अहमदाबाद : दिवाली ऐसा त्योहार है जब तेल का दीपक जलाना अच्छाई और विजय का प्रतीक माना जाता है, इसकी चमक हमारे अंदर उत्साह भरती है । अहमदाबाद में एक तेल का दीया ऐसा भी है जो पिछले २२२ वर्षाें से लगातार जल ही रहा है । इस दीये का नाम है ‘दीपकजी’ । गोस्वामी हवेली पर नटवर प्रभु और श्यामल जी के वैष्णव मंदिर पर जल रही इस अखंड ज्योति पर सभी समुदाय और जाति के लोगों का विश्वास है ।
मंदिर के बारे में कहा जाता है कि, गोस्वामी रघुनाथ जी ने २२२ वर्ष पहले नटवरप्रभु जी की मूर्ति को अहमदाबाद के हवेली में स्थित मंदिर में स्थापित किया था । बाद में उनके बड़े पुत्र गोपीनाथ जी ने गोस्वामी हवेली में महत्वपूर्ण कर्मकांड और पूजन के लिए एक दीया स्थापित कर दिया था । मंदिर में अनुष्ठान करते हुए गोपीनाथ जी ने तप किया और ‘अमृतसंजीवनी’ प्राप्त की । इसके बाद दीये में कालिख जमने के बजाय सिंदूर जमा हो गया था । इस सिंदूर का प्रयोग मूर्ति की पूजा के लिए किया जाता है ।
गोपीनाथजी के भाई छोटाजी महाराज ने अमृसंजीवनी भेंट कर दी थी क्योंकि उनका कोई वारिस नहीं था । उसी वर्ष एक सामुदायिक मिलन सम्मेलन किया गया था जिसमें भगदड़ के बाद ७ लोगों की मृत्यु हो गई थी । मंदिर के पुजारी गोस्वामी रणछोड़लालजी ने बताया कि, प्रार्थना से चमत्कार हुआ था और भगदड़ में मरे सातों लोग वापस जी उठे थे । पुजारी ने बताया कि, उसके बाद से लोगों में इस मंदिर के प्रति और आस्था गहरी हो गई । इसके बाद हर गुरुवार को लोगों ने मंदिर के दीये में तेल चढ़ाना शुरू कर दिया । जिसके बाद दीपक कभी नहीं बुझा ।

भारतभर के लाखों श्रद्धालुओं के श्रद्धास्थान कटरा (जम्मू) की श्रीवैष्णोदेवी !
द्वापरयुग में पांडवों ने एक ही रात में निर्माण किया बनखंडी, जिला कांगडा में श्री...
राजा धन्यमाणिक को स्वप्नदृष्टांत देकर माताबरी (त्रिपुरा) में स्थानापन्न हुई श्रीत्रिपुरासुंदरीदेवी !
बीरभूम (बंगाल) के महास्मशान में विराजमान श्री तारादेवी !
कर्नाटक राज्य के शृंगेरी (जिला चिक्कमगळुरू) और कोल्लुरू (जिला उडुपी) के मंदिर
सती का ब्रह्मरंध्र जिस स्थान पर गिरा, वह पाकिस्तानस्थित शक्तिपीठ श्री हिंगलाजमाता !