकृतियां (रेप्लिकाज) दी हैं । इस संग्रहालय में भारत का सबसे बडा दालान है ।

युद्ध के काल में सैनिकों की रक्षा के लिए देवताओं की उपासना से भारित किए हुए धागे उन्हें उपलब्ध करनेवाले कंबोडिया के राजा !

राष्ट्ररक्षा के लिए उस समय के राजा देवताओं की उपासना कर अपने सेना को तंत्र-मंत्र द्वारा आध्यात्मिक कवच प्रदान करते थे । वे राजा सेना और राष्ट्र की आध्यात्मिकदृष्टि से ध्यान रखते थे, यही इससे दिखाई देता है ।

मलेशिया की बटू गुफा में कार्तिकेय का विश्‍वप्रसिद्ध जागृत मंदिर !

प्राचीन काल में जिसे मलय द्वीप कहते थे, वह है आज का मलेशिया देश ! मलेशिया, अनेक द्वीपों का समूह है । मलय भाषा में अनेक संस्कृत शब्दों का उपयोग किया जाता है । मलय साहित्य में रामायण और महाभारत का संबंध दिखाई देता है ।

बाली में जागृत ज्वालामुखी युक्त अगुंग पर्वत और समुद्रमंथन में रस्सी का कार्य करनेवाले वासुकी नाग के बेसाखी मंदिर की विशेषताएं !

‘अगुंग पर्वत’ अर्थात धधकता और निरंतर जागृत ज्वालामुखी ! यहां प्रत्येक ५-१० मिनटों में राख का विस्फोट होता है । ३ सहस्र १०५ मीटर ऊंचे पर्वत पर यह ज्वालामुखी गत वर्षभर से जागृत है । इसलिए अनेक बार बाली द्वीप पर आपत्कालीन स्थिति निर्माण हुई है । बाली में हिन्दू इस पर्वत को पवित्र मानते हैं ।

इंडोनेशिया के अद्वितीय प्राचीन मंदिर और उनके निर्माण की विशेषताएं

काल की साक्ष्य में मंदिरों की रचना करने से आज अनेक शताब्दियां बीत जाने पर भी ये सर्व मंदिर शान से खडे हैं । उनके सौंदर्य का दर्शन करते हुए आंखें फटी रह जाती हैं और उनके वर्णन के लिए शब्द कम पड जाते हैं ।

कंबोडिया में एक समय पर अस्तित्व में होनेवाली हिन्दुओं की वैभवशाली संस्कृति के पतन का कारण और वर्तमान स्थिति !

७ वीं शताब्दी से लेकर १५ वीं शताब्दी तक जिन्होंने कंबोडिया पर राज्य किया, उस साम्राज्य को खमेर साम्राज्य कहते हैं । इस खमेर साम्राज्य के राजा स्वयं को चक्रवर्ती अर्थात ‘पृथ्वी के राजा’ समझते थे ।

लाखों वर्षों का इतिहास प्राप्त और भारत से श्रीलंका में तलैमन्नार के छोर तक फैला रामसेतु : श्रीराम से अनुसंधान साधने का भावबंध !

तलैमन्नार के अंतिम छोर से २ कि.मी. चलते हुए जाने पर रामसेतु के दर्शन होते हैं । रामसेतु से देखने पर १६ छोटे द्वीप एकत्र होने समान ((द्वीपसमूह समान) दिखाई देते हैं ।) दिखाई देते हैं ।

थायलैंड की राजधानी बँकॉक में राजमहल की विशेषताएं !

राजा राम १ के बैंकॉक शहर में राजमहल बनवाने के पश्चात इसकी दीवारों पर रामायण के विविध प्रसंगाेंं के सुंदर चित्र रंगवाए हैं । चित्रों में राम, लक्ष्मण इत्यादि व्यक्तिरेखाओं के मुख और सभी के वस्त्र थायलैंड की पद्धतिनुसार हैं ।