
चंदोरी (नासिक) – नासिक से २५ कि.मी दूर स्थित गांव में अकाल के कारण गोदावरी नदी सूख गई थी । इससे नदी में डूबे मंदिर दिखाई देने लगे हैं । ये मंदिर लगभग ३४ वर्ष पानी के नीचे थे । अब उनके ऊपर आने पर लोगों ने वहां दर्शन के लिए आना प्रारंभ कर दिया है । इसमें अधिकांश मंदिर शिव के हैं । पुरातत्व विभाग के पास मंदिरों के विषय में कोई भी जानकारी नहीं थी; परंतु अंग्रेजों के काल के राजपत्र में गोदावरी के किनारे पर स्थित घाटों और अन्य अवशेषों की प्रविष्टि है ।
हेमाडपंथी शैली में सर्व घाट और मंदिर बने हैं । पेशवाआें के मंत्री सरदार हिंगणे और विंचरकर ने ये मंदिर चंदोरी गांव में अपने कार्यकाल में बनवाए थे । प्रत्येक मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की गई है । इसके साथ ही गहरी नदी में विद्यमान एक मंदिर में लेटी हुई मुद्रा में एक देवता की मूर्ति है । कहा जाता है कि यह मूर्ति इंद्र की है । नदी का संपूर्ण तल विविध शिवलिंगों और देवताआें की मूर्तियों से भरा है । उसमें से कुछ मूर्तियों को पहचानना भी कठिन है । नासिक के राजपत्र के अनुसार वर्ष १९०७ में नंदूर मध्यमेश्वर बांध बनाने के उपरांत यह घाट और मंदिर नदी में डूब गए थे । यहां के स्थानीय लोगों की इच्छा है कि इन दुर्लभ मूर्तियों और उनके अवशेषों को एकत्र कर एक संग्रहालय का निर्माण किया जाए । चंदोरी गांव के सरपंच संदीप तारले ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में इन मंदिरों को पहली बार ही देखा है । गर्मियों में इन मंदिरों का केवल शिखर ही दिखाई देता है । इससे पूर्व गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने भी ये मंदिर वर्ष १९८२ में देखे थे ।
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