प्राणी एवं पक्षी को मृत्यु के पश्चात अच्छी गति मिलने हेतु मृत्यु के समय किए जानेवाले आध्यात्मिक उपाय !

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अनुक्रमणिका

श्री. राम होनप

 

१. स्वप्न में एक मनुष्य सफेद रंग के एक प्राणि जिसकी मृत्यु समीप थी, उसे धूप में लेकर आते दिखाई देना

१५.९.२०१६ को सवेरे मैंने एक स्वप्न देखा । उसमें एक मनुष्य सफेद रंग के एक प्राणी जिसकी मृत्यु समीप थी, उसे धूप में ले जाते हुए दिखाई दिया । फिर मुझे वह दृश्य दिखाई देना बंद हो गया । सवेरे उठने पर मुझे मरणासन्न प्राणी अथवा पक्षी को गति मिलने के लिए उसका पालन करनेवाले व्यक्ति को कौन से आध्यात्मिक उपाय करने चाहिए, इस संदर्भ में आगे दिया ज्ञान मिला । तब स्वप्न में दिखाई दिए दृश्य का खुलासा हुआ ।

 

२. मरणासन्न प्राणी अथवा पक्षी को संभव हो तो धूप में ले जाकर विशिष्ट मंत्र कहना और यदि वह ज्ञात न हो तो गंगाजल अथवा देवपूजा के तीर्थ की दो बूंदें अथवा चिमटीभर विभूती उस जीव के मुंह में डालना

मरणासन्न प्राणी अथवा पक्षी का पालन करनेवाले व्यक्ति के लिए यदि संभव हो तो धूप में ले जाकर विशिष्ट मंत्र बोले । विशिष्ट मंत्रों का ज्ञान न होने से गंगाजल अथवा देवपूजा के तीर्थ की दो बूंदें अथवा चिमटी भर विभूती संबंधित जीव के मुंह में डाले और उस जीव को गति मिलने के लिए भगवान दत्तात्रेय से प्रार्थना करे ।

 

३. मरणासन्न विशिष्ट प्राणी अथवा पक्षी को अच्छी गति मिलने के संदर्भ में मंत्र प्राचीन काल में ऋषियों को ज्ञात होने से उनके मंत्र कहते ही उन जीवों को तुरंत गति मिलना

प्राचीन काल में ऋषियों को विशिष्ट प्राणी अथवा पक्षियों के लिए कौन-सा मंत्र कहने पर उन्हें गति मिलेगी, इस विषय में ज्ञान था । ऋषियों द्वारा २ पंक्तियों का श्‍लोक संबंधित जीवों के लिए बोले जाने पर, उन जीवों को गति तुरंत मिल जाती थी । इसीलिए उस काल में ऋषियों के आश्रम परिसर में प्राणि एवं पक्षियों का विचरण अधिक था ।

 

४. सूर्य से मिलनेवाली शक्ति से प्राणी अथवा पक्षी की सूक्ष्मदेह को शक्ति प्राप्त होना और इस शक्ति से उन्हें अगले मार्गक्रमण के लिए गति मिलना

सूर्य प्राकृतिक ऊर्जा का स्रोत होने से उससे मिलनेवाली शक्ति से प्राणी अथवा पक्षी को सूक्ष्मदेह की शक्ति प्राप्त होती है । इस शक्ति से उन्हें अगला मार्गक्रमण करने के लिए गति मिलती है । पशु-पक्षियों का पालन-पोषण प्रकृति में ही होता है, इसलिए यह प्रधान उपाय है । प्राचीन ऋषि सूर्य द्वारा जीवों पर जो उपाय करते थे, उसे तेजोप्रभा अथवा सूर्यप्रभा कहते थे । सूर्यतरंगों द्वारा वन्य प्राणियों का उद्धार करने की प्रेरणा से सूर्यप्रभा की संकल्पना की निर्मिति हुई ।

 

५. प्राणी अथवा पक्षियों पर मृत्यु के समय आध्यात्मिक उपाय करने से होनेवाले लाभ

५ अ. पालतू प्राणी अथवा पक्षी की मृत्यु के समय पर पालनकर्ता को भगवान दत्तात्रेय से भावपूर्ण प्रार्थना करने से उन्हें अगली योनी में जन्म लेने की प्रेरणा मिलना

घर में अनेक वर्षों से पाले हुए प्राणी अथवा पक्षी को संबंधित घर में आश्रय लेने का संस्कार हुआ होता है । इन जीवों को भले ही बुद्धि न हो, तब भी इतने वर्षों तक मनुष्य द्वारा उस पर जताए गए प्रेम की संवेदनाओं का संस्कार उस जीव पर हो चुका होता है । इसलिए वह प्रेम पुन: मिले, इसलिए ऐसे जीव मृत्यु के पश्चात भी उसी घर में वास्तव्य करते हैं । संबंधित व्यक्तियों द्वारा ऐसे जीवों के लिए भगवान दत्तात्रेय से भावपूर्ण प्रार्थना करने पर पालतू प्राणी अथवा पक्षी को अगली योनी में जन्म लेने की प्रेरणा मिलती है ।

५ आ. मृत्यु के समय प्राणि अथवा पक्षी पर किए गए आध्यात्मिक उपायों के कारण प्राणी अथवा पक्षी का अगला जन्म सात्त्विक वातावरण में होने से उनमें सत्त्वगुणों की वृद्धि होकर मनुष्य योनी में प्रवेश मिलने का मार्ग शीघ्र खुल जाना

मृत्यु के समय प्राणी अथवा पक्षी पर किए गए आध्यात्मिक उपायों के कारण उन्हें सात्त्विक स्थान पर जन्म लेने की इच्छा निर्माण होती है, इसे ही कहते हैं संबंधित जीव को गति प्राप्त होना । अगले जन्म में ऐसे जीवों को सात्त्विक वातावरण, अर्थात मंदिर, गुरु का आश्रम अथवा साधक के घर में प्रवेश मिलता है । इससे ऐसे जीवों के सत्वगुण में धीरे-धीरे वृद्धि होती है । इससे उन्हें मनुष्ययोनी में प्रवेश करने का मार्ग शीघ्र खुल जाता है ।

५ इ. अगले चार जन्म छोडकर सीधे पांचवें जन्म में प्रवेश मिलना

प्राणी अथवा पक्षी को अगली गति मिलने के लिए भगवान दत्तात्रेय से भावपूर्ण प्रार्थना से संबंधित जीव को उसके अगले चार जन्म छोडकर सीधे पांचवें जन्म में प्रवेश मिलता है ।

प्राणी अथवा पक्षी पर आध्यात्मिक उपाय करनेवालों की साधना अथवा भाव से संबंधित जीव को ऊपर दी गई गति मिलने के संदर्भ में क्या लाभ होगा, यह निर्भर होता है ।

 

६. मनुष्य को प्राणी अथवा पक्षियों के लिए आध्यात्मिक उपाय करने के कारण

६ अ. हिन्दू धर्म की सीख अनुसार कृति करने से व्यापकता और निरपेक्ष प्रेम में वृद्धि होने में सहायता होना

हिन्दू धर्म मनुष्य के साथ-साथ अन्य प्राणी और पक्षियों का विचार करना सिखाती है । उस अनुसार मनुष्य के कृति करने पर उसमें विद्यमान परमेश्‍वर की व्यापकता और निरपेक्ष प्रेम वृद्धींगत होेने में सहायता होती है ।

६. आ. निष्काम कर्म के साथ ही निष्काम साधना भी होना

प्राणी एवं पक्षियों की आध्यात्मिकदृष्टि से सहायता करने पर निष्काम कर्म और निष्काम साधना भी होती है ।

७. उपरोक्त ज्ञान मिलने के पश्चात साधक की हुई विचारप्रक्रिया

७ अ. पितृपक्षकाल के लिए उपयुक्त ज्ञान मिलना

सवेरे नींद से जागने पर स्वप्न में प्राणियों के संदर्भ में दिखाई दिए दृश्य का स्मरण कर, उससे संबंधित ज्ञान मिला । तदुपरांत मन में प्रश्न उठा कि किसी जीव को गति मिलने के विषय का स्वप्न आज क्यों आया होगा ? कुछ देर पश्चात ध्यान में आया कि १७.९.२०१६ से पितृपक्ष शुरू हो रहा है इसलिए यह स्वप्न आया है ।

७ आ. मृत्यु के समय संबंधित व्यक्ति द्वारा प्राणी अथवा पक्षी के लिए कुछ धार्मिक उपाय करने से उनका अगले जीवन के लिए उपयोग होना

कुछ घरों में किसी प्राणी अथवा पक्षी का दीर्घकाल तक संगोपन किया जाता है । घर के सदस्य जीवन भर उसे प्रेम से संभालते हैं । मृत्यु के समय ऊपर दिए अनुसार संबंधित व्यक्ति को भी उनके लिए कुछ न कुछ धार्मिक उपाय करने से उन्हें उसका उपयोग अगले जीवन के लिए होगा । – श्री. राम होनप, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१६.९.२०१६)

सूक्ष्म : व्यक्ति के स्थूल अर्थात प्रत्यक्ष दिखाई देनेवाले अवयव नाक, कान, आंखें, जीभ एवं त्वचा, ये पंचज्ञानेंद्रियां हैं । ये पंचज्ञानेंद्रियां, मन एवं बुद्धि के परे अर्थात सूक्ष्म ! साधना में प्रगति करने से कुछ व्यक्तियों को ये सूक्ष्म संवेदना ध्यान में आती हैं । इस सूक्ष्म के ज्ञान के विषय में विविध धर्मग्रंथों में उल्लेख है ।

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