भारत पर आए चीन व पाकिस्तान रूपी संकट से रक्षा के लिए पहले बताए गए मंत्र के स्थान पर यह मंत्र दिन में दो समय २१-२१ बार पढें !

मंत्रजप के विषय में नई सूचना

अगस्त महीने के पाक्षिक सनातन प्रभात अंक क्रमांक २ में (१६ अगस्त से ३१ अगस्त २०१७) प्रकाशित निम्नांकित मंत्र अभी भी पढा जा रहा है ।

निर्हस्त: शत्रुरभिदासन् अस्तु, ये सेनाभिर्युधमायन्त्यस्मान् । समर्पयेन्द्र महता वधेन, द्रात्वेषाम् अघहारो विविद्धः ॥ १ ॥ (अथर्ववेद, कांड ६, सूक्त ६६, मंत्र १)

परंतु अब यह मंत्र नहीं पढना है । इसके स्थान पर, वर्तमान परिवर्तित परिस्थिति के अनुरूप प.पू. पांडे महाराज का ही दिया हुआ नया मंत्र, प्रकाशित कर रहे हैं । इस नए मंत्र को दिन में दो ही समय २१-२१ बार पढना है ।

१. वर्तमान परिस्थिति

अ. ७.९.२०१७ को दैनिक सनातन प्रभात में छपे समाचार के अनुसार ‘मोदीजी और जिनपिंग के बीच बैठक हुई । इसमें दोनों देश सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए हैं । इसी प्रकार, इस बैठक में दोनों देशों के सैनिकों में समन्वय बनाने पर बल दिया गया है । चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है, ‘‘चीन और भारत प्रमुख पडोसी देश हैं । हम मिलकर पंचशील समझौते के अनुसार काम करने के लिए तैयार हैं ।’’ (वर्ष १९५४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू व चीन के राष्ट्रपति चाऊ-एन-लाई के बीच यह समझौता हुआ था । उस समय ‘हिन्दी चिनी भाई-भाई’ का नारा लगा था । परंतु ८ वर्ष पश्‍चात १९६२ में इस धूर्त चीन ने भारत पर आक्रमण किया था ।) अतः, कपटी चीन के वर्तमान आचरण पर विश्‍वास करना, आत्मघात होगा ।

आ. ८.९.२०१७ को छपे दैनिक सनातन प्रभात के अनुसार, ‘जनरल बिपिन रावत कहते हैं, ‘‘चीन से युद्ध आरंभ होने पर, पाकिस्तान से भी लडने के लिए तैयार रहना पडेगा । इसलिए, हमें पश्‍चिमी सीमा के साथ-साथ उत्तरी सीमा पर भी शस्त्रसज्ज और सतर्क रहना चाहिए ।’’

२. दक्षता के लिए राष्ट्ररक्षा हेतु निम्नलिखित नया मंत्र

यो अद्य सेन्यो वधो जिघांसन् न उदीरते । इन्द्रस्य तत्र बाहू समन्तं परि दद्मः ॥ (संदर्भ : अथर्ववेद, कांड ६, सूक्त ९९, मंत्र २)

अर्थ : हे इंद्रदेवता, आज हम पर आघात करने के लिए शत्रुसेना शस्त्रसज्ज खडी है । ऐसे में हमें आपकी भुजाआें का सुरक्षा-कवच प्राप्त हो । (और ‘हमें उन शस्त्रों का कष्ट न होे’, ऐसी आपके चरणों में प्रार्थना है ।) इस मंत्र का संशोधित ऑडियो http://sanatan.org/mr/a/31649.html पर उपलब्ध है ।

३. मंत्र पढने के विषय में सूचना

अ. नया मंत्र दिन में दो समय २१ बार पढना अथवा सुनना है ।  यह मंत्र २१ बार पढने या सुनने में लगभग ६ मिनट लगते हैं । अर्थात इस मंत्र को दो बार पढने एवं सुनने के लिए आपको प्रतिदिन १२ मिनट देना पडेगा । यह मंत्र जो ठीक से पढ सकते हैं, वे ही पढें और जो ऐसा नहीं कर सकते, वे इसकी ऑडियो सुनें ।

आ. मंत्र पढना आरंभ करने से पहले इंद्रदेवता से प्रार्थना करें –  ‘हे इंद्रदेवता, ‘दुष्ट स्वभाव के चीन और पाकिस्तान की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता; वे कभी भी शांति-समझौतों का उल्लंघन कर, भारत पर आक्रमण कर सकते हैं । अतः, भारतीय सैनिकों और नागरिकों को आपके चैतन्य से निर्मित सुरक्षा-कवच प्राप्त हो । उसी प्रकार, ‘उस समय उत्पन्न होनेवाले संकट का सामना करने के लिए हम सभी भारतीयों को बल प्रदान करें, यह आपसे प्रार्थना है !’  – परम पूज्य पांडे महाराज, सनातन आश्रम, देवद, पनवेल. (८.९.२०१७)

बुरी शक्ति : वातावरण में अच्छी तथा बुरी (अनिष्ट) शक्तियां कार्यरत रहती हैं । अच्छे कार्य में अच्छी शक्तियां मानव की सहायता करती हैं, जबकि अनिष्ट शक्तियां मानव को कष्ट देती हैं । प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के यज्ञों में राक्षसों ने विघ्न डाले, ऐसी अनेक कथाएं वेद-पुराणों में हैं । ‘अथर्ववेद में अनेक स्थानों पर अनिष्ट शक्तियां, उदा. असुर, राक्षस, पिशाच को प्रतिबंधित करने हेतु मंत्र दिए हैं ।’ अनिष्ट शक्ति के कष्ट के निवारणार्थ विविध आध्यात्मिक उपाय वेदादी धर्मग्रंथों में वर्णित हैं ।

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