वर्धा जिले के केळझर में वरद विनायक श्री गणपति का मंदिर है, जिसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैली है । केळझर, नागपुर से ५२ किमी की दूरी पर है । यह पहाडी की गोद में बसा रमणीय स्थल है ।
वसिष्ठपुराण और महाभारत में इस मंदिर की महिमा का वर्णन है । दोनों धर्मग्रंथों में केळझर गांव का उल्लेख एकचक्र नगर है । केळझर में वसिष्ठ ऋषि का वास्तव्य था । ऐसा उल्लेख है कि वसिष्ठ ने भक्ति और पूजा के लिए इस गणेशमूर्ति की स्थापना की थी । उसी काल में वर्धा नदी की निर्मिति किए जाने का भी उल्लेख मिलता है । वसिष्ठ पुराण के अनुसार इस गणपति का नाम वरद विनायक और वर्धा नदी का नाम वरदा नाम है । यह काल प्रभु श्रीरामचंद्र के जन्म के पूर्व का है । उनके जन्म के पश्चात वसिष्ठऋषि ने यहां वास्तव्य छोड दिया ।
केळझर स्थित वरद विनायक श्री गणेशमूर्ति १.४० मीटर ऊंची और उसका व्यास ४.४० मीटर है । यह मूर्ति अत्यंत मनमोहक और जागृत होने से वह भक्तों की प्रार्थना शीघ्र सुनती-स्वीकारती है । ऐसी भक्तों की श्रद्धा है । यह मंदिर विदर्भ के अष्टगणेशों में से एक है ।
महागणपति
पार्वती द्वारा बनाए गए गणेश, महागणपति का अवतार हैं । उन्होंने मृत्तिका का आकार बनाकर, उसमें गणपति का आवाहन किया । जगदुत्पत्ति होने से पूर्व निर्गुण तथा कूटस्थ स्वरूप में होने के कारण उसे महत्तत्त्वास महागणपति कहते हैं । महागणपति जब विशिष्ट सिद्धि अथवा मोक्षप्राप्ति के लिए आराधना की जाती है, तब दाईं ओर सूंड के गणपति लेने की प्रथा है; परंतु ऐसे समय पर वह संभवत: पार्थिव गणपति होता है । कभी-कभी सोने-चांदी के दाईं सूंड के गणपति की मूर्ति पाई जाती हैं ।
प्रत्येक पुरुषदेवता की एक शक्ति होती है, उदा. ब्रह्मा-भारती, श्रीविष्णु-श्री लक्ष्मी, शिव-पार्वती । गणेशजी को माननेवाले संप्रदाय ने परब्रह्मरूप गणपति की एक शक्ति मानी हो, तो इसमें नया कुछ नहीं । श्री गणपति अपनी शक्तियों को अपनी गोद में लेकर उन्हें आलिंगन दे रहे हैं, ऐसा शिल्प उपलब्ध है । आज भी ऐसे रंगे हुए चित्र देखने के लिए मिलते हैं । उसीप्रकार सिद्धि एवं बुद्धि ये दो पत्नियां उनके दोनों और बैठी हैं, ऐसा भी शिल्प उपलब्ध है । अपनी शक्ति के साथ गणपति को तंत्रशास्त्र में महागणपति कहते हैं । (यह है बुद्धि द्वारा किया विश्लेषण । – संकलक)
वसिष्ठऋषि द्वारा स्थापित की हुई अत्यंत मनमोहक (१) वरद विनायक श्री गणपति की मूर्ति ! बुद्धिदाता वरद विनायक को शरणागत भाव से नमन करेंगे ! (२) केळझर (जिला वर्धा) में श्री वरद विनायक का मंदिर


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स्वयंभू गणेशमूर्ति
अष्टविनायक