श्री गणेशमूर्तिकी पूजाविधि एवं प्राणप्रतिष्ठा

सारणी


 

१. शास्त्रानुसार श्री गणेशचतुर्थीके दिन श्रीगणेश मूर्तिका पूजन करनेकी अवधि

शास्त्रके अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थीके दिन श्री गणेशजीकी मिट्टीकी मूर्ति बनानी चाहिए । उसे बाएं हाथपर रखकर सिद्धिविनायकके नामसे मूर्तिकी प्राणप्रतिष्ठा एवं पूजा करनी चाहिए तथा तुरंत ही उसे विसर्जित करना चाहिए । कुलाचारके अनुसार श्री गणेशमूर्ति डेढ, पांच, सात, दस अथवा ग्यारह दिन पूजी जाती है तदुपरांत श्री गणेशमूर्तिका विसर्जन किया जाता है ।

 

२. श्री गणेशमूर्तिकी पूजाविधि

श्री गणेशचतुर्थीके दिन पूजन हेतु श्री गणेशजीकी नई मूर्ति लाई जाती है । पूजाघरमें रखी श्री गणेशमूर्तिके अतिरिक्त, इस मूर्तिका स्वतंत्र रूपसे पूजन किया जाता है । सर्वप्रथम आचमन कीजिए । उसके उपरांत देशकालका उच्चारण कर विधिका संकल्प कीजिए । उसके उपरांत शंख, घंटा, दीप इत्यादि पूजासंबंधी उपकरणोंका पूजन किया जाता है तथा उसके उपरांत श्री गणेशमूर्तिमें प्राणप्रतिष्ठा की जाती है ।

 

३. श्री गणेशमूर्तिकी प्राणप्रतिष्ठा के बारेमें

इसमें श्री गणेशमूर्तिके हृदयपर दाहिना हाथ रख मंत्रोच्चारण करते हैं । श्री गणेश चतुर्थीपर अथवा नई मूर्ति स्थापित करनेके लिए प्राणप्रतिष्ठा करते हैं ।

मूर्तिमें प्राणप्रतिष्ठा करनेके कृत्यसे मूर्तिमें देवत्व आता है । यह सामान्य पूजामें नहीं किया जाता; क्योंकि प्रतिदिन पूजित मूर्तिमें नित्यपूजाके कारण ईश्वरीय तत्त्व आ चुका होता है । प्राणप्रतिष्ठाके उपरांत श्री गणेशमूर्तिकी षोडशोपचार पूजा की जाती है । षोडशोपचार पूजनमें पाद्य, अर्घ्य इत्यादि उपचार कर श्री गणेशजीकी मूर्तिको पंचामृत स्नान कराया जाता है । इसके उपरांत श्री गणेशमूर्तिपर दूर्वा अथवा लाल फूलसे जल छिडककर मूर्तिका अभिषेक कीजिए । यह अभिषेक श्री गणपति अथर्वशीर्ष अथवा ब्रह्मणस्पतिसूक्त का पाठ करते हुए कीजिए । षोडशोपचार पूजनमें इसके उपरांत किए जानेवाले उपचार इसप्रकार हैं,

श्रीगणेशजीको कपासका वस्त्र अर्पित कीजिए ।

अब यज्ञोपवीत अर्थात जनेऊ अर्पित कीजिए ।

श्रीगणेशजीको चंदन अर्पित कीजिए ।

अब श्रीगणेशजीको हलदी अर्पित कीजिए ।

तदुपरांत कुमकुम अर्पित कीजिए ।

अब सिंदूर अर्पण कीजिए ।

इसके उपरांत अक्षत अर्पित कीजिए ।

अब श्री गणेशजीके चरणोंमें पुष्प चढाइए ।

उपरांत शमीपत्र चढाइए ।

अब श्री गणेशजीको दूर्वा चढाइए ।

श्री गणेश चतुर्थीके दिन तुलसीमें श्री गणेश पवित्रक आकृष्ट करनेकी क्षमता जागृत होती है । इसलिए श्री गणेशजीको इस दिन तुलसीपत्र भी चढाइए । शमीपत्र एवं दूर्वाके साथ ही श्री गणेशजीको यथासंभव बिल्वपत्र, बदरीपत्र अर्थात बेरके पत्ते, धतूरा, मदारपत्रियां इत्यादि भी अर्पण की जाती हैं ।

यथासंभव पुष्पोंका हार भी चढाइए । यथासंभव दुर्वाका हार भी चढाइए ।

अब दो अगरबत्तियां दिखाइए, तदुपरांत दीप दिखाइए ।

अब मोदकका नैवेद्य निवेदित कीजिए ।

अब बीडासुपारी पर जल छोडिए । अब नारियलपर जल छोडिए ।

इसके उपरांत आरती कीजिए । अब कर्पूर आरती कीजिए ।

कर्पूर आरतीके उपरांत नमस्कार कर प्रार्थना कीजिए ।

इसके उपरांत श्री गणेशजीकी मूर्तिकी न्यूनतम आठ परिक्रमाएं की जाती हैं । यदि यह संभव न हो, तो स्वयंके चारों ओर घूमकर तीन परिक्रमाएं की जाती है । अंतमें भावपूर्ण मंत्रपुष्पांजलि अर्पित कर श्री गणेशजीको नमस्कार किया जाता है एवं पूजाकी समाप्ति की जाती है ।

( संदर्भ -सनातनका ग्रंथ-त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं व्रत )