सनातन के पूर्णकालीन साधकों के विषय में भ्रांति फैलानेवाले ज्योतिषियों से सावधान रहें !

मुखमंडल पर तेज दिखना, यह साधना के कारण आध्यात्मिक उन्नति होने पर दिखाई देनेवाले अनेक लक्षणों में से एक लक्षण है । वाणी चैतन्यमय होना, मुखमंडल आनंदी होना, सुगंध आना, अंतर्मन से नामजप होना इत्यादि अनेक लक्षण होते हैं । इसलिए उन्नति होने के उपरांत ‘मुखमंडल पर तेज दिखना ही चाहिए’, ऐसा नहीं ।

कालमेघ वनस्पति और विकारों में उसके उपयोग

कालमेघ वनस्पति संक्रामक रोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त है । यह बहुत ही कडवी होती है । इसका उपयोग ज्वर और कृमियों के लिए किया जाता है । यह सारक (पेट को साफ करनेवाली) होने से कुछ स्थानों पर वर्षा ऋतु में और उसके उपरांत आनेवाली शरद ऋतु में सप्ताह में एक बार इसका काढा पीने की प्रथा है । इससे शरीर स्वस्थ रहता है ।

महान योगी परम तपस्वी अग्निस्वरूप संत प.पू. रामभाऊस्वामी !

तंजावूर (तंजौर), तमिलनाडु के श्री गणेश उपासक एवं समर्थ रामदासस्वामी की परंपरा के महान योगी प.पू. रामभाऊस्वामी ! ईश्वरीय संकेतानुसार वे विविध स्थानों पर यज्ञयाग करते हैं । गत ४० वर्षों से उनका आहार केवल २ केले एवं १ कप दूध है । प.पू. रामभाऊस्वामी की एक विशेषता यह है कि उन्होंने अपनी अखंड योगसाधना से तेजतत्त्व पर प्रभुत्व पा लेने के कारण वे प्रज्ज्वलित यज्ञकुंड में १० से १५ मिनटों तक सहजता से बैठ सकते हैं ।

वैश्‍विक महामारी फैलानेवाले कोरोना विषाणु का नया प्रकार ओमिक्रॉन विषाणु से आध्यात्मिक स्तर पर लडने के लिए यह जप करें !

गुरुकृपा से यहां दिए गए जप से विश्‍व के सभी को लाभान्वित होकर ओमिक्रॉन विषाणु का विश्‍वभर का प्रभाव नियंत्रित हों और उसका प्रसार रुक जाएं, एवं यह नामजप करने के निमित्त से अनेकों को इस आपातकाल में साधना करने की गंभीरता ध्यान में आकर उनके द्वारा साधना आरंभ हों, यही श्रीगुरुचरणों में प्रार्थना !

सनातन संस्‍था पर प्रतिबंध लगाने की मांग दुर्भाग्‍यजनक

विधानसभा में भाजपा विधायक मंगलप्रभात लोढा गरजे रजा अकादमी पर प्रतिबंध क्‍यों नहीं लगाया जाता ? ‘जो हिन्‍दू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा !’ – विधायक मंगलप्रभात लोढा का विधानभा में नारा   सनातन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करनेवालों का मुंह-तोड खंडन करनेवाले विधायक मंगलप्रभात लोढा का आभार ! – … Read more

बाबा वेंगा की वर्ष २०२२ के लिए भविष्यवाणी !

वैश्विक तापमान बढने का परिणाम भारत पर भी होने वाला है । इस कारण देश के अनेक भागोें का तापमान लगभग ५० अंश सेल्सियस के आसपास पहुंचेगा ।

सनातन पर लगाए आरोप झूठे एवं राजनीतिक हेतु से प्रेरित ! – सनातन संस्था

महाराष्ट्र राज्य के पर्यावरणमंत्री मा. आदित्यजी ठाकरे को मिली धमकियों का सनातन संस्था तीव्र शब्दों में निषेध करती है । हम ऐसी धमकी देनेवाले दोषियों पर कठोर कारवाई करने की मांग करते हैं;…

विश्वयुद्ध, भूकंप आदि आपदाओं का प्रत्यक्ष सामना कैसे करें ? (भाग ४)

इस लेख में भूकंप के विषय में जानकारी दी गई है । भूकंप आने से पहले की जानेवाली कुछ तैयारियां, प्रत्यक्ष भूकंप आए तो क्या करना है और भूकंप होने पर क्या करें, इसकी जानकारी दी गई है ।

रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक कृषि में अंतर !

आपातकाल में रासायनिक अथवा जैविक खाद उपलब्ध होना कठिन है । प्राकृतिक कृषि पूर्णतः स्वावलंबी कृषि है तथा आपातकाल के लिए, साथ ही सदैव के लिए भी अत्यधिक उपयुक्त है ।

विश्‍वयुद्ध, भूकंप आदि आपदाओं का प्रत्‍यक्ष सामना कैसे करें ? (भाग ३)

जैविक अस्‍त्रों द्वारा होनेवाले आक्रमण – ‘जैविक अस्‍त्र’ क्‍या है ?
मनुष्‍य, पशु तथा फसल पर बीमारी फैलाने हेतु उपयोग में लाए जानेवाले सूक्ष्म जीवाणुओं अथवा विषाणुओं को ‘जैविक अस्‍त्र’ कहते हैं । पशुओं का संक्रामक रोग (एंथ्रेक्‍स), ग्रंथियों का रोग (ग्‍लैंडर्स), एक दिन छोडकर आनेवाला ज्‍वर (ब्रुसेलोसिस), हैजा (कॉलरा), ‘प्‍लेग’, ‘मेलियोआइडोसिस’ इत्‍यादि रोगों के जीवाणुओं एवं विषाणुओं का उपयोग ‘जैविक अस्‍त्र’ के रूप में किया जाता है ।