१४ वीं शताब्दी के महान गणेश भक्त मोरया गोसावी, भगवान गणेशजी की उत्कट भक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं । उन्होंने पुणे जिले के मोरगांव में गणेश की भक्ति की । इसके साथ ही थेऊर में भी एक शिला पर बैठकर गणेशोपासना की । थेऊर गांव मुळा-मुठा नदी के किनारे बसा है ।
भगवान गणपति ने मोरया गोसावी को साक्षात्कार दिया कि मैं (गणपति) तुम्हारी पूजा के लिए चिंचवड में प्रकट होनेवाला हूं । तदुपरांत उन्हें कर्ही नदी में श्री गणेशमूर्ति प्राप्त हुई । तदुपरांत वे मोरगांव से चिंचवड में स्थायी हो गए । उन्होंने वहां गणपति मंदिर का निर्माण किया और वहां कर्हा नदी में प्राप्त हुई श्री गणेशमूर्ति की स्थापना की । कुछ समय पश्चात मोरया गोसावीजी ने वहीं पर संजीवन समाधि ली ।
गणेशभक्त मोरया गोसावीजी ने थेऊर के निकट जिस स्थान पर बैठकर साधना की, वह पवित्र शिला एवं स्थान !
मोरया गोसावीजी की उत्कट गणेशभक्ति की साक्ष्य देनेवाले इस स्थान को भावपूर्ण नमस्कार करेंगे !


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अष्टविनायक