

श्री गणेश क्षेत्रों में से अति प्राचीन विदर्भ की अदोष क्षेत्र में साक्षात् श्रीवामनावतार ने उपासना की थी । ऐसे इस परमपवित्र स्थान पर वामन द्वारा स्थापित (१) शमी विघ्नेश्वर की विलोभनीय मूर्ति और (२) श्री गणपति मंदिर
नागपुर जिले की सावनेर तालुका में अदासा नामक ऐतिहासिक गांव बसा है । वामनक्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र को अदोष क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है । अदोष क्षेत्र अर्थात जिस क्षेत्र में जाकर हम सभी दोषों से मुक्त हो जाते हैं, ऐसी १ सहस्र वर्षों से भी अधिक काल से हिन्दुआें की श्रद्धा है । आगे इस शब्द का अपभ्रंश होकर अदासा इस नाम से यह क्षेत्र प्रसिद्ध हुआ । अदासा में गणेश मंदिर, शमी विघ्नेश्वर नाम से प्रसिद्ध हैं । यहां की श्री गणेशमूर्ति स्वयंभू है, जिसकी ऊंचाई १२ फुट और चौडाई ७ फुट है । यह मंदिर १ सहस्र वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और विदर्भ के अष्टगणेशों में से एक हैं ।
इस मंदिर की ऐतिहासिक एवं आध्यत्मिक महत्ता अब देखेंगे । बलीराजा ने १०० यज्ञों का संकल्प कर इंद्रपद प्राप्त हो जाए, इतना सत्कार्य किया । अटूट भक्ति के बल पर उसने भारी मात्रा में सामर्थ्य प्राप्त किया । उसके द्वारा आयोजित यज्ञ का विध्वंस करने के लिए वामनरूप में अवतीर्ण हुए श्रीविष्णु ने शक्ति प्राप्त करने के लिए नागपुर जिले के अदोषक्षेत्र में शमी विघ्नेश की आराधना की । आगे उनकी कृपा से ही वामन ने बलीयज्ञ का विध्वंस किया । इस प्रसंग के उपरांत उसी क्षेत्र में वामन ने शमी विघ्नेश वक्रतुंड नाम से श्री गणेशमूर्ति की स्थापना की ।
यह क्षेत्र वामनवरद वक्रतुंड के क्षेत्र के रूप में पुराण में प्रसिद्ध है । यह देवस्थान अत्यंत जागृत माना जाता है ।
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स्वयंभू गणेशमूर्ति
अष्टविनायक