‘समष्टी के कल्याण की दृष्टि से चलाया जा रहा सनातन संस्था का कार्य प्रशंसनीय !’ – महंत मुक्तानंद ब्रह्मचारी

धर्मशिक्षा फलक प्रदर्शनी की जानकारी लेते हुए महंत मुक्तानंद ब्रह्मचारी (दाहिनी ओर) तथा उनके साथ श्री. चेतन राजहंस

प्रयागराज (कुंभनगरी, उत्तर प्रदेश) : शंकराचार्यजी द्वारा आरंभ किए गए इस कुंभपर्व के माध्यम से धार्मिक कार्य के साथ हिन्दुओं का सामाजिक संगठन भी होना चाहिए । हमारे धर्मध्वज ने सहस्रों वर्षों से सभी को संगठित कर रखा है । अब भी इसी धर्मध्वजतले सभी को संगठित होने की आवश्यकता है । हिन्दुओं ने धर्मशास्त्र लेकर धर्माचरण किया, तो हमारी संंस्कृति टिकी रहेगी और किसी भी प्रकार के लालच और संकट हमारी संस्कृति पर आघात नहीं कर सकेंगे । इस प्रदर्शनी में दिखाए जाने के अनुसार नई पीढी को धार्मिक विधि और उनका महत्त्व वैज्ञानिक परिभाषा में समझाया गया, तो वे सहजता से उसका स्वीकार करेंगे । सनातन संस्था की प्रदर्शनी से युवा साधकों द्वारा इस प्रकार का कार्य करते हुए देखकर मैं आनंदित हूं । इस माध्यम से समाज को दिशा मिलेगी । समष्टी के कल्याण की दृष्टि से सनातन संस्था द्वारा किया जा रहा यह कार्य प्रशंसनीय है । काशी के महंत मुक्तानंद ब्रह्मचारी ने १२ फरवरी को ऐसा प्रतिपादित किया । कुंभनगरी में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से आयोजित ग्रंथ एवं धर्मशिक्षा फलक प्रदर्शनी के अवलोकन के पश्‍चात वे ऐसा बोल रहे थे ।

इस अवसरपर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक (डॉ.) चारुदत्त पिंगळेजी ने उन्हें माल्यार्पण कर तथा ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया । इस अवसरपर समिति के उत्तर-पूर्व भारत मार्गदर्शक पू. नीलेश सिंगबाळजी, सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस तथा सनातन के संत पू. प्रदीप खेमकाजी उपस्थित थे ।

 

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“Satpatre daanam”