शारीरिक कष्ट होते हुए भी सहजावस्था में रहनेवाले पू. भगवंतकुमार मेनरायजी !

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पू. भगवंतकुमार मेनराय 

पू. भगवंतकुमार मेनरायजी का श्रावण शुक्ल पंचमी (नागपंचमी ७.८.२०१६) को तिथि अनुसार जन्मदिन था । इस निमित्त साधकों को अनुभव हुई उनकी गुणविशेषताएं यहां दे रहे हैं ।

भगवान शिवजी को प्रिय माह में जन्म

१. हिन्दू धर्म में श्रावण का माह वर्ष में विशेष महत्त्व रखता है । इसी माह में नागपंचमी की शुभतिथि पर शिवभक्त पू. भगवंतकुमार मेनरायजी का जन्म हुआ है । सर्वाधिक त्यौहार इसी महिने में आते हैं (उदा. नागपंचमी, रक्षाबंधन, मनसापूजा (बंगाल), कज्जली तीज, रांधण छठ जन्माष्टमी (गोकुल अष्टमी) आदि ।

अधिकतर संतों का जन्म भी इसी महिने में हुआ है, उदा. गोस्वामी तुलसीदास, महर्षि अरविंद, धर्मसम्राट करपात्रीस्वामी, गुरुदेव काटेस्वामीजी आदि ।

२. पू. मेनरायजी की बचपन से शिवजी पर दृढ निष्ठा थी । शिवजी ने भी उन पर कृपा कर अपने बारह रूपों के दर्शन सपरिवार कराए ।

३. शारीरिक कष्ट होते हुए भी पू. मेनरायजी सदैव प्रसन्न एवं सहजावस्था में रहते हैं ।

४. पहले उन्होंने वायुसेना में कार्यरत रहकर देशसेवा का व्रत स्वीकार किया । तदुपरांत अध्यात्मप्रसार और सत्सेवा में तन, मन, धन अर्पण किया ।

५. पू. मेनरायजी को होमियोपैथी चिकित्सा अवगत है । साधकों को किसी भी समय आवश्यक होने पर वे उसकी प्रेम से पूछताछ कर उसे औषधि भी देते हैं ।

– श्रीमती नीलिमा सप्तर्षि, सनातन आश्रम, गोवा.

साधकों के कष्ट घटाने हेतु निरंतर नामजप-प्रार्थना करना

पू. मेनरायजी प्रातः उठकर समष्टि के लिए नामजप करते हैं । एक बार एक साधिका का कष्ट बढ गया था । उन्होंने उसके लिए बहुत नामजप और प्रार्थना की । उसका नाम याद रखने हेतु उन्होंने अपने हाथ पर उसका नाम लिखा । – कु. माधवी पोतदार एवं कु. सोनाली खटावकर, सनातन आश्रम, गोवा.

जालस्थल में प्रकाशित की गई अनुभूतियां जहां भाव, वहां ईश्‍वर इस उक्ति अनुसार साधकों की व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं । सभी को ऐसी अनुभूतियां होंगी ही, ऐसा नहीं है । – संपादक

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